नए सीबीआई प्रमुख सुबोध कुमार जायसवाल का खतरों से रहा है पुराना नाता, आइए जानते हैं उनके बारे में सब कुछ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कई उच्चस्तरीय बैठकों के बाद महाराष्ट्र के आईपीएस अधिकारी सुबोध कुमार जायसवाल को सीबीआई का नया चीफ चुन लिया गया।
नई दिल्ली, 26 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कई उच्चस्तरीय बैठकों के बाद महाराष्ट्र के आईपीएस अधिकारी सुबोध कुमार जायसवाल को सीबीआई का नया चीफ चुन लिया गया। 1985 बैच के अधिकारी सुबोध वर्तमान में सीआईएसएफ के महानिदेशक हैं। सीबीआई प्रमुख का चयन करने के लिए कैबिनेट द्वारा नियुक्त की गई इस समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल थे।

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मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने समिति द्वारा अनुशंसित पैनल के आधार पर सुबोध कुमार जायसवाल को नए सीबीआई प्रमुख के रूप में नियुक्ति की तारीख से 2 साल की अवधि के लिए चुना। सुबोध कुमार कार्यभार ग्रहण करने से या अगले आदेश तक इस पद पर बने रहेंगे।
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ऋषि कुमार शुक्ला के रिटायरमेंट के बाद से सीबीआई पिछले लगभग तीन महीनों से नियमित प्रमुख के बिना ही कार्य कर रही थी। ऋषि शुक्ला के रिटायर होने के बाद 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी और सीबीआई के अपर निदेशक प्रवीण सिन्हा को सीबाआई का कार्यकारी प्रमुख बनाया गया था।
रॉ और एसपीजी में दी सेवाएं
सीबीआई के नए प्रमुख सुबोध कुमार जायसवाल इससे पहले अनुसंधान और विश्लेषण (रॉ) और विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। बता दें कि सीबीआई प्रमुख के पद के लिए सीबीआई या सतर्कता विभाग में अनुभव आलोक वर्मा और शुक्ला के समय तक एक मानदंड हुआ करता था।
आतंकी जांच और खुफिया तंत्र से है पुराना नाता
सुबोध जायसवाल को राज्य और केंद्र के स्तर पर आतंकी जांच और खुफिया जानकारियों को हैंडिल करने का अच्छा खासा अनुभव है। महाराष्ट्र के डीजीपी का कार्यभार संभालने से पहले जायसवाल ने अपने गृह कैडर में कई हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की। सीबीआई के आने से पहले उन्होंने तेलगी स्टांप पेपर घोटाले की जांच की।
उन्होंने राज्य रिजर्व पुलिस बल और राज्य खुफिया ब्यूरो का भी नेतृत्व किया है। 2006 के सिलसिलेवार धमाकों से लेकर 26 नवंबर, 2008 को हुए घातक आतंकी हमले तक, जायसवाल मुंबई में कुछ सबसे बड़ी आपराधिक और आतंकी जांच का हिस्सा भी रहे। नक्सल के मोर्चे पर, कई अभियानों का नेतृत्व करने के अलावा, उन्होंने एल्गर परिषद और भीमा कोरेगांव हिंसा मामलों की जांच की निगरानी की, जहां एनआईए ने बाद में सुधा भारद्वाज, स्टेन स्वामी, गौतम नवलखा, वरवराव राव जैसे कार्यकर्ताओं पर चार्जशीट दाखिल की। जायसवाल ने पुणे में एक अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के रूप में भी काम किया है और महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) का भी हिस्सा रहे हैं।
महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार को उजागर करने में उनकी भूमिका हाल ही में तब सामने आई जब भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने जायसवाल द्वारा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को कथित रूप से लिखे गए एक पत्र को सार्वजनिक किया जिसमें मुंबई पुलिस में ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार के आरोपों को उजागर किया गया था।












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