ATTENTION: जानिए क्या है सीएए-एनआरसी, उससे जुड़ी भ्रांतियां और सच्चाई!
बेंगलुरू। 12 दिसंबर, 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा नागरिकता संशोधित विधेयक यानी सीएबी पर मुहर लगाने के बाद वजूद में आए नागरिकता संशोधित कानून यानी सीएए को एक सप्ताह बीत चुका है। सीएए के वजूद में आने से पूर्व ही इसके विरोध में भ्रांतियों और अफवाहों को बाजार गर्म हो गया था।

गौरतलब है इंस्टेंट मैसेंजिंग ऐप के जरिए फैली भ्रांतियों के कारण नॉर्थ-ईस्ट से शुरू हुआ सीएए का विरोध पूरे देश में तेजी से फैल गया। राजधानी दिल्ली के जामिया यूनिवर्सटी में चल रहा शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। इसकी चिंगारी देखते ही देखते ही यूपी और कर्नाटक को भी अपनी चपेट में ले लिया। हिंसक प्रदर्शन में अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हो चुके हैं, लेकिन अभी भी विरोध थमता नहीं दिख रहा हैं।

लोगों में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर फैली भ्रांतियां और गलतफहमियों को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अलग-अलग मंचों से लोगों को समझाने को कोशिश की और उनसे अपील की कि वो लोगों द्वारा फैलाए जा रहे अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन अफवाहों का तंत्र कितना मजबूत होता है।

इसकी तस्दीक तब हुई जब शांति पूर्ण प्रदर्शन हिंसा में तब्दील हो गई। राजधानी दिल्ली में जामिया कैंपस के सामने प्रदर्शन कर रहे थे छात्र और पुलिस के बीच रस्साकसी और फिर सरकारी वाहनों में आगजनी की घटनाओं ने लोकतांत्रिक प्रदर्शन की दिशा ही बदल कर रख दी। अफवाहों और भ्रांतियों के दौर में कैंपस में घुसे असामाजिक तत्वों ने प्रदर्शन का रूख पलट दिया।

राजनीतिक दलों ने शांति प्रदर्शनकारियों को हिंसक भीड़ में तब्दील करने में भूमिका निभाई। इसकी बानगी दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया का वह ट्वीट है, जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस के एक जवान को सरकारी बस में पेट्रोल डालकर जलाने का आरोप लगाया।

ट्वीट के साथ शेयर किए तस्वीर में सिसोदिया का कहना था कि दिल्ली पुलिस का जवान केंद्र सरकार के इशारे में बस में पेट्रोल डाल जला रहा है। थोड़ी ही देर में आए एक वीडियो ने मनीष सिसोदिया के झूठ की पोल खोल दी थी। यह तय हो गया था कि सीएए की आड़ में विपक्षी दल राजनीतिक रोटियां सेंकने का इंतजाम किया था और जहां-जहां कानून के विरोध में दंगे जैसे हालात हैं, वहां भी कमोबेश यही सूरत है।
सवाल यह है कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दावों के मुताबिक जब नागरिकता संशोधित कानून में भारतीय मुस्लिमों की नागरिकता पर कोई खतरा नहीं है, तो उन्हें बरगला कौन रहा है, जिससे पूरा देश में दंगा जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार लोगों से अपील किया कि अफवाहों पर न ध्यान दें, क्योंकि कानून में किसी भी भारतीय के हितों के समझौता नहीं किया है। खुद अमित शाह कई मोर्च पर यह बात लोगों को समझा चुके हैं, लेकिन हिंसक प्रदर्शनों का दायरा घटने के बजाय बढ़ता जा रहा है।
गत बुधवार को गृह मंत्रालय ने लोगों को विज्ञापनों के जरिए अफवाहों से बचने की सलाह दी, जिसमें कहा गया कि न खुद को गुमराह होने दें और गलत सूचना का शिकार न बनें। यही नहीं, विज्ञापन में कुछ सवालों का जवाब देते हुए लोगों को नागरिकता कानून से संबंधित मुद्दों पर जानकारियां भी दी गई ताकि भ्रांतियों के शिकार हुए लोगों की गलतफहमियां दूर हो सके।

विज्ञापन के जरिए सरकार ने लोगों का आगाह भी किया कि अपना स्वार्थ साधने वालों के बहकावे में न आएं और कानून की सच्चाई को खुद पढ़ें, समझें और फिर विवेक से अपनी राय बनाएं।
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जानिए, क्या है एनआरसी ?
नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन बिल एक रजिस्ट्रर है जिसमें भारत में रह रहे सभी वैध नागरिकों का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। बता दें कि एनआरसी की शुरुआत 2013 में सुप्रीम कोर्ट की देख-रेख में असम में हुई थी। फिलहाल यह असम के अलावा किसी अन्य राज्य में लागू नहीं है।

एनआरसी में शामिल होने के लिए क्या जरूरी है?
एनआरसी के तहत भारत का नागरिक साबित करने के लिए किसी व्यक्ति को यह साबित करना होगा कि उसके पूर्वज 24 मार्च 1971 से पहले भारत आ गए थे। बता दें कि अवैध बांग्लादेशियों को निकालने के लिए इसे पहले असम में लागू किया गया है। अगले संसद सत्र में इसे पूरे देश में लागू करने का बिल लाया जा सकता है।

