बेगूसराय में शिकस्त के बाद कन्हैया ने लिखी फेसबुक पोस्ट, 'डर और हार' पर कही यह बात
बेगूसराय में हार के बाद अब कन्हैया कुमार ने अपने समर्थकों के लिए एक खास फेसबुक पोस्ट लिखी है।
नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में जहां एनडीए को भारी बहुमत मिला है, वहीं कई बड़े चेहरों को हार का मुंह भी देखना पड़ा है। इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के 9 पूर्व मुख्यमंत्री और खुद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी सीट से चुनाव हार गए। वहीं, केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, हरदीप सिंह पुरी, फिल्मों से राजनीति में आईं पूर्व सांसद जया प्रदा और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा को भी शिकस्त का स्वाद चखना पड़ा है। इस चुनाव में बिहार की बेगूसराय लोकसभा सीट से सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़े जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार भी हार गए। कन्हैया का मुकाबला केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से था। हार के बाद अब कन्हैया कुमार ने अपने समर्थकों के लिए एक विशेष फेसबुक पोस्ट लिखी है।

'चुनाव हारे हैं, जंग नहीं'
कन्हैया कुमार ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है, 'साथियों, आप सभी के हौसला अफ़ज़ाई के संदेशों के लिए तहे दिल से शुक्रिया। सभी को जवाब देना संभव नही हो पा रहा, इसलिए अपनी बात इस पोस्ट में लिख रहा हूं। आपके संदेश पढ़कर लगा कि आपको शायद लग रहा है कि मैं उदास हूं। ऐसा बिल्कुल नहीं है। मेरा मानना है कि
'चुनाव हारे हैं, जंग नहीं
हारे हैं, झुके नहीं
ज़िंदगी के लिए
सबकी ख़ुशी के लिए
चलेंगे-गिरेंगे, फिर उठेंगे
लड़ेंगे, जीतेंगे।'
इसी सोच की वजह से जीवन में यहां तक पहुंचा हूं। भरोसा रखिए, आगे भी यही जज़्बा कायम रहेगा। मैंने हमेशा कहा है कि यह हक और लूट तथा सच और झूठ के बीच की लड़ाई है। संख्या बल में हार जाने पर भी सच हमेशा सच ही रहता है। संख्या बल में तो गैलीलियो भी हार गए थे और कॉपरनिकस भी। बाबा साहेब भी हार गए थे और इरोम शर्मिला भी। जब दुनिया में राजतंत्र का दौर था, तब लोकतंत्र के पक्ष में आवाज़ उठाने वालों का अधिकतर लोगों ने विरोध किया था। आज का सच यही है कि नफ़रतवादी ताकतें 85% लोगों को 15% लोगों का डर दिखाकर 99% लोगों को लूट रही हैं। यह सच भले ही संख्या बल में आज हार गया हो, लेकिन एक दिन लोग इसकी अहमियत ज़रूर समझेंगे।'

'हमारा संघर्ष नफरत और लूट के खिलाफ'
फेसबुक पोस्ट में कन्हैया ने आगे लिखा, 'चुनाव के नतीजे से जिन लोगों को निराशा हुई है उन्हें भी यह बात समझने की जरूरत है कि यह हार हमारी सोच की हार नहीं है। हमारा संघर्ष नफरत और लूट के ख़िलाफ़ है। यह हमारे उन विरोधियों के बच्चों के भी भविष्य को बेहतर बनाने का संघर्ष है जो अभी हमारी बातों से सहमत नहीं हो पा रहे हैं। आज उनकी राजनीतिक समझ कुछ और है लेकिन अगर हम उनसे संवाद बनाए रखें तो एक न एक दिन उन्हें हमारी बातें ज़रूर समझ में आएंगी।'

'फर्जी महानता की तस्वीर जनता के सामने रखी'
कन्हैया कुमार ने लिखा है, 'एक दौर था जब रंगभेद, दासप्रथा आदि को समाज के बड़े तबके का समर्थन हासिल था। जिन देशों में कानूनी तौर पर रंगभेद, दासप्रथा आदि को मान्यता मिली थी, वहां भी जनता के आंदोलनों ने सच को सच और झूठ को झूठ साबित करके दिखाया। कोई बात सिर्फ़ इसलिए सही नहीं साबित हो जाती कि उसे एक बड़े तबके का समर्थन हासिल है। नफ़रत और हिंसा को देशप्रेम साबित करने की कोशिश के पीछे बाजार और सत्ता के गठजोड़ की असलियत आज बहुत मज़बूत प्रचार तंत्र के कारण बहुत बड़ी आबादी के सामने नहीं आ पा रही है। लेकिन अरबों रुपये खर्च करके फ़र्ज़ी महानता की जो तस्वीर जनता के सामने रखी गई है, उसके रंग बहुत जल्द सच्चाई की गर्मी से पिघल जाएंगे। हम सबको तब तक अपना हौसला और जज़्बा बनाए रखना है और अपने विरोधियों के साथ संवाद को कायम रखते हुए जन-हित के मुद्दों पर अपनी आवाज़ बुलंद करनी है।'
'क्योंकि डर के आगे हार है'
कन्हैया ने आगे लिखा, 'आपने जिस तरह तमाम मुश्किलों, धमकियों आदि का सामना करते हुए सच का साथ निभाया है उससे बहुतों को प्रेरणा मिली है। आपको अपनी यह भूमिका आने वाले समय में भी निभानी है। आपने उस चिड़िया की कहानी सुनी होगी जिसने जंगल में आग लगने पर चोंच में पानी भरकर आग बुझाने की कोशिश की थी। जब बाकी जानवरों ने उसका मज़ाक उड़ाया तो उसका जवाब था, "जब इतिहास लिखा जाएगा तो मेरा नाम आग बुझाने वालों में शामिल होगा और तुम लोगों का चुपचाप तमाशा देखने वालों में।" डरिए मत क्योंकि डर के आगे हार है और संघर्ष के आगे जीत। आइए, हम सब यह बात याद रखें:- पहले वे आपकी उपेक्षा करेंगे, उसके बाद आप पर हंसेंगे, फिर आपसे लड़ेंगे, लेकिन उसके बाद जीत आपकी होगी।'












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