हर नागरिक का 18वां जन्म दिन शादी से बढ़कर: नरेंद्र मोदी

आईआईटी, आईआईएम, अजीम प्रेमजी इंस्टीट्यूट समेत कई संस्थानों से छात्रों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। सभी छात्रों के प्रेजेंटेशन्स को सुना, समझा और महत्वपूर्ण बिंदु नोट किये। युवाओं के बीच बैठे मोदी ने देश के युवाओं के अंदर की ऊर्जा को अच्छी तरह समझा। अंत में उन्होंने सभी छात्रों के सवाल सुने और अपने भाषण में उन सवालों के जवाब दिये।
जो सबसे महत्वपूर्ण बात उन्होंने कही वो थी हर नागरिक का 18वां जन्म दिन। उसे शादी-ब्याह से भी ज्यादा धूमधाम से मनाना चाहिये, क्योंकि आप उस दिन देश के भाग्यविधाता बनते हैं। उस दिन आपके घर पर इलेक्शन कमीशन की चिठ्ठी आनी चाहिेये।
नरेंद्र मोदी का पूरा भाषण
मोदी ने कहा- जब आप शिक्षा के लिये सोचते होंगे, तब, जब इस मंच पर आते होंगे, जब आप प्रेजेंटेशन तैयार करते होंगे, तब आपके दिल और दिमाग में वो गरीब बच्चा दिखता होगा, आपको उसकी चिंता सताती होगी। आप फूड सिक्योरिटी, मालन्यूट्रीशन पर जब प्रेजेंटेशन तैयार करते होंगे, तब आपके दिल और दिमाग पर वो कुपोषित बच्चे आते होंगे, वो करोड़ों लोग आते होंगे जो भूख से मर रहे होंगे, उनकी वेदना होगी तब जाकर आपका प्रेजेंटेशन बनाने में मन लगा होगा।
महत्वपूर्ण है नॉर्थ ईस्ट
मित्रों दिल्ली में क्या पूरे देश में शायद ही कभी किसी ने नॉर्थ ईस्ट के विषय में सोचा होगा। मित्रों आज मैं भाषण नहीं दूंगा, मैं सिर्फ आपसे बात करूंगा। दो वर्ष पूर्व मैंने नॉर्थ ईस्ट के सभी मुख्यमंत्रियों को चिठ्ठी लिखी और प्रस्ताव रखा कि आपके राज्य से 200 महिला पुलिकर्मियों को गुजरात भेजिये, उनकी पूरी व्यवस्था हम करेंगे और हमेशा 200 महिला पुलिसकर्मी यहां रहें, फिर बदलते जायेंगे। मेरे मन में सोच यह थी कि जो लड़कियां यहां आयेंगी, वो यहां के गांवों में जायेंगी और लोगों से मिलेंगी और गुजरात के पर्यटन को वैल्यू एडीशन होगा, और नॉर्थ ईस्ट के टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। टेरेरिज्म डिवाइड, टूरिज्म यूनाइट।
विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थाओं का महत्व
विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों का देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान होता है। हमारे देश में बहुत बड़ा डिसकनेक्ट है। हम जबतक एक दूसरे से जोड़ते नहीं हैं, तब तक बिखराव बना रहेगा। मुझे प्रधानमंत्री जी ने एक काम दिया था। जब महंगाई कंट्रोल नहीं हो रही थी, तब उन्होंने एक कमेटी बनायी और उसका अध्यक्ष मुझे बनाया। मैंने खूब मेहनत से एक रिपोर्ट तैयार की और उन्हें दी। यह रिपोर्ट दो साल पहले दी थी, क्या हुआ उस रिपोर्ट का पता नहीं।