एनआरसी के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत है?
भारत का वैध नागरिक साबित होने के लिए एक व्यक्ति के पास रिफ्यूजी रजिस्ट्रेशन, आधार कार्ड, जन्म का सर्टिफिकेट, एलआईसी पॉलिसी, सिटिजनशिप सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, सरकार के द्वारा जारी किया लाइसेंस या सर्टिफिकेट में से कोई एक होना चाहिए।

NRC में शामिल न होने वाले लोगों का क्या होगा?
अगर कोई व्यक्ति एनआरसी में शामिल नहीं होता है तो उसे डिटेंशन सेंटर में ले जाया जाएगा जैसा कि असम में किया गया है। इसके बाद सरकार उन देशों से संपर्क करेगी जहां के वो नागरिक हैं। अगर सरकार द्वारा उपलब्ध कराए साक्ष्यों को दूसरे देशों की सरकार मान लेती है तो ऐसे अवैध प्रवासियों को वापस उनके देश भेज दिया जाएगा।

क्या CAA में ही NRC निहित है?
ऐसा नहीं है। CAA अलग कानून है और NRC एक अलग प्रक्रिया है। CAA संसद से पारित होने के बाद देशभर में लागू हो चुका है, जबकि देश के लिए NRC के नियम व प्रक्रिया तय होने अभी बाकी हैं। असम में जो NRC की प्रक्रिया चल रही है, वह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और असम समझौते के तहत की गई है।

क्या NRC सिर्फ मुस्लिमों के लिए ही होगा?
किसी भी धर्म को मानने वाले भारतीय नागरिक को CAA या NRC से परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। एनआरसी का किसी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। यह भारत के सभी नागरिकों के लिए होगा। यह नागरिकों का केवल एक रजिस्टर है, जिसमें देश के हर नागरिक को अपना नाम दर्ज कराना होगा।

क्या धार्मिक आधार पर लोगों को बाहर रखा जाएगा?
यह बिल्कुल भ्रामक बात है और गलत है। NRC किसी धर्म के बारे में बिल्कुल भी नहीं है। जब NRC लागू किया जाएगा, वह न तो धर्म के आधार पर लागू किया जाएगा और न ही उसे धर्म के आधार पर लागू किया जा सकता है। किसी को भी सिर्फ इस आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता कि वह किसी विशेष धर्म को मानने वाला है।

क्या मुस्लिमों से भारतीय होने का सबूत मांगा जाएगा?
सबसे पहले आपके लिए ये जानना जरूरी है कि राष्ट्रीय स्तर पर NRC जैसी कोई औपचारिक पहल शुरू नहीं हुई है। सरकार ने न तो कोई आधिकारिक घोषणा की है और न ही इसके लिए कोई नियम-कानून बने हैं। भविष्य में अगर ये लागू किया जाता है तो यह नहीं समझना चाहिए कि किसी से उसकी भारतीयता का प्रमाण मांगा जाएगा। NRC को आप एक प्रकार से आधार कार्ड या किसी दूसरे पहचान पत्र जैसी प्रक्रिया से समझ सकते हैं। नागरिकता के रजिस्टर में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आपको अपना कोई भी पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज देना होगा, जैसा कि आप आधार कार्ड या मतदाता सूची के लिए देते हैं।

भारत में कैसे नागरिकता कैसे दी जाती है ?
नागरिकता नियम 2009 के तहत किसी भी व्यक्ति की नागरिकता तय की जाएगी। ये नियम नागरिकता कानून, 1955 के आधार पर बना है। यह नियम सार्वजनिक रूप से सबके सामने है। किसी भी व्यक्ति के लिए भारत का नागरिक बनने के पांच तरीके हैं।
1. जन्म के आधार पर नागरिकता
2. वंश के आधार पर नागरिकता
3. पंजीकरण के आधार पर नागरिकता
4. देशीयकरण के आधार पर नागरिकता
5. भूमि विस्तार के आधार पर नागरिकता

क्या माता-पिता के जन्म का विवरण देना पड़ेगा?
आपको अपने जन्म का विवरण जैसे जन्म की तारीख, माह, वर्ष और स्थान के बारे में जानकारी देना ही पर्याप्त होगा। अगर आपके पास अपने जन्म का विवरण उपलब्ध नहीं है तो आपको अपने माता-पिता के बारे में यही विवरण उपलब्ध कराना होगा। लेकिन कोई भी दस्तावेज माता-पिता के द्वारा ही प्रस्तुत करने की अनिवार्यता बिल्कुल नहीं होगी। जन्म की तारीख और जन्मस्थान से संबंधित कोई भी दस्तावेज जमा कर नागरिकता साबित की जा सकती है। हालांकि अभी तक ऐसे स्वीकार्य दस्तावेजों को लेकर भी निर्णय होना बाकी है। इसके लिए वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, बीमा के पेपर, जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र, जमीन या घर के कागजात या फिर सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी प्रकार के अन्य दस्तावेजों को शामिल करने की संभावना है। इन दस्तावेजों की सूची ज्यादा लंबी होने की संभावना है ताकि किसी भी भारतीय नागरिक को अनावश्यक रूप से परेशानी न उठाना पड़े।
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