अखिलेश के साथ गठबंधन के बीच मायावती का बड़ा एक्शन, 4 शीर्ष नेताओं को BSP से निकाला
2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बन रहे महागठबंधन से ठीक पहले बसपा सुप्रीमो मायावती एक्शन में आ गई हैं। मायावती ने गुरुवार को सख्त तेवर अपनाते हुए पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बसपा से चार शीर्ष नेताओं की छुट्टी कर दी।
नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बन रहे महागठबंधन से ठीक पहले बसपा सुप्रीमो मायावती एक्शन में आ गई हैं। मायावती ने गुरुवार को सख्त तेवर अपनाते हुए पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बसपा से चार शीर्ष नेताओं की छुट्टी कर दी। लखनऊ से जारी आदेश में इन चारों नेताओं पर पार्टी के खिलाफ काम करने का आरोप है। मायावती के इस कदम से जहां राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है, वहीं पार्टी के अंदर सुगबुगाहट है कि बसपा सुप्रीमो फिर से अपने पुराने अंदाज में लौट आई हैं। माना जा रहा है कि अभी कुछ और नेताओं को पार्टी से निकाला जा सकता है।

ये हैं वो चार नेता, जिनकी हुई छुट्टी
कैराना उपचुनाव के बाद खामोश नजर आ रहीं मायावती ने बड़ा एक्शन लिया है। गुरुवार को मायावती ने हिमाचल प्रदेश, पंजाब व दिल्ली-एनसीआर के प्रभारी और पूर्व एमएलसी मुकुट लाल तोमर, पूर्व सांसद कैसर जहां, पूर्व मंत्री रामहेत भारती और पूर्व विधायक जासमीर अंसारी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इनके अलावा मायावती ने मुकुल लाल के बेटे और गाजियाबाद में पार्षद संघदीप तोमर की भी पार्टी से छुट्टी कर दी। सभी के ऊपर पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप लगाया गया है।

3 प्रदेश के प्रभारी को बेटे समेत निकाला
इनमें से मुकुट लाल तोमर बसपा के काफी पुराने नेता हैं। तोमर के ऊपर हिमाचल प्रदेश, पंजाब और दिल्ली एनसीआर के प्रभारी पद की जिम्मेदारी थी। मुकुल लाल तोमर को बसपा ने एमएलसी भी बनाया था। तोमर की गिनती पार्टी के वफादार नेताओं में थी। मुकुट लाल तोमर के बेटे संघदीप तोमर गाजियाबाद में बसपा के पार्षद भी हैं। बताया जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब में निष्क्रियता के चलते मुकुट लाल तोमर से मायावती पिछले काफी दिनों से नाराज चल रहीं थी।

सीतापुर की पूर्व सांसद पति सहित पार्टी से बाहर
इनके अलावा सीतापुर लोकसभा सीट से सांसद रहीं कैसर जहां की गिनती भी पार्टी के दिग्गज नेताओं में थी। कैसर जहां 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर सांसद बनीं थी। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा ने कैसर जहां को टिकट दिया, लेकिन वो भाजपा उम्मीदवार राजेश वर्मा से चुनाव हार गईं। कैसर जहां 2005 में लहरपुर नगर पालिका से अध्यक्ष का चुनाव भी जीत चुकी हैं। कैसर जहां के अलावा उनके पति जासमीर अंसारी को भी पार्टी से निकाल दिया गया है। जासमीन अंसारी 2007 में बसपा के टिकट पर विधायक का चुनाव जीते थे।

भाजपा को हराकर मंत्री बने थे रामहेत भारती
वहीं, यूपी के सीतापुर जिले की हरगांव सीट से तीन बार विधायक और बसपा सरकार में मंत्री रहे रामहेत भारती भी पार्टी के शीर्ष नेताओं में गिने जाते हैं। रामहेत भारती ने 2002 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर भाजपा के पूर्व मंत्री दौलत राम को हराया था, जिसके इनाम स्वरूप मायावती ने भारती को अपने मंत्रिमंडल में जगह दी। इससे पहले भारती तीन चुनाव हार चुके थे। 2002 के बाद रामहेत भारती 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में भी बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने।












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