मणिपुर से पुडुचेरी की तरह केंद्र शासित प्रदेश बनाने की किसने उठाई मांग
मणिपुर के कुकी-जो समुदाय के प्रतिनिधियों ने राज्य में चल रहे संकट को 'पूर्व नियोजित' और 'राज्य प्रायोजित' बताया है। वे अब इस संकटग्रस्त राज्य से अलग विधानसभा वाला एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग कर रहे हैं।
यह मांग कुकी छात्र संगठन (केएसओ) दिल्ली और एनसीआर की ओर से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई।

केएसओ ने दावा किया कि, 'मणिपुर क्षेत्र में जारी संकट कुकी-जो समुदाय को निशाना बनाकर खत्म करने का एक पूर्व-नियोजित राज्य-प्रायोजित प्रयास है.... और इसके कारण 41,000 से अधिक लोगों का विस्थापन हुआ है, 200 से अधिक कुकी-जो गांव नष्ट हो गए हैं, और 191 लोगों की जान चली गई है, जिनमें महिलाओं के साथ क्रूर बलात्कार और हत्या के अलावा बच्चों सहित कुकी-जो पीड़ितों को जलाकर मार डालने और उनके शरीर को विकृत करने के मामले शामिल हैं।'
प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी मांगें मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की मांग से आगे बढ़ गई है। अब वे पुडुचेरी की तरह विधानसभा वाला एक केंद्र शासित प्रदेश चाहते हैं, जो जातीय संघर्ष को समाप्त करने का एकमात्र समाधान है। उन्होंने कहा, 'न्याय और हमारे लोकतांत्रिक संस्थानों की अखंडता के हित में कुकी-जो लोगों के लिए राजनीतिक समाधान में तेजी लाने के लिए भारत सरकार से हमारी यह गंभीर अपील है।'
इस दौरान अंबेडकर विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर माइकल हाओकिप ने इस दावे का खंडन किया कि कुकी-जो लोग अप्रवासी हैं। उन्होंने कहा, 'हम अप्रवासी नहीं हैं। हमारा उल्लेख बौद्ध और संस्कृत साहित्य में भी किया गया है।'
इनकी ओर से इस बात पर भी ध्यान दिलाया गया कि अतिक्रमण हटाने के दावों के तहत पहाड़ी इलाकों में बस्तियों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया, 'कुकी बस्तियों को नष्ट किया जा रहा है, जिसे अवैध अतिक्रमण कहा जा रहा है, जबकि वे वर्षों से वहां रह रहे हैं। शरणार्थी, अवैध अप्रवासी और नार्को-आतंकवादी जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कुकी-जो लोगों के खिलाफ किया जा रहा है।ट
3 मई, 2023 को मेइती समुदाय की ओर से अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में आदिवासी एकजुटता मार्च के बाद मणिपुर में संकट बढ़ गया। तब से हिंसा के कारण दोनों समुदायों और सुरक्षाकर्मियों में से कुल 220 से अधिक मौतें हुई हैं।
उधर मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से जुड़ी एक कथित ऑडियो क्लिप ने आग में घी डालने का काम किया है। राज्य सरकार ने इसे 'छेड़छाड़' बताकर खारिज कर दिया, लेकिन प्रतिनिधियों का दावा है कि यह संकट को स्पष्ट करने वाले अकाट्य सबूत प्रदान करता है। उन्होंने कहा, 'एन. बीरेन सिंह का लीक हुआ ऑडियो अकाट्य सबूत है जो मणिपुर संकट के पूरे पहलू को स्पष्ट करता है...'












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