न्याय की आस में चारा घोटाले के दो अन्य मामले में लालू हुए कोर्ट में पेश

रांची। सोमवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव सीबीआई अदालत में चारा घोटाले के दो अन्य मुकदमे में बतौर गवाह हाजिर हुए। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ए. के. राय के समक्ष पेश होने से पहले लालू ने दुमका कोषागार से फर्जी तरीके से निकाले गए 3.97 करोड़ रुपये और देवघर कोषागार से 97 लाख रुपये निकाले जाने के मामलों में अपना बयान दर्ज करवाया।

गवाही देने के बाद लालू ने पत्रकारों को बताया, "मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। सीबीआई द्वारा पूछे गए सभी सवालों का मैंने जवाब दे दिया।"

गौरतलब है कि चारा घोटाला मामले के एक आरोप में लालू प्रसागद यादव को पहले ही सजा सुनाया जा चुके है। उन्हें इस आरोप में 5 साल की जेल और 25 लाख रु. का जुर्माने की सजा दी गई है। फिलहाल वो जमानत पर रिहा किए गए हैं।

इससे पहले लालू के लिए एक राहत भरी खबर थी क्योंकि केंद्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक रंजीत सिन्हा ने चारा घोटाले के संबंध में तीन मामलों में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोपों को हटाए जाने की वकालत की थी। लालू यादव के खिलाफ आरोपों को हटाए जाने की सिफारिश करते हुए सिन्हा ने न केवल अभियोजन निदेशक से बल्कि पटना जोन के प्रमुख समेत पटना शाखा के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी असहमति जतायी थी।

सिन्हा का तर्क था कि इस मामले में लालू दोषी हराए जा चुके है इसलिए सिन्हा की ‘विशेष' अपील पर सॉलिसिटर जनरल को भेज दिया गयी है लेकिन इसका जवाब अभी तक आया नहीं है।

लालू का पक्ष लेते हुए रंजीत सिन्हा ने कहा था कि किसी व्यक्ति पर उसी अपराध के लिए किसी अन्य मामले में फिर से मुकदमा नहीं चलाया जा सकता जिसके लिए उसे पहले ही दोषी ठहराया जा चुका हो जबकि सबूत एक समान हैं।

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