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LIC Row: क्या अदाणी ग्रुप ने एलआईसी पर बनाया था दबाव? कंपनी ने वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पर किया बड़ा खुलासा

LIC Row: भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने अमेरिकी अख़बार द वॉशिंगटन पोस्ट की उस रिपोर्ट का सख्त खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि एलआईसी ने अडानी समूह की कंपनियों में निवेश सरकारी दबाव में किया था।

एलआईसी ने शनिवार, 25 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' (X) पर बयान जारी करते हुए कहा कि उसके सभी निवेश निर्णय "स्वतंत्र, पारदर्शी और विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद" लिए गए हैं।

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वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में क्या था दावा?

अमेरिकी अख़बार द वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस साल की शुरुआत में एलआईसी पर अडानी समूह में निवेश करने के लिए दबाव डाला। रिपोर्ट में कहा गया था कि उस समय अडानी समूह भारी कर्ज़ में डूबा हुआ था और अमेरिकी एजेंसियां उसकी वित्तीय गतिविधियों की जांच कर रही थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी हस्तक्षेप के चलते एलआईसी ने अडानी की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, जिससे निवेशकों और पॉलिसीधारकों के हितों पर खतरा मंडराया।

एलआईसी ने क्या कहा?

एलआईसी ने रिपोर्ट को "झूठा, भ्रामक और भारत के वित्तीय तंत्र की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला" बताया। कंपनी ने कहा, "वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग या किसी अन्य सरकारी संस्था की हमारे निवेश निर्णयों में कोई भूमिका नहीं होती। एलआईसी अपने निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित नीतियों के तहत, विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद ही निवेश का फैसला लेती है।"

एलआईसी ने यह भी कहा कि उसने 'ड्यू डिलिजेंस' (due diligence) यानी जांच-पड़ताल के उच्चतम मानकों का पालन किया है और हर निवेश निर्णय मौजूदा नीतियों, अधिनियमों और नियामक दिशानिर्देशों के अनुरूप लिया गया है।

कंपनी ने कहा - "रिपोर्ट से हमारी साख पर प्रहार"

एलआईसी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उसकी निवेश रणनीति बेहद मजबूत रही है। कंपनी ने कहा कि भारत की शीर्ष 500 कंपनियों में उसका निवेश मूल्य 2014 के ₹1.56 लाख करोड़ से बढ़कर 2024 में ₹15.6 लाख करोड़ हो गया है - यानी 10 गुना वृद्धि। यह एलआईसी की वित्तीय प्रबंधन क्षमता और दीर्घकालिक निवेश नीति की सफलता को दर्शाता है।

एलआईसी ने बयान में कहा कि वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट "कंपनी की निर्णय प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने और भारत के मजबूत वित्तीय क्षेत्र की छवि धूमिल करने की कोशिश" है। आर्टिकल में जिन तथ्यों और योजनाओं का जिक्र किया गया है, ऐसे किसी भी दस्तावेज़ को एलआईसी ने न कभी तैयार किया और न ही उसका अस्तित्व है," कंपनी ने स्पष्ट किया।

कांग्रेस का आरोप - "30 करोड़ पॉलिसीधारकों के साथ धोखा"

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और एलआईसी दोनों पर हमला बोला।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा अडानी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए एलआईसी और उसके 30 करोड़ पॉलिसीधारकों की बचत का व्यवस्थित दुरुपयोग किया गया है। संसद की लोक लेखा समिति (PAC) को इसकी जांच करनी चाहिए। हालांकि, अब तक सरकार या अडानी समूह की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

एलआईसी का यह बयान न केवल वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट का जवाब है, बल्कि यह भारत के सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों में पारदर्शिता और स्वायत्तता के मुद्दे को भी रेखांकित करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस की मांग पर पीएसी (PAC) इस मामले की जांच शुरू करती है या नहीं, और सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।

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