जानिये आखिर कैसे 10 साल के शासन के बाद भी नीतीश बने रहे लोकप्रिय
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव में जिस तरह से नीतीश कुमार ने दस साल के शासन के बाद भी लोगों के बीच कभी अलोकप्रिय नहीं हुए उसकी चर्चा हर तरफ हो रहा है।
जिस तरह से महागठबंधन ने बिहार में भारी जीत दर्ज की है उसने सभी दलों के समीकरण को बिगाड़ कर रख दिया है। नीतीश शासन के प्रति लोगों का संतोषजनक जवाब ही नीतीश के सुशासन की पुष्टि करता है।
बतौर मुख्यमंत्री पद के दावेदार मैदान में उतरे
हालांकि इन सब के बीच अभी भी एक बात जो लोगों के बीच खटक रही है कि क्या नीतीश का लालू प्रसाद के साथ गठबंधन करने का फैसला सही था। लेकिन जिस तरह से नीतीश कुमार का बतौर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के साथ चुनाव मैदान में जाने का फैसला लिया उसने सभी विरोधियों के समीकरणों को बिगाड़ दिया।
वोटों के बिखराव को रोकने में हुए सफल
महागठबंधन की जीत का सबसे अहम कारण रहा ठीक तरह से सीटों के बंटवारे का होना साथ ही वोटों के बिखराव को रोकने की रणनीति भी काफी कारगर साबित हुई।
जाने माने सैफॉलजिस्ट संदीप शास्त्री ने वनइंडिया से बातचीत में बताया कि जिस तरह से नीतीश ने बिहार को चलाया है उससे जमीनी स्तर पर लोग काफी खुश हैं। जिस तरह से नीतीश ने लोगों को यह भरोसा दिलाया कि बिहार को लालू नहीं बल्कि वो ही चलायेंगे उसने लोगों में उनके लिए भरोसे को मजबूत किया।
सुशासन को बनाया मुद्दा
नीतीश ने बिहार में काफी लोकप्रियता प्राप्त की, इसके पीछे की अहम वजह रहा बिहार में उनका सुशासन। जिस तरह से उन्होंने बिहार को आगे ले जाने की नीतियों पर काम किया उसका उनको जमीनी स्तर पर लाभ प्राप्त हुआ। इन्ही योजनाओं के चलते नीतीश को बिहार की महिलाओं ने भी जमकर समर्थन दिया।
विकास मॉडल
नीतीश कुमार के लिए जिस चीज ने सबसे ज्यादा काम किया वह है उनका विकास मॉडल। नीतीश ने अपने शासन काल में बिहार में जो विकास कार्य किये उसे लोगों ने जमकर सराहा और लोग उसे नीतीश शासन में एक बार फिर से आगे बढ़ता देखना चाहते थे।













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