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महज 5 बिंदुओं में जानिए अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व को

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    नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को यूं तो कुछ शब्दों में बयान करना किसी के लिए भी संभव नहीं, लेकिन जिस तरह से उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा और लोगों के बेहतर जीवन के लिए लगाया उसके बाद उन्हें देश के सबसे बड़े नेता के तौर पर हमेशा देखा जाएगा। उनके व्यक्तित्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि यह देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। पंडित नेहरू ने विदेश से आए प्रतिनिधि मंडल से अटल का परिचय कराते हु कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी एक दिन देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी का 16 अगस्त को निधन हो गया, जिसके बाद पूरा देश उन्हे श्रद्धांजलि दे रहा है। आइए डालते हैं अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन को पांच अहम बिंदुओं के जरिए।  

    ग्वालियर का बेटा

    ग्वालियर का बेटा

    अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर 1954 को हुआ था। वह पांचवी लोकसभा में यहां से सांसद चुनकर भारतीय जनसंघ के नेता के तौर पर संसद गए थे। यही जनसंघ बाद में चलकर भारतीय जनता पार्टी के रूप में बदल गया। 1971 में हुए आम चुनाव में जनसंघ को 157 में से सिर्फ 22 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस को 252 सीटों पर जीत मिली थी।

    दिग्गज सांसद

    दिग्गज सांसद

    वाजपेयी पहली बार 1957 में लोकसभा सांसद के तौर पर संसद पहुंचे थे। इस वक्त उनकी उम्र तकरीबन 30 वर्ष थी। इसके बाद वह 9 बार लोकसभा का चुनाव जीते। राज्यसभा के सांसद के तौर पर भी वह दो बार चुनकर यहां पहुंचे। 1994 में वह संसद के सबसे अच्छे सांसद के रूप में चुने गए।

    भाजपा के संस्थापक

    भाजपा के संस्थापक

    वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक थे और पार्टी की पहली बैठक की अध्यक्षता 1980 में की थी। इस दौरान भाजपा को 1984 में सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली थीं, लेकिन अगले चुनाव में यह संख्या बढ़कर 85 पहुंच गई।मौजूदा समय में एनडीए के पास के पास पूर्ण बहुमत है और भाजपा एनडीए का प्रतिनिधित्व कर रही है। देश के कई राज्यों में भाजपा की सरकार है।

    प्रधानमंत्री

    प्रधानमंत्री

    अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे। वह पहली बार मई 1996 में देश के प्रधानमंत्री बने और महज 13 दिन तक ही सरकार में रहे ,जिसके बाद उन्होंने अपने ऐतिहासिक भाषण के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह कुछ समय के लिए 1998-99 में प्रधानमंत्री बने। लेकिन तीसरी बार जब अटल बिहारी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने 5 साल का अपना कार्यकाल पूरा किया। यही नहीं आजादी के बाद वह पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने जिन्होंने गैर कांग्रेसी सरकार के तौर पर 5 साल का कार्यकाल पूरा किया था।

    इसे भी पढ़ें- अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर चीन की न्‍यूज एजेंसी शिन्‍हुआ ने ट्वीट कर दी जॉर्ज फर्नांडीस की फोटो

    प्रवक्ता, कवि और भारत रत्न

    प्रवक्ता, कवि और भारत रत्न

    वाजपेयी हमेशा से ही अपनी जबरदस्त भाषण शैली के लिए जाने जाते थे, खुद लाल कृष्ण आडवाणी ने उनके बारे में कहा था अटल जी के भाषण से मैं खुद के भीतर हीन भावना महसूस करता था। जिस तरह से भाषा पर उनकी जबरदस्त पकड़ थी वह उनकी लेखनी में भी साफ दिखती थी। अटल जी ने कई शानदार कविताएं लिखी थी, जिसमे कैदी कविराई की कुंडलिया और अमर आग है, सबसे अहम हैं। वर्ष 2015 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था, जोकि देश का सर्वोच्च सम्मान है।

    तस्वीरों में देखें अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन को

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    English summary
    Know former PM Atal Bihari Vajpayee in 5 point. He was not only a good orator but a poet, statesman.

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