दिल्ली में फिर चुनाव, डरे-सहमे हैं तमाम नेता
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अब तय हो गया है कि दिल्ली में सरकार नहीं बन रही। लिहाजा दिल्ली में चुनाव होंगे। पर दिल्ली विधानसभा के ज्यादातर विधायक इस बात से खुश नहीं हैं कि उन्हें एक साल से भी कम समय के भीतर चुनाव के मैदान में कूदना पड़ रहा है।

भाजपा के समर्थन से पिछला विधान सभा चुनाव शाहदरा विधान सभा सीट से जीते अकाली दल के विधायक जितेन्द्र सिंह शंटी ने कहा कि बेहतर तो यह होता कि दिल्ली में सरकार बन जाती और विकास का पहिया घूमने लगता। पर अफसोस यह नहीं हुआ। मेरा मानना है कि अभी दिल्ली की जनता भी तैयार नहीं है फिर से मतदान केन्द्रों में जाकर वोट देने के लिए। उन्होंने विधान सभा के बाद लोकसभा के चुनाव में वोट डाले। फिलहाल वह फिर से वोट डालने के मूड में नहीं है। यानी उसका नेताओं के भाषण और वादे सुनने के लिए कोई मूड है।
कोई नहीं चाहता चुनाव
कमोबेश यही राय भाजपा के भी कई विधायकों की थी। हालांकि उनमें से कोई भी अपना नाम देना तो नहीं चाहता। प्रीत विहार से विधायक ओ.पी. शर्मा ने कहा कि यह अफसोस की बात है कि फिर से चुनाव होंगे दिल्ली में। अगर यह हालात ना बनते तो बेहतर रहता। शर्मा, केन्द्रीय रक्षा मंत्री अरुण जेटली के बेहद करीबी माने जाते हैं। भाजपा के कुछ और नेता भी प्रदेश नेतृत्व से नाराज बताए जाते हैं क्यों कि वह सरकार बना पाने में नाकामयब रहा।
उधर, कांग्रेस के आठ विधायक तो बार-बार फिर से दिल्ली पर चुनाव थोपने का विरोध सकर रहे थे. सीलमपुर से विधायक मतीन अहमद ने तो बार-बार कहा कि दिल्ली में फिर से चुनाव नहीं होने चाहिए। हालांकि कुछ जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के विधायक तो हार के डर से चुनाव मैदान से बच रहे हैं। उन्हें मोदी सुनामी का खतरा सता रहा है। इस बीच, आम आदमी पार्टी के ज्यादातर नेता भी फिर से चुनाव के अखाड़े में जाने से बच रहे थे। हालांकि उनके शिखर नेता अरविंद केजरीवाल चुनाव की मांग कर रहे थे।












Click it and Unblock the Notifications