उसमें मैंने एक सुझाव दिया था कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के तीन हिस्से कर दीजिये। खरीदने वाला अलग, रखरखाव करने वाला अलग और बांटने वाला अलग। एक दूसरे पर नजर रहेगी एफिशियंसी बढ़ेगी हमारा काम ठीक होगा। हमने सुझाव दिया था कि हमारे पास रियल टाइम डाटा ही नहीं है। हमारे आईटी विशेषज्ञ अमेरिका का भला कर रहे हैं। दुनिया भर को सॉफ्टवेयर बना कर दे रहे हैं। अपने देश के लिये भी हम रियल टाइम डाटा रखने के लिये सॉफ्टवेयर तैयार कर सकते हैं। उनकी मैपिंग करके हम समय रहते हुए खराब होने वाले अनाज को बचाया जा सकता है।
शौचालय पहले देवालय बाद में
मित्रों यहां समस्याओं के समाधान को नहीं खोजा जाता है। अब सैनीटेशन की ही बात ले लीजिये। 21वीं सदी में हम जी रहे हैं, लेकिन आज भी हमारी करोड़ों माताओं बहनों को शौच के लिये खुले में जाना पड़ता है। यह हमारे लिये शर्मनाक है। मित्रों मेरी पहचान हिन्दुत्ववादी की है, लेकिन मेरी रियल सोच, जो है वो मैंने अपने राज्य में कही भी है। वो है पहले शौचालय फिर देवाालय। हर गांव में लाखों रुपए के देवालय तो हैं, लेकिन शौचालय नहीं।
ऐसी समस्याओं से निबटने के लिये हिम्मत के साथ नेतृत्व करने की हिम्मत चाहिये, जो हमारे देश में है ही नहीं। हमारी सीमा आउटलेट तक ही सीमित है, जब तक आउटकम को नहीं देखेंगे। आउटकम से आगे एक कदम और सोशल ऑडिट।
लैब टू लैंड का कॉन्सेप्ट जरूरी
हमने सदियों से देखा है कि जहां-जहां पानी होता है, वहीं मानव संस्कृतियां बसती हैं। जहां नदी-समुद्र थे वहां बस्तियां बसती थीं। फिर जहां 6-लेन हाईवे बने वहां बस्तियां बनने लगीं। भविष्य में जहां से ऑप्टिकल फाइबर गुजरेगा, वहीं बस्तियां बसेंगी। गांव में लॉन्ग डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से दूर-सुदूर अच्छी शिक्षा क्यों नहीं दे सकते। मेरा अनुभव कहता है कि हम यह काम कर सकते हैं। टेक्नोलॉजी के इस जमाने में क्वालिटी एजूकेशन अब दूर का सपना नहीं है। जमीन नापने वाले टोडरमल ने कहा था कि हर तीस वर्ष में एक बार जमीन नापनी चाहिये।
मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि पिछले 100 साल में जमीन नापने का काम कभी नहीं हुआ। इस वजह से किसान को चिंता रहती है कि मेरी जमीन कतनी है, इसलिये वो बाड़ लगा देता है। जमीनों पर झगड़े होते हैं और बर्बाद हो जाता है। क्यों न हम खेती को तीन हिस्सों में बांटना चाहिये। एक तिहाई रेग्युलर फार्मिंग, एक तिहाई एनिमल हस्बेंड्री और एक तिहाई एग्रोफॉरेस्ट्री। खेत के किनारे पर बाड़ लगाकर जमीन बर्बाद करते हैं, वहां अगर टिम्बर के पेड़ लगा दें, तो किसी भी किसान को आत्महत्या नहीं करनी पड़ेगी।
कभी-कभी लगता है कि हमारा ज्ञान गोल्ड मैडल के लिये, डिग्री के लिये होता है। अगर हमें एग्रीकल्चर को आगे बढ़ाना है, तो लैब टू लैंड का कॉन्सेप्ट नहीं लाते हैं, तब तक किसानों को कुछ नहीं मिलेगा।
