पूर्वी लद्दाख में चरवाहों के लिए बेहतर हुए हालात, लेकिन क्यों गलवान की कसक अभी बाकी है?
India-China border news: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने पिछले एक साल में पूर्वी लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थानीय चरवाहों को मवेशी चराने की अनुमति दे दी है।
2020 के जून में गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ भारतीय जवानों की हुई हिंसक झड़पों के बाद से यह गतिविधियां बहुत ही सीमित कर दी गई थीं। अब ईटी की एक रिपोर्ट से पता चला है कि चराई की गतिविधियों को विस्तार दिया गया है।

पूर्वी लद्दाख में पशुओं की चराई वाले क्षेत्र का दायरा बढ़ा
इस फैसले से वाकिफ एक अधिकारी ने बताया है कि आईटीबीपी अपने बॉर्डर मैनेजमेंट चार्टर के आधार पर चरवाहों, उनकी झोपड़ियों और उनके पशुओं की देखभाल करती है।
2023 तक चुशूल में चराई का काम रेजांगला, चांगा ला, टी सागा, काजुकोनला और परमा तक ही सीमित था। लेकिन, इस साल गोस्वामी हिल, गुरुंग हिल, यूनलुंग, लुनाग, लुंगपा, नांगचलांग और याकगंग आदि इलाकों तक चरवाहों को अपने मवेशी ले जाने की इजाजत दी गई है।
पूर्वी लद्दाख में मवेशियों की संख्या में भी हो रही है बढ़ोतरी
आईटीबीपी का कहना है कि इलाके में मवेशियों की संख्या भी बढ़ गई है और इस साल 35,000 से ज्यादा मवेशी पाए गए हैं। लेकिन, इतने सारे बदलावों के बावजूद चरवाहों के मन की कसक अभी दूर नहीं हुई है।
गलवान की झड़प से पहले वाली स्थिति चाहते हैं चरवाहे
पूर्वी लद्दाख के चरवाहे मांग कर रहे हैं कि उन अन्य सीमावर्ती इलाकों से भी चराई पर लगी रोक हटा दी जाए, जो गलवान की घटना से पहले चराई के लिए उपलब्ध होते थे।
मसलन, डुंगती के पास अपने 850 मवेशियों को चराने वाले लोबसांग ताशी ने बताया, 'भारतीय सेना हमें आगे के क्षेत्रों में जाने की इजाजत नहीं देती। पहले हम बिल्कुल आगे तक चराई किया करते थे। वे हमें अपनी ही जमीन तक जाने से क्यों रोक रहे है? हमें एलएसी के नजदीक डेमचोक गांव तक जाने की इजाजत नहीं है।'
मवेशियों के चीन के कब्जे वाले क्षेत्र में घुसने की रहती है आशंका
एक सुरक्षाकर्मी ने कहा, 'भारत-चीन सीमा पर अरेखांकित सीमा की वजह से गांव वालों को तब दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जब उन्हें अपने मवेशियों को चराने के हक से वंचित कर दिया जाता है।' असल में कई बार ये पशु चरते-चरते चीन के क्षेत्र के अंदर चले जाते हैं और दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच यह विवाद का कारण बन जाता है।
लद्दाख में 38,000 वर्ग किलोमीटर इलाका है चीन के अबैध कब्जे में
भारत के मुताबिक चीन ने लद्दाख में 38,000 वर्ग किलोमीटर और अरुणाचल प्रदेश में 90,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। इसी की वजह से यह सीमा अभी तक निर्धारित नहीं हो पाई है और इसी का फायदा उठाकर अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम से लेकर लद्दाख तक में चीन ने कई बार इसके उल्लंघन की कोशिश की है, जो हिंसक झड़पों का कारण बनता रहा है।
गलवान जैसी जुर्रत करने की चक्कर में रहता है चीन
जून 2020 में गलवान घाटी में भी यही हुआ था, जिसमें भारतीय जवान भी शहीद हुए थे, लेकिन चीन के सैनिकों को भी बड़ी संख्या में जान गंवानी पड़ गई थी। 2021 के अगस्त में उत्तराखंड के बाराहोती में 100 से ज्यादा पीएलए के जवान सीमा का उल्लंघन करके आ गए थे, जिससे एक पुल समेत कुछ ढांचे को नुकसान पहुंचा था।
2022 के दिसंबर में चीनी सेना के जवान अरुणाचल प्रदेश के तवांग के पास भी ऐसी ही जुर्रत करने की कोशिश की थी, जिसे भारतीय जवानों ने सख्ती से लौटने को मजबूर कर दिया था।
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