पीएफआई क्‍या है, जानिए यूपी में इस पर प्रतिबंध लगाना क्यों हो गया है आवश्‍यक?

The PFI is being held responsible for the violence during the CAA protests in UP. The UP government is preparing to ban PFI. Know what PFI is, methodology, and why it is important to ban it in UP.पीएफआई क्‍या है और यूपी सरकार इस पर क्यों लगाना चाहती बैन

बेंगलुरु। उत्तर प्रदेश के कई शहरों में नागरिकता कानून के विरोध में पिछले दिनों जमकर हिंसा हुई। इस हिंसा और विरोध-प्रदर्शन में सरकारी संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपायी उपद्रियों से करवाने वाली यूपी सरकार एक और बड़ा निर्णय लेने जा रही हैं। योगी सरकार इस हिंसा के मुख्‍य साजिशकर्ता इस्‍लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर शिकंजा कसने जा रही है। कुछ ऐसे ही संकेत यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने दिए हैं। उन्‍होंने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के लिए पीएफआई को जिम्मेदार बताया है।

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    उन्होंने कहा कि जल्द ही सरकार इस संस्था पर प्रतिबंध लगाएगी। केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि "हिंसा के पीछे पीएफआई का हाथ था वो ही इस हिंसा की सूत्रधार है। उपमुख्‍यमंत्री का ये भी कहा कि यूपी में जगह जगह हुई हिंसा में वो ही लोग शामिल हैं जो बैन किये जाने के पहले सिमी में शामिल थे। सिमी के लोगों ने इस संगठन में शामिल होकर हिंसा फैलाई।

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    उन्‍होंने यह भी स्‍पष्‍ठ कर दिया है कि सिमी की तर्ज पर कोई भी संस्‍था उभरने की कोशिश की जाएगी तो सरकार उसे कुचल कर रख देगी। उन्‍होंने कहा कि सरकार की तरफ से इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इतना ही नहीं डिप्‍टी सीएम के इस ऐलान के बाद यूपी डीजीपी ओ पी सिंह ने पीएफआर्ठ पर प्रतिबंध लगाने के लिए गृह मंत्रालय को पत्र भी लिखा हैं। गृह मंत्रालय की मंजूरी मिलते ही पीएफआई पर बैन लग जाएगा।

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    बता दें यूपी में पिछले दिनों सीएए के विरोध में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान जमकर हिंसा हुई, हालात ये थे कि पुलिस को शांति कायम करने में काफी दुश्‍वारियों का सामना करना पड़ा। पुलिस की जांच में यह निकल कर आया कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की साजिश पॉप्‍युलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने रची। जो बात अब प्रदेश सरकार ने भी दोहरायी है। यूपी सरकार का मानना है कि पीएफआई पर शीघ्र प्रतिबंध नही लगाया गया तो यूपी में हालात और खराब हो जाएंगे। आइए जानते हैं यूपी के लिए खतरा बन चुकी पीएफआई संगठन क्या है और इसकी कार्यप्रणाली क्या है, और इससे यूपी सरकार को क्या खतरा दिख रहा जो इसे बैन करने की तैयारी कर रही हैं?

    क्या है पीएफआई

    क्या है पीएफआई

    पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई एक चरमपंथी इस्लामी संगठन है। यह अपने को पिछड़ों और अल्‍पसंख्‍यकों के अधिकार में आवाज उठाने वाला संगठन बताता हैं। साल 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) के मुख्य संगठन के रूप में पीएफआई का गठन किया गया था। इस संगठन की जड़े केरल के कालीकट में है और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।

    पीएफआई कई राज्यों में अपनी पैठ बना चुका है

    एनडीएफ के अलावा कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी , तमिलनाडु के मनिथा नीति पासराई , गोवा के सिटिजन्स फोरम , राजस्थान के कम्युनिटी सोशल एंड एजुकेशनल सोसाइटी , आंध्र प्रदेश के एसोसिएशन ऑफ सोशल जस्टिस समेत अन्य संगठनों के साथ मिलकर पीएफआई ने कई राज्यों में अपनी पैठ बना ली है। पीएफआई खुद को न्याय, आजादी और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले नव-समाज के आंदोलन के रूप में बताता है। इस संगठन की कई शाखाएं भी हैं। जिसमें महिलाओं के लिए- नेशनल वीमेंस फ्रंट और विद्यार्थियों के लिए कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया। गठन के बाद से ही इस संगठन पर कई समाज विरोधी व देश विरोधी गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं।

    23 राज्यों तक अपनी पकड़ बना चुका है ये संगठन

    23 राज्यों तक अपनी पकड़ बना चुका है ये संगठन

    मुस्लिम संगठन होने के कारण इस संगठन की ज्यादातर गतिविधियां मुस्लिमों से संबंधित होती है। पहले भी कई मौकों पर यह संगठन मुस्लिम आरक्षण के लिए सड़कों पर उतरा। यह संगठन 2006 में सुर्ख़ियों में तब आया जब दिल्ली के राम लीला मैदान में इस संगठन द्वारा नेशनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। इस कांन्‍फ्रेस में अत्‍यधिक संख्‍या में लोग सम्मिलित हुए थे। यह संगठन वर्तमान समय में 23 राज्यों तक अपनी पकड़ बना चुका है। यह संगठन खुद को न्‍याय, स्वतंत्रता और सुरक्षा का पैरोकार बताता है और मुस्लिमों के अलावा देश भर के दलितों, आदिवासियों पर होने वाले अत्याचार के लिए समय समय पर मोर्चा खड़ा करता है।

