MSP पर लिखित आश्वासन देने को तैयार मोदी सरकार, जानिए किसानों को भेजे प्रस्ताव की मुख्य बातें
नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central Govt) और किसानों के बीच अब तक पांच दौर की बातचीत बेनतीजा रही है और अब छठवें दौर की बातचीत से पहले ये उम्मीद लगाई जा रही है कि शायद किसानों और सरकार के बीच सहमति बन जाए। इस बात की उम्मीद इसलिए भी है कि सरकार की तरफ से एक प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें MSP समेत कई अहम मुद्दों पर सरकार लिखित में आश्वासन देने को तैयार हो गई है।
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सरकार के प्रस्ताव की अहम बातें
बुधवार शाम को सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के पास कृषि मंत्रालय से एक लेटर पहुंचा, जिसमें ये जानकारी दी गई थी कि कृषि कानून में क्या-क्या संशोधन किए जा सकते हैं। सरकार का ये प्रस्ताव 13 किसान यूनियनों के नाम भेजा गया है, जो 26 नवंबर से चल रहे आंदोलन का हिस्सा हैं। आइए आपको सरकार के उस प्रस्ताव की मुख्य बातें बताते हैं।
- केंद्र सरकार के द्वारा किसानों को भेजे गए प्रस्ताव की सबसे मुख्य बात न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर लिखित आश्वासन देने की है, क्योंकि सरकार और किसानों के बीच सबसे बड़ी लड़ाई MSP को लेकर ही है। सरकार ने कहा है कि वो इस आश्ववासन को लिखित में देने के लिए तैयार है कि मौजूदा MSP जारी रहेगी।
- इसके अलावा सरकार ने किसानों के मन से ये डर निकालने की कोशिश की है कि कृषि कानून के आने से मंडियां कमजोर हो जाएंगी। सरकार ने कहा है कि इसके लिए एक संशोधन किया जाएगा और राज्य सरकारों को ये शक्ति प्रदान होगी कि वो व्यापारी के रजिस्ट्रेशन के लिए नियम बनाए। इसके बाद राज्य सरकारें निजी मंडियों की रजिस्ट्रेशन को लागू कर सकेंगी।
- सरकार ने किसानों की उस मांग पर सहमति जताई है, जिसमें किसान कृषि विवाद का निपटारा सिविल कोर्ट में कराने की बात कह रहे हैं। सरकार इसके लिए संशोधन करने के लिए तैयार कि कृषि विवादों का निपटारा सिविल कोर्ट में किया जाएगा। अभी जो प्रावधान है उसके मुताबिक, वर्तमान कृषि विवाद का निपटारा एसडीएम स्तर पर किया जाएगा।
- किसानों को ये डर है कि ये कृषि कानून आने के बाद कॉरपोरेट सेक्टर का उनके खेतों पर कब्जा हो जाएगा। हालांकि सरकार किसानों के इस डर को शुरुआत से खारिज करती आई है। इस बीच सरकार ने फिर से कहा है कि कोई भी खरीददार खेल के खिलाफ लोन नहीं ले पाएगा और ना ही ऐसी कोई शर्त बनाई जाएगी। साथ ही कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के कानून में अभी किसान के पास कोर्ट जाने का अधिकार नहीं है, ऐसे में सरकार इसमें संशोधन कर कोर्ट जाने के अधिकार को शामिल कर सकती है।
- प्रस्तावित बिजली संशोधन बिल 2020 को रद्द करने की मांग पर सरकार का कहना है कि किसानों के लिए बिजली बिल भुगतान की मौजूदा प्रणाली में कोई बदलाव नहीं होगा।
- पराली जलाने पर जुर्माने के प्रावधान को सरकार वापस लेने के लिए तैयार है।












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