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राजनीतिक फ़ायदे के लिए ‘तेज' बन रहे हैं लालू : बीजेपी को भी कीचड़ उछलने से ही कमल खिलने की उम्मीद

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नई दिल्ली। गुजरात में चुनाव हो और बिहार में उबाल न आए, ऐसा बिरले ही होता है। जब आडवाणी की रथ यात्रा सोमनाथ से चली थी तब उसे बिहार के समस्तीपुर में रोकने के बाद लालू प्रसाद ने देश में हंगामा बरपा दिया था। आज भी उस 'उपलब्धि' का बखान करते नहीं थकते हैं लालू। उनकी ही बात मानें तो वे चुनाव प्रचार के लिए गुजरात जाने ही वाले थे, लेकिन 'मोदी सरकार डर गयी' और उनकी जेड श्रेणी की सुरक्षा कमतर कर दी गयी। अब जान को दांव पर लगाने के बाद ही वे गुजरात चुनाव प्रचार करने जा सकते हैं। बस इसी बात पर यादव परिवार उबल पड़ा और वो सब कह डाला जो नहीं कहना चाहिए था।

लालू को है गुजरात में हमले की आशंका

लालू को है गुजरात में हमले की आशंका

लालू प्रसाद यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए अपने बेटे तेज प्रताप के बयान पर कहा है कि वो इसे एप्रूव नहीं करते, लेकिन वह छोटा बच्चा है और ‘अपने पिता की हत्या की साजिश' से गुस्से में आकर ऐसा बोल गया है। उसे समझा दिया गया है कि वो आगे से ऐसा नहीं बोलें। लालू खुलकर कह रहे हैं कि उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है। उन पर हमले हो सकते हैं। उन्होंने आशंका जतायी है कि गुजरात में भी उन पर हमला कराने की तैयारी है। इसी मकसद से उनकी सुरक्षा कम की गयी है। इसलिए अगर उन्हें कुछ होता है तो इसके लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री और नीतीश कुमार ज़िम्मेदार होंगे।

बेटे के गुस्से को जायज बताते हैं लालू

बेटे के गुस्से को जायज बताते हैं लालू

एक तरह से लालू प्रसाद अपने बेटे के गुस्से को जायज ठहरा रहे हैं लेकिन उनके शब्द को समर्थन नहीं दे रहे हैं। वहीं अपनी सुरक्षा घटाने को अपनी हत्या की साजिश और गुजरात चुनाव से जोड़कर वे इसे राजनीतिक मुद्दा भी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लालू की राजनीति बीजेपी विरोध की रही है और वह उसी लीक पर चल रहे हैं। लेकिन जिस तरीके से तेज प्रताप ने सुशील मोदी के घर शादी में हंगामा करने की धमकी दी थी और मेहमानों को भी बुरे अंजाम के लिए चेताया था, उसके तुरंत बाद अब वह प्रधानमंत्री व बिहार के मुख्यमंत्री को धमका रहे है तो यह ‘बच्चे का बयान' कहकर भुलाने योग्य बात कतई नहीं है। आखिर यही बच्चा कुछ दिन पहले तक बिहार के स्वास्थ्य का जिम्मा सम्भाल रहा था।

हर बार लालू ने तेज को ‘शह' दिया

हर बार लालू ने तेज को ‘शह' दिया

सवाल ये भी है कि जब तेज प्रताप ने मोदी के घर शादी में हंगामा वाले बयान दिया था तो लालू ने सुशील मोदी को भरोसा दिया था कि तेज ऐसा कुछ भी नहीं करेगा, आप निश्चिंत रहें। इसके अगले ही दिन लालू कह बैठे कि तेज ने सिर्फ फुफकारा था, तो सुशील मोदी की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी। लालू प्रसाद के इस बयान से कहीं न कहीं तेज प्रताप को शह मिली होगी, इसलिए उन्होंने पीएम और सीएम को ‘खाल उधेड़वा देने' जैसी धमकी दे डाली। लालू अब भी उसी लीक पर हैं। वे तेज के बयान को बच्चे का बयान बता रहे हैं, वहीं इसे पिता की हत्या की साजिश से बेटे की प्रतिक्रिया भी बता रहे हैं। यानी एक बार फिर शह दिया जा रहा है। ऐसा करके लालू प्रसाद अपने बेटे को ही निरंकुश बना रहे हैं जिससे आखिरकार उन्हें कभी फ़ायदा नहीं होगा।

लालू अकेले निन्दा के पात्र नहीं, सुशील मोदी भी हैं ‘गुनहगार'

लालू अकेले निन्दा के पात्र नहीं, सुशील मोदी भी हैं ‘गुनहगार'

बिहार की राजनीति में अकेले लालू ऐसी निन्दा के पात्र नहीं हैं। बीजेपी नेता और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सुरक्षा हटाए जाने के बाद लालू के जीवन पर ख़तरे संबंधी आशंका पर जो बयान दिया है वह कम चिन्तनीय और निन्दनीय नहीं है। उन्होंने कहा है कि किसी के जीवन की सुरक्षा की गारंटी कोई नहीं दे सकता। ऐसा वे डिप्टी सीएम होकर कह रहे हैं। प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की भी हत्या हो गयी थी, तो बाकी की गारंटी कैसे दी जा सकती है। सुशील मोदी का यह भाव गैरजिम्मेदाराना है और तेज प्रताप के निन्दनीय बयान से तुलना करें तो और ज्यादा गैर जिम्मेदार व निन्दनीय है।

विरोधियों पर जारी हैं ‘हमले'

विरोधियों पर जारी हैं ‘हमले'

ऐसा लगता है कि कांग्रेस को गुजरात चुनाव में जिस किसी से मदद मिल सकती है उस पर निशाना साधने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। चाहे हार्दिक पटेल की सीडी हो या फिर लालू की सुरक्षा कम करने का फैसला लेकर एक संदेश देने का काम- ये मात्र घटनाएं नहीं हैं, राजनीति का चरित्र बताती हैं। अन्त में कहा जा सकता है कि तेज प्रताप तो लालू के नक्शे कदम पर चलते नहीं दिखाई पड़ते, लेकिन लालू जरूर ‘तेज' बनते दिख रहे हैं। मोदी के ख़िलाफ़ लालू का ‘तेज' बनने की कोशिश विशुद्ध राजनीतिक फ़ायदे के लिए है। लेकिन बीजेपी की रणनीति ऐसी राजनीति को बढ़ावा देने की है ताकि जितने अधिक कीचड़ फेंके जाएंगे, कमल उतना ही खिलेगा। शायद यही वजह है कि खुद सुशील मोदी भी इस ‘कीचड़बाजी' में शामिल हैं।

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