गुजरात चुनाव में कांग्रेस के लिए प्रचार करना चाहते हैं लालू, क्या कांग्रेस पूरी करेगी उनकी इच्छा?
गुजरात चुनाव में आरजेडी सुप्रीमो कांग्रेस को वोट दिला पाएंगे या नहीं ये कहना तो मुश्किल है लेकिन लालू यादव अपनी कला से भीड़ तो जुटा ही सकते हैं।
नई दिल्ली। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव गुजरात चुनावों में अपना दम दिखाने को बेताब है लेकिन इसके लिए उनको कांग्रेस की हामी का इंतजार है। दरअसल लालू यादव गुजरात में कांग्रेस के पक्ष में चुनाव प्रचार करना चाहते हैं अपनी मंशा उन्होंने जाहिर कर दी है। अब कांग्रेस को तय करना है कि वो लालू यादव से गुजरात में चुनाव प्रचार करवाना चाहती है या नहीं। सोमवार को पटना में लालृ यादव ने कहा कि वह बीजेपी को हराने के लिए गुजरात में भी चुनाव प्रचार कर सकते हैं। बशर्ते की कांग्रेस पार्टी इसके लिए उन्हें आमंत्रित करे।

गुजरात चुनाव में आरजेडी सुप्रीमो कांग्रेस को वोट दिला पाएंगे या नहीं ये कहना तो मुश्किल है लेकिन लालू यादव अपनी कला से भीड़ तो जुटा ही सकते हैं। अब ये देखना है कि कांग्रेस अपने अहम सहयोगी की इच्छा को उतनी ही गंभीरता से लेती है या नहीं। आरजेडी सुप्रीमो ने कहा है कि वो बीजेपी को हराने के लिए हर जगह प्रचार करना चाहते हैं। हालांकि गुजरात की राजनीति में लालृ यादव की कोई पकड़ नहीं है। वहीं आरजेडी ने गुजरात चुनाव में बीजेपी और जेडीयू के अलग होने पर कहा है कि गुजरात ही क्यों, बिहार में भी बीजेपी और जेडीयू अलगअलग चुनाव लड़ेंगे। दोनों की राह कुछ ही दिनों में अलग हो जाएगी। दोनों का गठबंधन स्थाई नहीं है।
वहीं खबर है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दलित नेता जिग्नेश मेवाणी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात नहीं करेंगे। इससे पहले आज सुबह ही खबर आई थी कि जिग्नेश, राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे। दावा किया गया था कि उनके साथ अशोक गहलोत भी होंगे। हालांकि खुद जिग्नेश ने इन खबरों का खंडन किया। जिग्नेश ने कहा कि उन्हें अगर राहुल से मिलना होगा तो वो खुल कर मिलेंगे। इसी मसले पर अशोक गहलोत ने कहा कि जिग्नेश सही कह रहे हैं, जब तक पार्टी अपना पक्ष स्पष्ट ना करे तब तक कैसे कोई मुलाकात कर ले? बता दें कि जिग्नेश मेवाणी को ऊना आंदोलन के दौरान पहचान मिली जह उन्होंने दलित समुदाय के लोगों को गाय न छुने की कसम दिलवाई। ऊना में कथित गौ रक्षकों द्वारा चार दलित सुमदाय के युवकों की पिटाई के बाद जिग्नेश ने पूरे गुजरात में पदयात्रा कर दलितों को एकजुट करने का काम किया था। इस पदयात्रा ने जिग्नेश को गुजरात में दलित नेता के तौर पर स्थापित कर दिया।












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