राष्ट्रीय दल का दर्जा रखने वाली नार्थ ईस्ट की अकेली पार्टी है NPP, जानें उसके बारे में सबकुछ
पीए संगमा मेघालय ही नहीं नार्थ ईस्ट की राजनीति में एक बड़ा नाम थे। वह नौ बार लोकसभा चुनकर पहुंचे थे।

पूर्वोत्तर राज्य मेघालय की सियासी तस्वीर लगभग साफ हो गई है। क्षेत्रीय पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। मेघायल में एनपीपी और बीजेपी की अगुवाई वाली नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस मिलकर सरकार बनाएगें। पार्टी ने मेघालय में 27 सीटें जीती हैं। राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता और लोकसभा के स्पीकर रहे पीए संगमा ने एनपीपी बनाई थी।

एनसीपी छोड़कर बनाई थी एनपीपी
पीए संगमा मेघालय ही नहीं नार्थ ईस्ट की राजनीति में एक बड़ा नाम थे। वह नौ बार लोकसभा चुनकर पहुंचे थे। पूर्व स्पीकर पीए संगमा ने जुलाई 2012 में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) का गठन किया था। पीए संगमा ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर लांच किया था। पीए संगमा ने ने एनपीपी का गठन एनसीपी से निष्किसित किए जाने के बाद किया था। दरअसल कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने शरद पवार के साथ मिलकर एनसीपी का गठन किया था।

2013 में एनपीपी ने राजस्थान पहला चुनाव लड़ा था
संगना ने 2012 में राष्ट्रपति पद के चुनाव में एनसीपी के फैसले को मानने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने एनपीपी बनाई। दिसंबर 2013 में एनपीपी ने राजस्थान पहला चुनाव लड़ा। एनपीपी सांसद किरोड़ीलाल मीणा की अगुवाई में विधानसभा चुनावों में उतारी और चार सीटें जीतने में कामयाब रही। इसके बाद एनपीपी को चुनाव आयोग ने वर्ष 2015 में निलंबित कर दिया था। दरअसल एनपीपी ने आयोग को वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद खर्च का ब्योरा नहीं सौंपा था।

नार्थ ईस्ट में पार्टी का काफी दबदबा है
2016 में जब भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले एनडीए ने नार्थईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस का गठन किया। जिसमें नार्थ ईस्ट राज्यों सिक्किम, असम और नगालैंड के मुख्यमंत्री और मेघालय में एनपीपी गठबंधन में सरकार चला रही थी। लेकिन एनपीपी ने वर्ष 2018 के मेघालय विधानसभा चुनावों में 19 सीटें जीतीं। नार्थईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस ने मिलकर यहां सरकार बनाई। कोनार्ड संगमा राज्य के मुख्यमंत्री बने।

2019 में पार्टी को मिला था राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा
एनपीपी का चुनाव चिन्ह पुस्तक है। पार्टी ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में दो सीटें तूरा और संगमा से जीती थीं। पार्टी पूरे पूर्वोत्तर में काफी असर रखती है। मणिपुर, नागालैंड, अरुणाचल में पार्टी के कई विधायक हैं। 2016 में पीए संगमा के निधन के बाद कोनार्ड कोंगकल संगमा पार्टी के सर्वेसर्वा बन गए। कोनार्ड के परिवार में उनका बड़ा भाई जेम्स और बहन अगाथा दोनों नेता हैं। 07 जून 2019 को इसको राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी मिल गया। ये नार्थ ईस्ट की अकेली पार्टी है, जिसे राष्ट्रीय दल का दर्जा हासिल है।
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