लोकसभा चुनाव: कैसे यूपी, बिहार से महाराष्ट्र तक कांग्रेस को सीटों पर करना पड़ा सरेंडर?
Lok Sabha Election 2024 News: इंडिया ब्लॉक में कांग्रेस की स्थिति इस समय बहुत ही कमजोर नजर आ रही है। जिन राज्यों में उसे भड़े भाई की भूमिका में होना चाहिए, वहां भी गठबंधन की एकता के नाम पर उसके हाथ बंधे हुए दिखाई पड़ रहे हैं। इसके ठीक उलट बिहार से यूपी तक और तमिलनाडु से लेकर महाराष्ट्र तक क्षेत्रीय दलों ने उसपर अपना भरपूर दबदबा बना लिया है और कांग्रेस विकल्प विहीन नजर आ रही है।
तृणमूल सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी चीफ और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की वजह से इंडिया ब्लॉक की औपचारिक अगुवाई भले ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे हों। लेकिन, कई महत्वपूर्ण राज्यों में सीटों पर तालमेल के दौरान कांग्रेस सिर्फ पिच्छलग्गू की भूमिका में नजर आई है।

बिहार में सीटों के बंटवारे में सिर्फ लालू की चली
बिहार में महागठबंधन की ओर से 40 सीटों पर औपचारिक बंटवारे का ऐलान भले ही शुक्रवार को किया गया। लेकिन, लालू यादव की आरजेडी ने कई सीटों पर पहले ही अपने प्रत्याशी घोषित कर संकेत दे दिया था कि कंट्रोल उसी के हाथों में है। लालू ने जिन सीटों पर अपने उम्मीदवार पहले ही घोषित कर दिए, उनमें से कई सीटें ऐसी थीं, जिसपर कांग्रेस दावेदारी जता रही थी। लेकिन, लालू टस से मस नहीं हुए।
पूर्णिया, सुपौल, बेगूसराय, औरंगाबाद कांग्रेस हर जगह निराश
सबसे चौंकाने वाली तस्वीर पूर्णिया की नजर आई। 2019 में यह सीट राजद ने कांग्रेस को दी थी। लेकिन, इस बार पप्पू यादव के कांग्रेस में पार्टी के साथ शामिल हो जाने के बावजूद लालू ने अपना प्रत्याशी उतार दिया। कांग्रेस और पप्पू को उम्मीद थी कि पूर्णिया न सही, लालू का दिल सुपौल पर जरूर पिघल जाएगा, जहां से उनकी पत्नी रंजीत रंजन दो बार सांसद भी रह चुकी हैं और पिछली बार मैदान में भी थीं। लेकिन, लालू को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा।
कांग्रेस के साथ इसी तरह का खेल बेगूसराय और औरंगाबाद में भी हो गया। कांग्रेस को यकीन था कि शायद लालू बेगूसराय ही कन्हैया कुमार के लिए औफर कर दें। 2019 में सीपीआई से लड़ने के बाद वे 2021 में कांग्रेस में आ गए थे। लेकिन, लालू को सीपीआई को एक सीट देनी थी, सो फिर से बेगूसराय ही देने का फैसला किया।
औरंगाबाद सीट पर पिछली बार जीतन राम मांझी का हिंदुस्तान आवाम मोर्चा विपक्षी गठबंधन से लड़ा था। अबकी बार वह एनडीए में जा चुका है तो कांग्रेस को लग रहा था कि शायद इस बार यह सीट लालू उसके लिए छोड़ दें। लेकिन, उन्होंने यहां भी अपने मन की सुनी। कांग्रेस के पास विकल्प नहीं रह गया था। सिर्फ इस बात की तसल्ली रह गई कि जेडीयू के जाने के बाद उसे आरजेडी 9 सीटें तो दे रही है!
