समलैंगिक विवाह मामला: कानून मंत्री ने बताया आखिर सरकार क्यों कर रही याचिका का विरोध
समलैंगिक विवाह का मामला कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया सरकार क्यों कर विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि यह नीतिगत मामला है, जो गंभीर चर्चा के योग्य है।

Same Sex Marriage Matter: सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से जुड़ी याचिकाओं को संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट 16 अप्रैल को इस मामले पर सुनवाई करेगा। सोमवार को हुई सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग वाली याचिका का विरोध किया है।
इधर, समलैंगिक विवाह मामले पर कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार किसी भी तरह से किसी के व्यक्तिगत जीवन में दखलंदाजी नहीं कर रही। इसको लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आजादी और गतिविधियों पर सरकार ने कभी सवाल, बाधा, या नियंत्रण नहीं किया है। केंद्र व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नागरिकों की पसंद के खिलाफ नहीं था, लेकिन यह मामला विवाह की संस्था से जुड़ा है इसलिए यह एक नीतिगत मामला जो गंभीर चर्चा के योग्य है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया था कि भारत में परिवार का मतलब महिला और पुरुष के संबंध और उनसे पैदा हुई संतानों से है। केंद्र की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने कहा कि प्यार, अभिव्यक्ति और पसंद की स्वतंत्रता का अधिकार पहले से ही बरकरार है और कोई भी उस अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है, लेकिन इसका मतलब शादी के अधिकार को प्रदान करना नहीं है।
तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि जिस क्षण एक मान्यता प्राप्त संस्था के रूप में समान लिंग के बीच विवाह होता है, वैसे ही गोद लेने पर सवाल उठेंगे। इसलिए संसद को बच्चे के मनोविज्ञान के मुद्दे को देखना होगा, इसे जांचना होगा कि क्या इसे इस तरह से उठाया जा सकता है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समलैंगिक या समलैंगिक जोड़े के गोद लिए बच्चे का समलैंगिक या समलैंगिक होना जरूरी नहीं है।












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