Reservation in Private Sector: कर्नाटक ही नहीं, ये 7 राज्य भी चल चुके हैं स्थानीय आरक्षण वाला कार्ड
Karnataka Local Reservation Bill: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने घोटालों के कई आरोपों के बीच निजी क्षेत्र में सी और डी श्रेणी के कर्माचारियों में 100% स्थानीय लोगों को नौकरी देने का आदेश देकर बड़ा राजनीतिक दांव चला है।
कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार का नया आदेश न्यायिक समीक्षा में किस हद तक टिक पाता है या वह कॉरपोरेट जगत के विरोध को किस हद तक झेल पाती है, यह आगे देखने को मिलेगा। लेकिन, देश में कई ऐसे राज्य हैं, जिनकी ऐसी ही मंशा रही है और वह जाहिर भी कर चुके हैं।

हरियाणा में 75% आरक्षण वाला दांव
हरियाणा सरकार ने निजी क्षेत्र में 75% स्थानीय लोगों को नौकरी देने वाला कानून पास किया था। हालांकि, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इसे 'असंवैधानिक और संविधान के तीसरे भाग का उल्लंघन' करार दे दिया है। हरियाणा सरकार ने 30,000 रुपए से कम सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए यह कानून बनाया था। हरियाणा सरकार की याचिका पर यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
आंध्र प्रदेश में निजी क्षेत्र में 75% लोकल कोटा
2019 में जब आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की सरकार बनी थी, तब उसने फौरन ही विधानसभा से निजी उद्योगों में 75% नौकरियां स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने का बिल पास करा लिया था।
उद्योग जगत ने इसे राज्य की तरक्की में बाधक और निवेश को हतोत्साहित करने वाला बताया, लेकिन जगन रेड्डी सरकार किसी की सुनने के लिए तैयार नहीं हुई।
बाद में यह मामला आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट पहुंचा और उच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि 'यह कानून असंवैधानिक' हो सकता है।
महाराष्ट्र में प्राइवेट कंपनियों में 80% आरक्षण की कोशिश
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार के कार्यकाल के दौरान साल 2020 में निजी क्षेत्र में 80% नौकरियां स्थानीय लोगों को दिलाने की योजना पर तैयारी की गई थी।
योजना के तहत उन लोगों को भी इस दायरे में लाया जाना था, जो 15 साल से ज्यादा से राज्य में रह रहे हैं। तब राज्य के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने कहा था कि सरकार पहले ही निजी कंपनियों से कह चुकी है कि 80% जॉब स्थानीय लोगों को दें, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।
मध्य प्रदेश में भी हो चुकी 70% लोकल कोटे वाली घोषणा
जब वहां कांग्रेस की सरकार थी, तब तत्कालीन सीएम कमलनाथ ने निजी नौकरियों में 70% सीटें स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित किए जाने के लिए कानून लाने की बात कही थी। बाद में जब बीजेपी की सरकार आई और शिवराज सिंह चौहान सीएम बने तो उन्होंने कहा, 'जो यहां का मूल निवासी है, वही शासकीय नौकरियों में आकर प्रदेश का भविष्य संवारे यही मेरा सपना है।'
तेलंगाना में 95% लोकल कोटा
तेलंगाना में केसी राव की सरकार के कार्यकाल के दौरान 2022 में एक सरकारी सर्कुलर जारी करके निगम, संस्थाओं, बोर्ड और सोसाइटीज में 95% छोटे-बड़े पद स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया गया था।
झारखंड में निजी क्षेत्र में 75% कोटे वाला सरकारी अभियान
अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने एक बड़ा दांव चला है। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार एक अभियान चलाएगी कि प्राइवेट कंपनियों की 75% नौकरियां स्थानीय बेरोजगार युवकों को मिलें।
उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार प्राइवेट कंपनियों में स्थानीय युवाओं को 75% आरक्षण देने की कोशिश कर रही है। स्थानीय कंपनियां भी इस प्रक्रिया में सहयोग कर रही हैं।'
ममता भी लोकल के लिए दिख चुकी हैं 'वोकल'
उधर पश्चिम बंगाल में जब पिछली बार टीएमसी की सरकार बनी थी तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि उनकी कोशिश है कि राज्य सरकार की नौकरियों में स्थानीय लोगों को ही तरजीह मिले। उन्होंने कहा था कि बांग्लाभाषी लोगों को सरकारी नौकरियां मिलने से सरकार के कामों में आसानी होगी। हालांकि, निजी क्षेत्र के लिए इस तरह की कोई खास पहल सामने नहीं आई है।












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