2019 से पहले AAP का बड़ा दांव, यूपी को 4 प्रदेशों में बांटने के लिए छेड़ेगी आंदोलन

दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी ने यूपी की सियासत में एंट्री के लिए प्रदेश का बंटवारा कर छोटे राज्य बनाने का मुद्दा उठाने का फैसला किया है।

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों ने घेरेबंदी शुरू कर दी है। लोकसभा चुनाव की आहट के साथ ही केंद्र की सत्ता के लिए बेहद अहम कड़ी माने जाने वाली यूपी में पुराने मुद्दे भी उठने शुरू हो गए हैं। दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी ने यूपी की सियासत में एंट्री के लिए प्रदेश का बंटवारा कर छोटे राज्य बनाने का मुद्दा उठाने का फैसला किया है। 'आप' का कहना है कि यूपी एक बहुत बड़ा राज्य है और इसके उचित विकास के लिए प्रदेश को चार हिस्सों में बांटा जाना चाहिए।

जल्द शुरू होगा आप का आंदोलन: संजय सिंह

जल्द शुरू होगा आप का आंदोलन: संजय सिंह

आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, 'यूपी एक ऐसा विशाल राज्य है, जो आबादी के हिसाब से देखा जाए तो दुनिया का पांचवा देश है। इतने बड़े प्रदेश का सही विकास करना व्यावहारिक तौर पर बेहद मुश्किल है। हमारी पार्टी छोटे राज्यों की हिमायती है। आम आदमी पार्टी बहुत जल्द यूपी को चार छोटे प्रदेशों में बांटने का आंदोलन शुरू करेगी। इस आंदोलन को लेकर बहुत जल्द रणनीति भी तय की जाएगी।'

'छोटे प्रदेशों से खुलेगा विकास का रास्ता'

'छोटे प्रदेशों से खुलेगा विकास का रास्ता'

संजय सिंह ने कहा, 'केंद्र और यूपी में सरकार चला रही भाजपा भी छोटे राज्यों की पक्षधर रही है। यूपी में लंबे समय से पूर्वांचल, बुंदलेखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोग अलग राज्य की मांग उठाते रहे हैं। यूपी की जनता के विकास के लिए प्रदेश का बंटवारा बहुत जरूरी है। इस मुद्दे पर दूसरे सियासी दलों को भी गंभीरता से सोचना चाहिए। छोटे प्रदेश होंगे, तो विकास का रास्ता सुगम होगा और प्रदेश खुशहाल होगा।'

पहले भी उठी है बंटवारे की मांग

पहले भी उठी है बंटवारे की मांग

आपको बता दें कि यूपी के बंटवारे का मुद्दा इससे पहले भी कई बार उठ चुका है। राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के मुखिया चौधरी अजीत सिंह पश्चिम उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आने वाले जिलों को मिलाकर 'हरित प्रदेश' बनाने की मांग कई बार उठा चुके हैं। इसी तरह बुंदेलखंड को भी अलग राज्य घोषित करने की मांग उठती रही है। 2011 में बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी सरकार में प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, लेकिन इसपर कोई फैसला नहीं हो पाया।

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