'अयोध्या में भव्य राम मंदिर के लिए केंद्र सरकार बना चुकी है कानून, आचार संहिता की वजह से नहीं हो रहा ऐलान'

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर आरएसएस के दिग्गज नेता ने बड़ा बयान दिया है। आरएसएस के नेता इंद्रेश कुमार ने कहा है कि केंद्र सरकार मंदिर निर्माण के लिए कानून तैयार कर चुकी है, लेकिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की वजह से आचार संहिता लागू है, जिसकी वजह से सरकार इसका ऐलान नहीं कर रही है। आचार संहिता लागू होने की वजह से सरकार चुप है। जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को टाल दिया है उपर नाराजगी जाहिर करते हुए इंद्रेश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर हमला बोला है।

सीजेआई पर तीखा हमला

सीजेआई पर तीखा हमला

इंद्रेश कुमार ने कहा कि हो सकता है आदेश लाने के खिलाफ कोई सरफिरा सुप्रीम कोर्ट जाएगा तो आज का चीफ जस्टिस उसे स्टे भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि मैंने इस मामले की सुनवाई कर रहे तीन जजों की बेंच का नाम नहीं लेना चाहता हूं क्योंकि 125 करोड़ देशवासी इन तीनों जजों क नाम जानते हैं, इन लोगों ने इस मामले में देरी की है, इसे नजरअंदाज किया है और इस मामले का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि क्या देश इतना अपाहिज है कि दो-तीन जज देश में लोकतंत्र, संविधान और मौलिक अधिकार का गला घोंट देंगे।

कुछ लोग कर रहे हैं अपमान

कुछ लोग कर रहे हैं अपमान

पंजाब विश्वविद्यालय में जोशी फाउंडेशन द्वारा आयोजित जन्मभूमि में अन्याय क्यूं नाम के सेमिनार में बोलते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि क्या आप और हम असहाय होकर दर्शक बने रहेंगे, आखिर क्यों और किसलिए। जो आतंकवाद को अर्ध रात्रि में सुन सकते हैं, वो शांति को अपममान और उपहास कर दें। उन्होंने कहा कि क्या क्या गंभीर मामला नहीं है, हमने वह काला दिन भी न्यायिक इतिहास मे देखा है जब लोगों के विश्वास का अपमान किया गया और उन्हे न्याय देने में देरी की गई। यह जजों ने नहीं किया, न्यायिक व्यवस्था ने नहीं किया, यह कुछ व्यक्तियों ने किया है।

जज सोच लें रहना है या इस्तीफा देना है

जज सोच लें रहना है या इस्तीफा देना है

इंद्रेश कुमार ने दावा किया कि दो-तीन जजों के खिलाफ लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है, हर कोई न्याय के लिए बाट जोह रहा है, उन्हें अभी भी भरोसा है, लेकिन न्याय पालिका, जज और जस्टिस का दो-तीन जजों की वजह से अपमान हो रहा है, इस मामले को जल्दी सुनना चाहिए था। आखिर इसमे क्या दिक्कत है। अगर ये जज जल्दी न्याय देने के लिए तैयार नहीं है तो उन्हें सोचना चाहिए कि क्या वह जज बने रहना चाहते हैं या फिर इस्तीफा दे देना चाहते हैं।

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