    पीएफआई का विवादों से है पुराना नाता

    पीएफआई का विवादों से है पुराना नाता

    पीएफआई का विवादों से पुराना नाता हैं। इसे स्‍टूडेंट्स इस्‍लामिक मूवमेट ऑफ इंडिया यानी सिमी की बी विंग कहा जाता है। आपको बता दें 1977 में संगठित की गयी सिमी को 2006 में प्रतिबंध लगा दिया गया था इसके बाद माना जाता है कि मुसलमानों, आदिवासियों और दलितों के अधिकार दिलाने के नाम पर इस संगठन का निर्माण किया गया। ऐसा इसलिए माना जाता है कि पीएफआई की कार्यप्रणाली सिमी जैसी ही थी। 2012 में भी इस संगठन को बैन करने की मांग उठ चुकी है। तब इस संगठन पर स्‍वतंत्रता दिवस पर आजादी मार्च किए जाने की शिकायत दर्ज हुई थी। जिसके बाद केरल सरकार ने इस संगठन का बचाव करते हुए केरल हाईकोर्ट को अजीब सी दलील दी थी कि यह सिमी से अलग हुए सदस्‍यों का संगठन है, जो कुछ मुद्दों पर सरकार का विरोध करता है। सरकार के दावों को कोर्ट ने खारिज करते हुए प्रतिबंध को बरकरार रखा था। इतना ही नहीं पूर्व में इस संगठन के पास से केरल पुलिस द्वारा हथियार, बम, सीडी और कई ऐसे दस्‍तावेज बरामद किए गए थे जिसमें यह संगठन अलकायदा और तालिबान का समर्थन करती नजर आयी थी।

    यूपी में पीएफआई को बैन करना क्यों हो गया है आवश्‍यक

    यूपी में पीएफआई को बैन करना क्यों हो गया है आवश्‍यक

    गौरतलब है कि इस संगठन के कार्यकर्ताओं का नाम लव जिहाद से लेकर दंगा भड़काने, शांति को प्रभावित करने तक में आ चुका है। माना जाता है कि संगठन एक आतंकवादी संगठन है जिसके तार कई अलग-अलग संगठनों से जुड़े हैं। साल 2012 में केरल सरकार ने उक्‍त एक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट से कहा था कि पीएफआई की गतिविधियां देश की सुरक्षा के लिए हानिकारक हैं। केंद्रीय एजेंसियों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से साझा किए गए ताजा खुफिया इनपुट और गृह मंत्रालय के मुताबिक, यूपी में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के दौरान शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, वाराणसी, आजमगढ़ और सीतापुर क्षेत्रों में पीएफआई सक्रिय रहा है।

    रिपोर्ट में ये हुआ है खुलासा

    रिपोर्ट में ये हुआ है खुलासा

    रिपोर्ट के अनुसार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट, मनिथा नीति पासराई, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और अन्य संगठनों के साथ मिलकर कई राज्यों में पहुंच हासिल कर ली है और वह पिछले दो साल से उत्तर प्रदेश में अपना पांव पसार चुकी है। इतना ही नहीं रिपोर्ट में ये भी खुलासा हुआ है कि तत्कालीन मायावती सरकार की ओर से शुरू किए गए सख्त उपायों ने पीएफआई सदस्यों को उत्तर प्रदेश छोड़ने के लिए मजबूर किया था, लेकिन पिछले दो साल में फिर से इस संगठन ने यूपी में अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले में 19 दिसंबर से पीएफआई के 14 सदस्यों सहित 28 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जो कथित रूप से सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को उकसाने का प्रयास कर रहे थे।

    राजनीतिक दल इसे भी बनाएंगे मुद्दा !

    राजनीतिक दल इसे भी बनाएंगे मुद्दा !

    इस रिपोर्ट के आधार पर इसमें कोई संदेश नही है पीएफआई एक ऐसी संस्‍था है जो कट्टरपंथ को बढ़ावा देती है। यूपी की सरकार ने जब इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने का मन बनाया है तो आने वाले दिनों में कांग्रेस समेत अन्‍य विपक्षी दल इसको मुद्दा बनाकर इसका विरोध करके जमकर राजनीति करेंगे। राजनीति के जानकारों का मानना है कि यूपी सरकार का पीएफआई पर बैन लगाने का मुद्दा उठाने के पीछे मकसद, सीएए और एनआरसी का विरोध कर विरोधियों पार्टियों ने जो नाक में दम मचा रखा है, उससे ध्‍यान भटकाना हैं।

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