ग्लेशियर फटने से नहीं भूस्खलन ने मचाई उत्तराखंड के चमोली में तबाही, सैटेलाइट इमेज देखकर एक्सपर्ट की राय
ग्लेशियर फटने से नहीं भूस्खलन ने मचाई उत्तराखंड के चमोली तबाही, सैटेलाइट इमेज देखकर एक्सपर्ट की राय
Uttarakhand Glacier Burst Update News: उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ में रविवार (07 फरवरी) को धौली गंगा नदी में विकराल बाढ़ से तबाही आई। इस त्रासदी में अबतक 26 लोगों की मौत हो चुकी है और 171 लोग अब भी लापता हैं। अभीतक बाढ़ के कारणों की वजह ग्लेशियर का टूटना बताया जा रहा है। लेकिन सैटेलाइट इमेज देखकर एक्सपर्ट का कहना है कि ये बाढ़ ग्लेशियर के फटने से नहीं बल्कि भूस्खलन से आई है। उपग्रह इमेजरी का अध्ययन करने वाले अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिकों और ग्लेशियोलॉजिस्टों का कहना है कि उत्तराखंड के चमोली में बाढ़ आपदा का कारण एक भूस्खलन प्रतीत होता है ना कि ग्लेशियर का टूटना।

उत्तराखंड के चमोली में हुए हादसे के 48 घंटे होने वाले हैं लेकिन अभी भी 171 लोगों के फंसे हुए हैं। तपोवन में स्थित एनटीपीसी के पावर प्रोजेक्ट में रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है। इस आपदा की वजह से इलाके में पॉवर प्रोजेक्ट को भारी नुकसान पहुंचा है। 13 गांवों का संपंर्क टूट गया है।
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कैलगरी विश्वविद्यालय के डॉ. डैन शुगर ने आपदा के पहले और बाद की तस्वीरों का अध्ययन कर बताया है कि ये ग्लेशियर के फटने से नहीं बल्कि भूस्खलन से हुआ है...क्योंकि सैटेलाइट इमेज में भारी मात्रा में उस इलाके में धूल दिख रही है। डॉ. डैन शुगर भूवैज्ञानिक और ग्लेशियोलॉजिस्ट हैं। उन्होंने अनुमान लगाया है कि भूस्खलन की वजह से ही अलकनंदा और धौलीगंगा नदियों में बाढ़ आई।
उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटने के आकलन के लिए सरकार ने एक टीम गठित की है, जो इसके कारणों पर रिसर्च करेंगे। जीएसआई के महानिदेशक (डीजी) रंजीत रथ ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण की भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी क्योंकि ऐसी स्थिति पैदा करने वाले प्राकृतिक कारक हैं।












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