विषय बहुत छोटे-छोटे होते हैं। सारी दुनिया में पर्यटन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। पूरी दुनिया में 3 ट्रिलियन डॉलर तक का उद्योग बन सकता है। लेकिन हम समृद्ध भारत के होते हुए भी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर पाते हैं। मित्रों पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी में बहुत बड़ा स्कोप है, नौकरियों का।
कोई क्रिमिनल कैंडिडेट हो पार्टी पसंद हो, तो क्या करें। आपका यह टेंशन सुप्रीम कोर्ट ने दूर कर दिया है। आज कोई बेईमानों को वोट नहीं देना चाहता है। बेईमानी समाप्त करनी है, तो ट्रांसपेरेंसी लानी होगी। टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल ट्रांसपेरेंसी ला सकता है।
जब मैं मुख्यमंत्री बना
मित्रों जब मैं मुख्यमंत्री बना, तब तक मैंने सीएम ऑफिस भी नहीं देखा था। कभी क्लास मॉनीटर का भी चुनाव नहीं लड़ा था। मैं सीधे कच्छ पहुंचा। वहां मैंने एक बुद्धिजीवी वर्ग से मुलाकात की। उसने कहा कि जब कोई भी सरकारी आदमी आता है, नेता आता है, तो वह सीमा, पाकिस्तान, सिक्योरिटी, बॉर्डर की बात करता है। आप कम से कम वैसी बातें मत कहियेगा।
मैंने सोचा यह व्यक्ति सही कह रहा है। मैंने उसी दिन से कच्छ के विकास के बारे में सोचना शुरू कर दिया। विश्व बैंक की रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया कि इतनी बड़ी आपदा के बाद किसी भी शहर को कम से कम सात साल लगते हैं। लेकिन कच्छ तीन साल में दौड़ने लगा। मित्रों बस उसी दिन से मुझे इस बात का अहसास हो गया है कि संसाधन हमारे पास हैं, अगर सही ढंग से इस्तेमाल करें, तो कुछ भी इंपॉसिबल नहीं।
मित्रों आपमें से किसी ने पूछा कि मैं गरीब हूं, मैं कैसे राजनीति में आने के बारे में सोच सकता हूं। मित्रों मेरे परिवार में सात पीढ़ी में कोई राजनीति कर र भी नहीं जानता था। मित्रों मैं कभी रेल के डिब्बों में चाय बेचता था। आज आपके सामने खड़ा हूं। आप यह चिंता छोड़ दीजिये, कि आपका क्या बैकग्राउंड है। अगर आपके दिल में समाज और देश के लिये कुछ करने की आग है, तो निकल पड़ें रास्ता अपने आप बन जायेगा। लेकिन मित्रों लेना, पाना, बनना यह ख्वाब बनकर चलोगे तो ख्वाब-ख्वाब बन कर रह जायेगा, लेकिन देने के मिजाज से चलोगे तो दुनिया आपके कदम चूमेगी।
सेक्युलरिज्म की परिभाषा
मेरे लिये रेक्युलरिज्म की परिभाषा सिर्फ एक है- इंडिया फर्स्ट। हम जो भी करें अगर भारत की भलाई के लिये नहीं है, तो सब बेकार। सर्व धर्म संभाव। कोई अपना कोई पराया नहीं। जस्टिस टू ऑल अपीज़मेंट टू नन। गरीब गरीब होता है, वो मंदिर, मस्जिद में जाता है या गुरुक्ष्द्वारे में जाता है यह कोई मायने नहीं रखता।
मित्रों सरकार का एक ही धर्म और मजहब होता है इंडिया फर्स्ट। सरकार का एक ही धर्मग्रंथ होता है। वो है हमारा संविधान। सरकार की एक ही भक्ति भारत भक्ति, एक ही शक्ति सवा सौ करोड़ नागरिक, एक ही नारा सबका साथ सबका विकास। इसीलिये कुछ लोगों के लिये सेक्युलरिज्म सिर्फ भले भोले गरीब लोगों की आंख में धूल झोंकने का हथियार है।
