लालू यादव को सजा यानी राजनीति की स्पेशल ब्रांडिंग खत्म

पॉलिटिकल कमेंट्रेटर शशि शेखर ने इस स्टोरी को एक अलग ऐंगल देते हुए कहा कि इस फैसले के बाद लालू का करियर खत्म हो जायेगा यह तो छोटी बात है, इससे बड़ी बात तो यह है कि स्पेशल ब्रांडिंग जैसी चीज अब सामने नहीं आयेगी। नीती सेंट्रल के रेडियो प्रोग्राम में बोलते हुए शशि शेखर ने कहा कि बिहार के पूर्व सीएम और पूर्व रेलमंत्री लालू यादव हों या फिर सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव। ये नेता कांग्रेस के खंडहरों से उभर कर सामने आये हैं। यानी जहां कांग्रेस की परफॉर्मेंस सबसे खराब रही, वहीं पर इन नेताओं ने झंडे गाड़ दिये।
शशि शेखर ने आगे कहा कि ये वो नेता हैं, जिन्होंने हिन्दी भाषी क्षेत्रों में पिछड़ी जातियों को सहारा दिया। वो भी उस समय जब कांग्रेस का उस जगह पर पतन हो रहा था। इन लोगों ने मंडल और हिन्दुत्व की राजनीति बहुत अच्छी तरह की और सामाजिक सशक्तिकरण में बेहतरीन भूमिका अदा की। उनके एजेंडे पर विकास और मूल्य नहीं होते हैं। पुरानी स्टाइल की राजनीति के सहारे राज्य पर कब्जा करना ही इनकी खासियत रही। हालांकि बिहार में नीतीश कुमार ने भी कुछ हद तक उसी राह पर चलकर मुस्लिम समेत कई पिछड़ों को टार्गेट किया है।
शशि शेखर ने कहा कि लालू की राजनीति असल में वीपी सिंह की राजनीति का एक्स्टेंशन है। लालू को दोषी करार दिये जाने से इस स्टाइल की राजनीति अब समाप्ति की कगार पर पहुंच गई है। नई जैनरेशन अब नये प्रकार के नेताओं की ओर देख रही है, जैसे नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान की वसुंधरा राजे सिंधिया, ओडिशा के नवीन पटनायक, आदि।
अगर बिहार के राजनीतिक समीकरण की बात करें तो लालू और नीतीश की जंग में सामाजिक तौर पर भी सब कुछ बदल चुका है। ऐसे में अगर फायदा पहुंच सकता है, तो वो है भाजपा। और भाजपा बिहार में हुंकार भरने के लिये 27 अक्टूबर को रैली करने जा रही है, जिसकी अगुवाई नरेंद्र मोदी करेंगे।












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