Lok Sabha Election: मोदी की गारंटी को कांग्रेस की न्याय गारंटी देगी टक्कर! ये 8 मुद्दे रहेंगे हावी
Lok Sabha Election: लंबे इंतजार के बाद लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया। अब 19 अप्रैल से चुनाव 7 चरणों में शुरू होंगे। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों के लिए जोर-शोर से प्रचार अभियान शुरू होने के साथ ही उनके ढेर सारे वादे और गारंटियां इस प्रतिस्पर्धा में टकराएंगी।
मोदी के वादे, आगामी लोकसभा चुनाव में बड़े मुद्दों में गिने जा सकते हैं। वहीं, कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई और जीएसटी के मुद्दों पर घेरे सकती है। चुनावी अभियान के दौरान ये 8 प्रमुख मुद्दे उठाए जाने की संभावना है। आइए जानते हैं कौन से हैं बड़े मुद्दे...?

'मोदी की गारंटी'
बीजेपी ने 'मोदी की गारंटी' को अपने अभियान का मुख्य विषय बनाया है। 'मोदी की गारंटी'(मोदी के वादे), जैसा कि युवाओं के विकास, महिलाओं के सशक्तिकरण, किसानों के कल्याण और उन सभी लोगों के लिए गारंटी है, जो हाशिए पर हैं और कमजोर हैं। जिन्हें दशकों से नजरअंदाज किया गया है। यह विचार सभी कल्याणकारी योजनाओं की संतृप्ति सुनिश्चित करने के सरकार के लक्ष्य के बारे में भी है। प्रधानमंत्री सत्तारूढ़ पार्टी का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा होंगे। मोदी की गारंटी गरीबों के लिए मुफ्त अनाज और पिछले दस वर्षों में केंद्र सरकार की उपलब्धियों को उजागर करेगा।
कांग्रेस की न्याय गारंटी
सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों के लिए, पार्टी ने अपनी 5 'न्याय' गारंटी सामने रखी है जिसका उद्देश्य युवाओं, किसानों, महिलाओं, मजदूरों के लिए न्याय सुनिश्चित करना और साथ ही सहभागी न्याय सुनिश्चित करना है।
मणिपुर से मुंबई तक राहुल गांधी की अगुवाई वाली भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान लोगों के सामने 'न्याय' की गारंटी पेश की गई है। कांग्रेस का घोषणापत्र इन गारंटियों के इर्द-गिर्द तैयार किए जाने की संभावना है और पार्टी अपना अभियान इन्हीं गारंटियों के इर्द-गिर्द रखेगी। यह अभी भी देखा जाना बाकी है कि इसका परिणाम पार्टी के चुनावी पुनरुत्थान में होगा या नहीं।
राम मंदिर प्रतिष्ठा समारोह
22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह को बीजेपी ने जबरदस्त उत्साह के साथ मनाया। बीजेपी नेताओं ने सदियों पुराने सपने को साकार करने का श्रेय प्रधानमंत्री को दिया। चुनाव में इसका पूरा लाभ बीजेपी को मिलेगा। वहीं, प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण ठुकराने के लिए कांग्रेस पर हमला करेगी। कांग्रेस यह कहकर आलोचना को कुंद करने की कोशिश कर सकती है कि विवादित स्थान पर पहले अस्थायी रामलला मंदिर का ताला तब खोला गया था जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे।
चुनावी बांड डेटा
चुनाव आयोग ने चुनावी बांड का डेटा सार्वजनिक कर दिया है। कांग्रेस ने चुनावी बांड योजना में कथित भ्रष्टाचार के लिए सत्तारूढ़ बीजेपी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से उच्च स्तरीय जांच और उसके बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग की है। चुनाव से ठीक पहले उठे इस मसले को विपक्ष ने पकड़ लिया है। लेकिन, यह जमीनी स्तर पर काम करेगा या नहीं, यह अभी भी देखना बाकी है।
किसानों के मुद्दे, न्यूनतम समर्थन मूल्य
चुनाव से ठीक पहले दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन भी चर्चा में रहने की संभावना है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने किसानों को 'धोखा' दिया है और अपने गुट के सत्ता में आने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानूनी गारंटी प्रदान करने का वादा किया है। वहीं, विपक्ष किसान आंदोलन के मुद्दों को पकड़कर बीजेपी को घेरने का प्रयास कर रही है।
बेरोजगारी और मूल्य वृद्धि
कांग्रेस समेत इंडिया गुट बेरोजगारी और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाता रहा है। उन्होंने बार-बार कहा है कि नौकरियों की कमी सबसे बड़ा मुद्दा है और इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की है। बीजेपी ने रोजगार वृद्धि और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए पलटवार किया है। चुनावी मौसम में इन रोजी-रोटी के मुद्दों पर बहस तेज होगी।
CAA, अनुच्छेद 370 और समान नागरिक संहिता
चुनाव में CAA, धारा 370 का हनन, तीन तलाक जैसे मसले बीजेपी के लिए अस्त्र के रूप में काम करेंगे। बीजेपी ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के कार्यान्वयन और जम्मू-कश्मीर के लिए अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की अपनी उपलब्धि को पेश करना जारी रखा है।
बीजेपी की सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कानून तैयार करने के अपने उद्देश्य के अग्रदूत के रूप में उत्तराखंड में भी समान नागरिक संहिता पर एक कानून पारित किया है। मोदी सरकार ने इन कार्रवाइयों को यह दिखाने के लिए पेश किया है कि वह "बातचीत पर अमल करने" के मंत्र में विश्वास करती है। विपक्ष ने इन कदमों को बनाने, बांटने और एकरूपता थोपने का प्रयास बताया है। चुनावी मौसम में इन मुद्दों पर बहस तेज और आक्रामक होने की संभावना है।
विकसित राष्ट्र विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोकस विकसित राष्ट्र बनना है। कई सभाओं में उन्होंने 2047 तक लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार को प्रतिबद्ध बताया है। विकसित भारत का दृष्टिकोण बीजेपी के अभियान पर हावी होने की संभावना है, जबकि विपक्ष इसे एक और जुमला करार दे रहा है। हालांकि, अभियान के दौरान यह एक प्रमुख विषय बना रहेगा।












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