अयोध्या में मस्जिद के लिए सरकार ने चुनीं ये 5 जगहें, मंदिर स्थल से हैं 15 किलोमीटर दूर

लखनऊ। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मस्जिद बनाने के लिए जमीन की पहचान कर ली गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि मस्जिद निर्णाण के लिए अयोध्या की किसी अहम जगह पर जमीन का आवंटन किया जाए। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्रशासन ने पांच जमीनों की पहचान मस्जिद के लिए की है। मिर्जापुर, शमशुद्दीनपुर और चांदपुर में इन पांच प्लॉट्स की पहचान की गई है जिसे मस्जिद निर्माण के लिए दिया जा सकता है। यह सभी स्थल पंचकोसी परिक्रमा स्थल से बाहर हैं। जानकारी के अनुसार मंदिर निर्माण स्थल से यह जगहें तकरीबन 15 किलोमीटर दूर हैं।

ट्रस्ट के गठन के बाद दी जा सकती है जमीन

ट्रस्ट के गठन के बाद दी जा सकती है जमीन

जानकारी के अनुसार सरकार इन प्लॉट्स को सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने के लिए प्रस्तावित कर सकती है। मंदिर निर्माण के लिए बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के गठन के बाद इन जमीनों का प्रस्ताव वक्फ बोर्ड को दिया जा सकता है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अपने फैसले में कहा था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन मस्जिद निर्माण के लिए दी जाए। यह जमीन अयोध्या के भीतर किसी अहम स्थल पर होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि तीन महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन किया जाए।

कोर्ट का फैसला समझ से परे

कोर्ट का फैसला समझ से परे

गौरतलब है कि देश में मुस्लिमों के प्रमुख संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा था कि अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला कानून के कई जानकारों की समझ से बाहर है। संगठन के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा था कि फैसले में एक तरफ कहा जा रहा है कि मस्जिद, मंदिर तोड़कर नहीं बनाई गई। ये भी कहा गया कि मूर्ति रखने वाले अपराधी हैं और मस्जिद तोड़ने वाले भी अपराधी हैं, लेकिन अब उन्हीं लोगों को बाबरी मस्जिद वाली जमीन दे दी जाती है। हमें ये फैसला समझ नहीं आ रहा कि यह कैसे आया।'

आसमान को छूने वाला मंदिर बनेगा

आसमान को छूने वाला मंदिर बनेगा

मदनी ने कहा था कि ‘फैसले के बाद मुस्लिमों को जो 5 एकड़ जमीन मिलनी है, उसे सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को नहीं लेना चाहिए। हमारा ये मानना है। हम फैसले का सम्मान भी करते हैं। लेकिन इस फैसले को कई जानकार समझ नहीं पा रहे हैं।' उन्होंने कहा था, ‘‘यह निर्णय हमारी अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, परन्तु हम इसे मानते हैं क्योंकि उच्चतम न्यायालय सर्वोच्च संस्था है।' बता दें कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर कांग्रेस केस नहीं चलने देती थी। शाह ने कहा कि अभी न्यायालय ने सर्वानुमति से ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है, अब राम जन्मभूमि पर आसमान छूने वाला मंदिर बनेगा।

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