लिव इन रिलेशन में रहना अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। लिव इन रिलेशन में रहना अब अपराध नहीं हैं, समाज इसे धीरे-धीरे स्वीकार कर रहा है तो इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, यह कहना देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट का। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आज के बदलते दौर में लोगों ने धीर-धीरे लिव इन रिलेशन को स्वीकार कर ही लिया है।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने यह बातें आपराधिक मानहानि के मामले की सुनवाई के दौरान कही, कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई पब्लिक फिगर लिव इन रिलेशन में रहता है तो उसके बारे में लिखते समय मर्यादा बरतनी चाहिए।

लिव इन रिलेशनशिप समाज में स्वीकार्य हो चुका है

यह बातें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस पी. सी. पंत की ओऱ से कही गईं। किसी भी व्यक्ति के बारे में केवल वो ही बातें प्रकाशित की जायें जो कि पब्लिक इंट्रेस्ट में हो ना कि उनकी पर्सनल लाइफ से जुड़ी हो।

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