मित्रों मैंने पीएम साहब को सुझाव दिया कि हमें सॉलिडवेस्ट मैनेजमेंट पर एक नई रणनीति के साथ 500 शहरों को चुनें और वहां के वेस्ट का ट्रीटमेंट करके उत्पाद बनायें। पीएम साहब ने कहा योजना आयोग को बताओ, सैम पित्रोदा को बताओ। मैं पीछे लगा रहा, कुछ नहीं हुआ फिर मैंने उसी को अपने गुजरात में इंप्लीमेंट कर दिया।
18वां बर्थडे जरूर सेलेब्रेट करें, क्योंकि आप उस दिन देश के भाग्य विधाता बनते हैं
मित्रों जब बच्चा पहली बार स्कूल जाता है तो मां-बाप उत्साहित होते हैं। शादी होती है तो धूमधाम होती है। ग्रेजुएट होने पर डिग्री लेने पूरा परिवार पहुंच जाता है। लेकिन 18 का होने पर कोई खुशी नहीं, जबकि 18 का होने पर आपको गौरव होना चाहिये कि हम देश के भविष्य की निर्धारक बने हो। हमें 18वां बर्थडे सेलेब्रेट करना चाहिये, इलेक्शन कमीशन को एक चिठ्ठी भेजनी चाहिये, स्कूल कॉलेज को सेलेब्रेट करना चाहिये हर व्यक्ति की 18वीं बर्थडे को। उसी दिन आप देश के भाग्यविधाता बनते हैं।
सोशल मीडिया की ताकत है, आप तय करिये कि मैं मतदाता हूं, क्या आप मतदाता बने। यह सबको मैसेज करते रहिये। मित्रों हमें जितने लोगों से विचार मिलते हैं, वो देश को सही दिशा में ले जाने की ताकत बनते हैं। मैं ट्विटर फेसबुक पर हर विचार को सुनने की कोशिश करता हूं। आप इंडिया272 की वेबसाइट पर जाइये और वहां एक प्लेटफॉर्म है। उस ओपन प्लेटफॉर्म पर आइये और जुड़ें। विकास पर ही हमारे देश का विकास निर्भर है।
मोदी के समक्ष छात्रों ने रखे ये सवाल-
मध्य प्रदेश- क्या हमारे पास इतनी टेक्नोलॉजी नहीं है, कि हम हथियार बना सकें, बाहर से क्यों खरीदते हैं?
पटना- किसानों की आत्महत्या कैसे रोकेंगे?
महाराष्ट्र-अगर मोदी पीएम बने, क्या गुजरात वैसा ही गुजरात रहेगा, जैसा है?
सम- नॉर्थ ईस्ट के बारे में आप क्या सोचते हैं। क्या आपके पीएम बनने से स्थितियों में बदलाव होंगे?
दिल्ली- भारत चौथी डेंजरस कंट्री है, यहां महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं। कब वो समय आयेगा जब सुरक्षा का अहसास होगा?
गुजरात - मंथन के बाद हमारा मनोबल बढ़ा कि हम भी राजनीति में आयें, लेकिन मिडिल क्लास से हिम्मत नहीं होती?
पटना- आपने अपना राजनीतिक सफर कैसे शुरू किया?
बैंगलोर- आप भारत को 2020 में कहां देख रहे हैं?
गुमनाम- हमारे पार पाकिस्तान के खिलाफ सारे सबूत हैं, फिर भी हम कोई स्टेप क्यों नहीं लेते?
राउरकेला- फूड सिक्योरिटी पर करोड़ों अरबों रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन लोग फिर भी मर रहे हैं?
लखनऊ- आपके अनुसार सेक्युलरिज्म की क्या परिभाषा है?
दिल्ली- युवा उद्यमी नहीं उभर पा रहे हैं, क्यों?
दिल्ली- सरकार के फेलियोर के लिये क्या साझा सरकार को ब्लेम करना चाहिये?
पटना- 18-22 के छात्रों के पास वोटरकार्ड नहीं हैं। क्या आपके पास कोई प्लान है? हममें से अधिकांश इसका प्रोसीजर भी नहीं जानते हैं?












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