Chunavi Kissa: चुनावी वादा पूरा करने वाला ये PM हुआ था लोगों की नफरत का शिकार, गंवानी पड़ी थी कुर्सी
Lok Sabha Election Chunavi Kisse: वैसे तो कथन मशहूर है कि राजनीति में राजनेताओं की कथनी और करनी में अंतर होता है, लेकिन देश में एक ऐसे राजनेता भी थी, जिन्होंने अपना चुनावी वादा पूरा किया तो हमेशा के लिए देश की राजनीति बदल गई। चुनावी किस्सों में आज बात उसी नेता की होगी और वो थे विश्वनाथ प्रताप सिंह, जिन्हें वीपी सिंह के नाम से जाना जाता है।
यह बात है 1989 लोकसभा चुनाव की, जब सत्तारूढ़ कांग्रेस 1984 में प्राप्त 405 सीटों से बहुत नीचे उतर सीधे 197 सीटें जीत पर ला दिया था। पांच साल में कांग्रेस को 200 से ज्यादा सीटों का नुकसान हुआ। और इसके अगले साल यानी 1990 में देश एक क्रांतिकारी बदलाव का गवाह बना।

दरअसल, 1989 के आम चुनाव में जनता दल ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने पर मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू किया जाएगा। इसके बाद वीपी सिंह की सरकार बनी और उन्होंने अपने चुनावी वादे को पूरा किया। वीपी सिंह के इस फैसले से ओबीसी को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिला।
बता दें किसात अगस्त 1990 को वीपी सिंह की सरकार ने मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू करने का ऐलान किया। जिसके बाद पिछड़े वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, जो कि सामाजिक बदलाव की दिशा में क्रांतिकारी कदम था।
देशभर में आरक्षण के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन
इधर, मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के बाद देशभर के सवर्ण छात्र प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर आ गए। इसी दौर में मंडल कमीशन की राजनीति के खिलाफ भाजपा की कमंडल यानी हिंदुत्व की राजनीति शुरू की। 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की ओर से राम मंदिर निर्माण के लिए निकाली गई रथ यात्रा रोकने पर भाजपा ने वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई।
1991 में करना पड़ा आरक्षण लागू
आरक्षण लागू करने से पहले ही वीपी सिंह की सरकार गिर गई। इसके बाद 1991 में कांग्रेस की सरकार आई और उसे मंडल कमीशन की सिफारिशों के आधार पर आरक्षण व्यवस्था को लागू करना पड़ा। हालांकि वीपी सिंह के एक चुनावी वादे ने पूरे देश की राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया था।












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