अमेठी, रायबरेली पर कंफ्यूज्ड! आक्रामक चुनाव प्रचार से दूरी, गांधी परिवार में चल क्या रहा है?

Lok Sabha Chunav 2024: लोकसभा चुनाव में 19 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है। भाजपा की ओर से प्रचार अभियान की कमान संभाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धुआंधार रैलियों और रोड शो में व्यस्त हैं। लेकिन, कांग्रेस की फर्स्ट फैमिली के तीनों प्रमुख सदस्यों में वह बात नहीं दिख रही है। गाहे बगाहे ही सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी किसी चुनाव अभियान में नजर आई हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि यूपी की जिन दो लोकसभा सीटों को कांग्रेस पार्टी और यह परिवार अपना गढ़ मानता आया है, अमेठी और रायबरेली वहां के चुनाव को लेकर भी पार्टी पूरी तरह से कंफ्यूज्ड है! अभी तक पार्टी तय नहीं कर पाई है कि इन दोनों सीटों से चुनाव लड़ेगा कौन?

congress and gandhi family

अमेठी, रायबरेली पर कांग्रेस कंफ्यूज्ड!
राहुल गांधी फिर से अमेठी में किस्मत आजमाएंगे या नहीं? क्या प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली से चुनावी राजनीति में एंट्री करेंगी या उनके पति रॉबर्ट वाड्रा को ही टिकट देने पर पार्टी मजबूर होगी? इसको लेकर जितनी मुंह उतनी बातें सुनाई पड़ रही हैं।

वायनाड में चुनाव हो जाने का इंतजार!
कांग्रेस में इस तरह की असमंजस तब है जब वह खुद को भाजपा-विरोधी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बाय डिफॉल्ट अगुवा मानकर चुनाव मैदान में उतरी है। राहुल गांधी के अमेठी से चुनाव लड़ने की संभावना को लेकर एक बात यह भी कही जा रही है कि वह पहले 26 अप्रैल को केरल के वायनाड में मतदान हो जाने का इंतजार कर रहे हैं। अमेठी में पांचवें चरण में 20 मई को चुनाव है और 3 मई को नामांकन की आखिरी तारीख है।

अमेठी में भाजपा की मजबूत उम्मीदवार से मुकाबला
जबकि, सामने में बीजेपी की वह उम्मीदवार हैं, जो पिछली बार उन्हें हरा चुके हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी अमेठी से वायनाड तक उनके पीछे पड़ी हैं। अमेठी में कहती हैं कि राहुल ने वायनाड में आतंकी संगठन (पीएफआई) का समर्थन लिया है। वह इस बात का भी जिक्र कर रही हैं कि कांग्रेस नेता ने नामांकन के दौरान वायनाड को अपना घर बताया है।

सवाल है कि क्या ऐसी स्थिति में उनका अमेठी से चुनाव लड़ना आसान होगा? वह स्मृति ईरानी जैसी तेज-तर्रार वाक्पटु नेता का जवाब आसानी से दे पाएंगे? यह उहापोह अमेठी में कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी दिख रही है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेठी में राहुल के समर्थक भी इस बात से परेशान हैं कि वह बीते पांच साल में सिर्फ चार ही बार इस क्षेत्र में आए हैं।

'वो जमाना चला गया'
सपा इस बार तो कांग्रेस के साथ गठबंधन में ही शामिल हो गई है। अमेठी में उसकी पार्टी के नेता भी परेशान हैं कि कांग्रेस तो उनके साथ किसी तरह की बैठक ही नहीं कर रही है। एक स्थानीय नेता का कहना है, 'राहुल हों या कोई भी नेता हो, वह केवल अपना नामांकन दाखिल करके लोगों की ओर हाथ हिलाकर गायब नहीं हो सकते...वो जमाना चला गया...।'

रायबरेली में भी जारी हैं अटकलें
इसी तरह रायबरेली में कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार खराब होता गया है। इस स्थिति में सोनिया गांधी सीधे चुनाव का रास्ता छोड़कर राज्यसभा के माध्यम से संसद पहुंच चुकी हैं। उनकी जगह शुरू से प्रियंका वाड्रा की उम्मीदवारी की चर्चा है। लेकिन, पार्टी यहां भी असमंजस में है। सोनिया के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पिछले पांच साल से चुनाव लड़ने को उतावले लग रहे हैं। लेकिन, पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी की मानें तो फिलहाल उन्हें मौका नहीं दिया जाने वाला है।

इसी तरह से इस बार के चुनाव प्रचार में गांधी परिवार अबतक उतना आक्रामक नजर नहीं आ रहा है, जितना पार्टी के घोषणापत्र जारी करने में नजर आ चुका है। राहुल-सोनिया राजस्थान में जरूर नजर आ चुके हैं। राहुल तेलंगाना में भी पार्टी का प्रचार करते दिख चुके हैं और वायनाड में नामांकन के दौरान रोड शो में उनकी बहन प्रियंका भी उनके साथ आ चुकी हैं।

लेकिन, यह भारत का आम चुनाव है, जहां 543 सीटों के लिए मतदान होने वाला है। लोकतंत्र के इतने बड़े महाभियान की तुलना में मुख्य विपक्षी पार्टी के प्रमुख परिवार के नेताओं की चुनावी शिथिलता कई तरह के सवाल खड़े कर रही है।

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