तमिलनाडु में डीएमके ने कांग्रेस की जीती हुई सीटें बदल दी
तमिलनाडु में तो और कमाल हो गया। डीएमके ने कांग्रेस की 2019 में जीती हुई 3 सीटें भी बदल दी। जानकारी के मुताबिक डीएमके तो चाहती थी कि कांग्रेस 4 से 5 सीटें और वहां के उम्मीदवारों को बदल दे। लेकिन, बहुत मान मनौव्वल के बाद भी उसे थेनी, अरानी और तिरुचिरापल्ली की सीटें छोड़नी पड़ी। इनके बदले उसे तिरुनेलवेली, कुड्डालोर और मयिलादुथुराई के लिए राजी होना पड़ा।
महाराष्ट्र में बड़ी पार्टनर रहकर भी कांग्रेस की नहीं चल रही
बिहार और तमिलनाडु की बात तो समझ में आती है, जहां कांग्रेस राजनीतिक रूप से अपनी प्रमुख सहयोगी की छोटी पार्टनर है। लेकिन, महाराष्ट्र में तो अभी भी कांग्रेस अपने दोनों सहयोगियों शिवसेना (यूबीट) और एनसीपी (एससीपी) से बड़ा राजनीतिक संगठन है। यहां भी उद्धव ठाकरे की पार्टी उसे सांगली, भिवंडी, मुंबई साउथ सेंट्रल और मुंबई नॉर्थ वेस्ट देने को राजी नहीं है।
उद्धव ने तो सांगली और मुंबई साउथ सेंट्रल के लिए अपने प्रत्याशी तक घोषित कर दिए हैं। एक कांग्रेस नेता के मुताबिक, 'केंद्रीय नेतृत्व क्षेत्रीय पार्टियों को नाराज नहीं करना चाहता, क्योंकि संभावनाओं को लेकर वह सतर्क है...अगर हम ज्यादा दबाव डालेंगे तो ये पार्टियां कहेंगी कि एक राष्ट्रीय पार्टी और मुख्य विपक्ष दल के रूप में हम बड़ा दिल नहीं दिखा रहे हैं। उम्मीदें ये हैं कि सभी तरह के समझौते हमें ही करने हैं। हम तमिलनाडु और बिहार में सीमित भूमिका में हैं, लेकिन महाराष्ट्र में तो नहीं।'
यूपी में भी सपा ने तय की कांग्रेस की सीट
यूपी में भी समाजवादी पार्टी के सामने कांग्रेस हाशिए पर ही नजर आई है। शुरू में इसने अपनी ओर से घोषणा कर दी कि कांग्रेस 11 सीटों पर लड़ेगी। फिर उसने ऐसी सीटों पर भी उम्मीदवार उतार दिए जो कांग्रेस चाह रही थी। 17 सीटें तो तब छोड़ी गई, जब जयंत चौधरी की आरएलडी इंडिया ब्लॉक से बाहर निकल गई।
लेकिन, इतने के बावजूद भी सपा ने कांग्रेस के लिए कई सीटें नहीं छोड़ीं, जिसपर वह दावा जता रही थी। इनमें फर्रुखाबाद, भदोही, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती और जालौन लोकसभा सीटें शामिल हैं। इनमें से कुछ सीटें 2009 में कांग्रेस जीत भी चुकी है।
-
Silver Rate Today: चांदी भरभरा कर धड़ाम! ₹10,500 हुई सस्ती, 100 ग्राम के भाव ने तोड़ा रिकॉर्ड, ये है रेट -
'Monalisa को दीदी बोलता था और फिर जो किया', शादी के 13 दिन बाद चाचा का शॉकिंग खुलासा, बताया मुस्लिम पति का सच -
Gold Rate Today: सोने के दामों में भारी गिरावट,₹10,000 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 22k से 18k के भाव -
Mumbai Gold Silver Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में जारी है गिरावट, कहां पहुंचा रेट? -
15289 करोड़ रुपये में बिक गई राजस्थान रॉयल्स, कौन हैं खरीदने वाले काल सोमानी, IPL से पहले मचा तहलका -
Badshah Love Story: ‘टटीरी’ वाले रैपर बादशाह की दूसरी दुल्हन Isha Rikhi कौन हैं? कैसे परवान चढ़ा दूसरा इश्क? -
Iran Vs America: खत्म होने वाला है ईरान-इजराइल युद्ध! ट्रंप के बाद अब मोजतबा खामेनेई भी बातचीत के लिए तैयार -
VIDEO: BJP नेता माधवी लता ने एयरपोर्ट पर क्या किया जो मच गया बवाल! एयरपोर्ट अथॉरिटी से कार्रवाई की मांग -
Badshah Divorce Story: बादशाह ने रचाई थी इस ईसाई लड़की से शादी, 8 साल बाद तलाक क्यों? कौन है बेटी और कहां है? -
Badshah Second Marriage: रैपर बादशाह ने रचाई दूसरी शादी? तलाक के 6 साल बाद कौन बनीं रैपर की 'नई पत्नी' -
Iran Oil Offer to India: तेल संकट के बीच ईरान का भारत को बड़ा ऑफर! लेकिन चौंकाने वाली है तेहरान की नई शर्त -
Fact Check: 14 किलो वाले LPG सिलेंडर में 10 किलो की गैस मिलेगी? क्या है वायरल वीडियो की सच्चाई?












Click it and Unblock the Notifications