नेहरू मेमोरियल में जानें ऐसा क्‍या है जिसका नाम बदलने पर भाजपा और कांग्रेस आई आमने-सामने?

नेहरू मेमोरियल में जानें ऐसा क्‍या है जो नाम बदलने पर भाजपा और कांग्रेस आई है आम

नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (Nehru Memorial Museum & Library- NMML) का नाम बदलकर अब 'प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय सोसाइटी' कर दिया गया है। जिसको लेकर भाजपा सरकार और कांग्रेस आमने-सामने आ चुकी है।

पीएम मोदी द्वारा नेहरू मेमोरियल का नाम बदलने के ऐलान किए जाने के बाद दोनों पार्टियों के बीच जमकर घमासान शुरू हो चुका है। आइए जानते हैं आखिर क्‍यों मोदी सरकार ने इसका नाम बदला और इस संग्रहालय में ऐसा क्‍या रखा है जिसका नाम बदलने पर कांग्रेस आग-बबूला हो रही है?

Prime Ministers Museum

कांग्रेस ने मेमोरियल का नाम बदलने पर बोली ये बात

नेहरू मेमोरियल का नाम बदलने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा "नेहरू स्‍मृति संग्रहालय एवं पुस्‍तकालय का नाम बदलने के बाद भी देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की विरासत हमेशा जिंदा रहेगी और वे आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करते रहेंगें। वहीं जयराम ने कहा कि नेहरू मेमोरियल का नाम बदलना भाजपा सरकार के ओछेपन और द्वेष को दिखाता हैं।"

भाजपा ने कांग्रेस को दिया करारा जवाब

वहीं भाजपा के पूर्व मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि "कांग्रेस सिर्फ नेहरू-गांधी परिवार को बढ़ावा देने के इर्द-गिर्द केंद्रित है। ये कांग्रेस नेताओं की ये आलोचना कुछ और नहीं दरबारियों का विलाप है। पीएम मोदी ने इस मेमोरियल का नाम बदलकर सुनिश्चित किया है कि सभी प्रधानमंत्रियों को सम्मानजनक स्थान दिया जाए।"

2016 से नाम बदलने की चल रही थी तैयारी

बता दें नई दिल्‍ली के तीन मूर्ति भवन में स्थित नेहरू मेमोरियल का नाम बदलने का निर्णय रातों-रात नहीं लिया गया। 2016 में इसके अंदर सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित एक संग्राहालय रखने का प्रस्‍ताव लाया गया था जिसके नेहरू मेमोरियल की कार्यकारी परिषद ने मंजूर कर लिया था।

2020 में प्रधानमंत्री संग्रहालय तैयार हो चुका था

वर्ष 2020 में यहां पर सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित संग्राहालय बनकर तैयार हो गया और 2022 में ये जनता दर्शन के लिए खोला गया। जिसके बाद इसकी कार्यकारी परिषद ने सोचा कि इसके नाम में वर्तमान मेमोरियल के स्‍वरूप की झलक दिखनी चाहिए जिसके बाद जून में नाम इसका बदलने का निर्णय लिया गया।

जानें क्‍या हैं इस नेहरू मेमोरियल में

  • दिल्‍ली के तीन मूर्ति भवन को 1929-30 में सर एडविन लुटियंस ने डिजाइन किया था। ये अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ का आधिकारिक आवास था।
  • देश की आजादी के बाद ये भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का ऑफिशियल आवास बन गया। उनके निधन के बाद 1964 में इसे संग्रहालय में बदल दिया गया और नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी की स्थापना की गई थी।
  • इस संग्रहालय और पुस्‍तकालय को स्‍थापित करने का उद्देश्‍य भारत की स्‍वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को संरक्षित करना था! इस मेमोरियल में स्‍वतंत्रता संग्राम और संविधान से जुड़ी चीजें हैं।
  • वहीं इस संग्रालय में पूर्व प्रधानमंत्रियों की विभिन्‍न चुनौतियों को टक्‍कर देकर कैसे देश को आगे बढ़ाया और देश क प्रगति सुनिश्चित की, ये सब कहानी यहां दर्ज है जो वर्तमान और आने वाली पीढ़ी के लिए एक सीख भी है।
  • इस मेमोरियल में महात्मा गांधी के लेखन के साथ ही स्वामी सहजानंद सरस्वती, सी. राजगोपालाचारी, बीसी रॉय, जयप्रकाश नारायण, चरण सिंह, सरोजिनी नायडू और राजकुमारी अमृत कौर के निजी पत्र मौजूद है।

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