सिंधिया को हराने वाले केपी यादव बोले, अब कोई किसी का गढ़ नहीं

नई दिल्ली। इस बार के लोकसभा चुनाव में कई चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। इस चुनाव में दो ऐसे नाम सामने आए जिनके हारने की शायद ही किसी ने उम्मीद की हो। पहला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जोकि भाजपा की उम्मीदवार स्मृति ईरानी के मुकाबले अमेठी में अपनी पारंपरिक सीट से चुनाव हार गए। वहीं दूसरे बड़े नाम की बात करें तो कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं, जोकि अपनी पारंपरिक सीट गुना से भाजपा के उम्मीवादर केपी यादव से चुनाव हार गए। दिलचस्प बात यह है कि केपी यादव एक वर्ष पहले तक जोतिरादित्य सिंधिया के प्रतिनिधि थे। लेकिन इस बार उन्होंने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दाम लिया।

पहले हार गए थे विधानसभा चुनाव

पहले हार गए थे विधानसभा चुनाव

केपी यादव जब भाजपा में शामिल हुए तो वह विधानसभा का चुनाव हार गए, लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव में उन्होंने हर किसी को चौंकाते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया को मात दी है। उन्होंने सिंधिया को 1.25 लाख वोटों के अंतर से हराया है। गौर करने वाली बात यह है कि गुना सीट पर 14 बार से सिंधिया परिवार का ही उम्मीदवार जीतता आया है। अपनी जीत के बारे में केपी यादव बताते हैं कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद ही हमने मंथन शुरू कर दिया था कि किसी वजह से हम चुनाव हारे। अपनी कमियों पर हमने काम किया। विधानसभा चुनाव के नतीजों से साफ था कि हम गुना में 16000 वोटों से आगे थे, लिहाजा हम चुनाव जीतने को लेकर आश्वस्त थे।

अब तो शुद्ध प्रजातंत्र है

अब तो शुद्ध प्रजातंत्र है

केपी यादव कहते हैं कि अब परंपरागत सीट जैसी कोई चीज नहीं बची है। वह कहते हैं अब तो शुद्ध प्रजातंत्र है। सोशल मीडिया के माध्यम से गांव के एक कोने मे बैठे लोगों को भी यह पता चलता रहता है कि उनके क्षेत्र, देश और दुनिया में क्या हो रहा है। अपनी जीत की अहम वजह यादव ने प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी को बताया है। वह कहते हैं कि लोग यह चाहते थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से पीएम बने, लोगों को पता था कि कैसे उन्होने विकास किया है, देश का गौरव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है। मेरी जीत की बड़ी वजह मोदी लहर है।

सिंधिया का मार्गदर्शन लूंगा

सिंधिया का मार्गदर्शन लूंगा

केपी यादव कहते हैं कि मैं चाहता हूं कि लोग मुझे मेरे काम से याद रखें, जो भी हुआ वह अच्छा था। मैंने अपनी पहचान के लिए काफी मेहनत की थी। इसमे कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जीत के बाद मुझे बधाई दी थी, मैंने भी किसी के जरिए उनसे अपना धन्यवाद पहुंचा दिया है। मैं जल्द ही उनसे मिलूंगा और उनसे मार्गदर्शन लूंगा। वह यहां से चार बार सांसद रहे हैं, वह मुझसे काफी सीनियर हैं, उनके मार्गदर्शन का मैं पने काम में इस्तेमाल करूंगा।

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