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मरने से पहले अबु दुजाना ने कहा था- 'मुबारक हो, आपने मुझे पकड़ लिया... लेकिन मैं सरेंडर नहीं करूंगा'

श्रीनगर। मंगलवार को पलवामा नें सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के कश्मीर कमांडर अबु दुजाना को मार गिराया था, अबु के ऊपर लाखों का इनाम था और वो पिछले 7 सालों से घाटी में सक्रिय था और वहां के लोगों के लिए आतंक का पर्याय बन चुका था। पांच बार से सेना को जवानों को चकमा देकर भाग निकलने वाला अबु बुधवार को ऐसा नहीं कर पाया और गोलियों का शिकार हो गया।

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    Abu Dujana died in Encounter, Know Inside Story । वनइंडिया हिंदी
    आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया था

    आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया था

    आपको जानकर हैरत होगी कि मुठभेड़ से पहले अबु दुजाना ने सेना के अधिकारियों को आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया था। उसने सेना के अधिकारियों को यह भी कहा कि वह अपने पीछे गिलगित-बल्टिस्तान में अपने माता-पिता को जिहाद के लिए छोड़कर जा रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक सेना ने अबु को पहले सरेंडर करने के लिए कहा था।

    सेना के अधिकारी ने की थी बात

    सेना के अधिकारी ने की थी बात

    सेना के अधिकारी ने एक कश्मीरी नागरिक की मदद से फोन पर अबु से बात की थी, उस बातचीत के कुछ अंश पेपर ने प्रकाशित किए हैं जिसके मुताबिक अबु ने बेहद ही शांतिपूर्वक सेना के अधिकारी से बात की थी। पहले कश्मीरी नागरिक ने फोन करके अबु से बातचीत शुरू की और उसके बाद उसने फोन अधिकारी को दे दिया।

    मुबारक हो आपने मुझे पकड़ लिया...

    मुबारक हो आपने मुझे पकड़ लिया...

    दुजाना ने अधिकारी से पूछा, 'क्या हाल है? मैंने कहा, क्या हाल है?' इसके बाद आर्मी ऑफिसर ने दुजाना से कहा कि हमारा हाल छोड़ दुजाना, तू सरेंडर क्यों नहीं कर देता। तेरी इस लड़की से शादी हुई है और तू जो इसके साथ कर रहा है वह ठीक नहीं है। जिस पर दुजाना ने कहा कि मुबारक हो आपने मुझे पकड़ लिया... लेकिन मैं सरेंडर नहीं करूंगा।

    'मैं क्या करूं, जिसको गेम खेलना है खेले'

    'मैं क्या करूं, जिसको गेम खेलना है खेले'

    इस टेप में आर्मी ऑफिसर को दुजाना से यह भी कहते सुना जा सकता है कि उसे पाकिस्तानी एजेंसियां इस्तेमाल कर रही हैं, जिस पर दुजाना ने कहा कि हम निकले थे शहीद होने, मैं क्या करूं, जिसको गेम खेलना है खेले, कभी हम आगे, मैं सरेंडर नहीं कर सकता। जो मेरी किस्मत में लिखा है वही होगा। अल्लाह वही करेगा, ठीक है।

    72 हूरें नहीं मिलेंगी...

    72 हूरें नहीं मिलेंगी...

    जिस पर अधिकारी ने कहा कि वो अपने मां-बाप के बारे में तो सोचे, जिस पर दुजाना ने कहा कि मेरे मां-बाप तो उसी दिन मर गए, जिस दिन मैं उनको छोड़ कर आया था। फिर सैन्य अफसर ने कहा भारतीय सेना पाकिस्तान से घुसपैठ करने वाले आतंकियों से खून-खराबा नहीं चाहती है। अल्लाह हर किसी के लिए है, इस पर दुजाना ने कहा कि अगर अल्लाह मेरे और तुम्हारे लिए एक जैसा है तो आओ, घर के भीतर मुझसे मुलाकात करो, उसने यह भी कहा कि उसे पूरा 'खेल' समझ में आ रहा है कि उसे पाकिस्तानी एजेंसियों ने मोहरा बनाया है। उसे ट्रेनिंग में यह भी भरोसा दिलाया गया था कि अगर उसने सरेंडर कर दिया तो उसे जन्नत में 72 हूरें नहीं मिलेंगी और अब शायद वो उन्हीं हूरों के बीच में होगा।

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