फिर तेज हुई कैबिनेट फेरबदल की चर्चा, एक नजर मोदी सरकार के 9 साल में 5 मंत्रिमंडल बदलाव पर
Modi Government: 2024 लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। हाल ही में बीजेपी के नए तेलंगाना प्रमुख के रूप में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी की नियुक्ति के बाद कैबिनेट फेरबदल की चर्चा है। अगर ऐसा होता है, तो यह 2024 की चुनावी जंग से पहले मोदी सरकार का अंतिम कैबिनेट फेरबदल हो सकता है।
2014 में सत्ता में आने के बाद से पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने पांच बड़े फेरबदल और विस्तार देखे हैं। ऐसे में एक नजर मोदी सरकार के 9 साल में 5 मंत्रिमंडल बदलाव पर...

पहला कैबिनेट फेरबदल
26 मई 2014 को जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, तो उनकी पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उनके 45 सहयोगी शामिल हुए। इनमें 23 कैबिनेट मंत्री, 10 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और बाकी 12 राज्य मंत्री थे। छह महीने बाद 9 नवंबर 2014 को पहली बार मंत्रिमंडल का विस्तार किया, जिसमें 21 नए चेहरों को शामिल किया गया।
मोदी सरकार ने चार कैबिनेट मंत्रियों, तीन राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और 14 राज्य मंत्रियों को शामिल करके फिर से विस्तार किया, जिससे सरकार का कुल आकार 45 से बढ़कर 66 हो गया। शपथ लेने वाले कैबिनेट मंत्रियों में गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, हरियाणा के नेता बीरेंद्र सिंह और तत्कालीन भाजपा महासचिव जेपी नड्डा शामिल थे।
दूसरा कैबिनेट फेरबदल
दो साल बाद 5 जुलाई 2016 को पीएम मोदी ने अपने केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 19 नए चेहरों को शामिल किया, जो मई 2014 में सत्ता में आने के बाद दूसरा विस्तार था। प्रकाश जावड़ेकर, जो स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री थे उनको कैबिनेट रैंक में पदोन्नत किया गया और 19 नए राज्य मंत्री शामिल किए गए। इस विस्तार से मंत्रिमंडल का आकार 78 मंत्रियों तक पहुंच गया।
तीसरा मंत्रिमंडल विस्तार
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अपने अंतिम विस्तार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 सितंबर, 2017 को अपनी सरकार में नौ मंत्रियों को नियुक्त किया। जबकि छह मंत्रियों को हटा दिया गया, चार मंत्रियों को कैबिनेट रैंक में पदोन्नत किया गया। इनमें अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रूप में मुख्तार अब्बास नकवी, रक्षा मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण, कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त प्रभार के साथ रेल मंत्री के रूप में पीयूष गोयल और अतिरिक्त प्रभार के साथ पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान शामिल थे।
हालांकि, नरेंद्र मोदी द्वारा कैबिनेट में सबसे बड़े फेरबदल की कवायद अभी बाकी थी। यह पीएम मोदी के 2019 में शानदार जनादेश के साथ दिल्ली की सत्ता पर दोबारा चुने जाने के दो साल बाद हुआ।
चौथा मंत्रिमंडल विस्तार
7 जुलाई, 2021 को अपने दूसरे कार्यकाल के लगभग बीच में अपने मंत्रिपरिषद में एक बड़े बदलाव के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 43 मंत्रियों को शपथ दिलाई, जिनमें 36 नए चेहरे और सात को कैबिनेट रैंक में पदोन्नति शामिल थी। इस व्यापक बदलाव के दौरान बारह मंत्रियों को हटा दिया गया।
विशेष रूप से रविशंकर प्रसाद, जिनके पास कानून और सूचना प्रौद्योगिकी के प्रमुख विभाग था। प्रकाश जावड़ेकर को पर्यावरण, सूचना और प्रसारण और भारी उद्योग विभागों से मुक्त कर दिया गया। वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को भी पद छोड़ना पड़ा।
वहीं थावर चंद गहलोत, जिन्हें सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री के पद से हटा दिया गया था, उनको कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया। शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के अलावा बाबुल सुप्रियो को भी पद से हटाया गया। फिलहाल बाबुल सुप्रियो बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और वर्तमान में राज्य की सत्तारूढ़ सरकार में मंत्री हैं।
पांचवां मंत्रिमंडल फेरबदल
सबसे हालिया और आश्चर्यजनक घटनाक्रम में अरुणाचल प्रदेश के सांसद किरेन रिजिजू को इस साल 18 मई को केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री के पद से हटा दिया गया और उनकी जगह अर्जुन राम मेघवाल को लिया गया। रिजिजू को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय सौंपा गया।












Click it and Unblock the Notifications