Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Farmers Protest: लोकसभा चुनाव से पहले किसान आंदोनल के पीछे की राजनीति क्या है?

Kisan Andolan Reason: दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में रहने लोग फिर से करीब तीन साल पहले वाली अव्यवस्था की कल्पना करके सहमे हुए हैं। देश के कई राज्यों से फिर से किसानों को दिल्ली कूच करने का आह्वान किया गया है। 16 फरवरी को राष्ट्रव्यापी बंद का एलान किया गया है।

किसानों का आंदोलन और चुनाव अब एक विश्वव्यापी ट्रेंड बनकर उभरा है। यूरोप के देशों से लेकर अमेरिका तक में किसानों के आंदोलन और चुनाव का सीधा तालमेल देखा जा रहा है। ग्लोबलाइजेशन के युग में भारत भी इससे अछूता नहीं है।

 farmers protest politics

मोदी सरकार के सामने बड़ी चुनौती
2020-21 के किसान आंदोलन को भी मोदी सरकार को यूपी विधानसभा चुनावों के मुहाने पर आकर किसी तरह से समाप्त करवाने को मजबूर होना पड़ा था। अप्रैल-मई में देश आम चुनावों के लिए तैयार हो रहा है और यह केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

किसानों की मांग क्या है?
किसान संगठन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।

दो मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रही है सरकार
फिलहाल केंद्र की मोदी सरकार चुनावी साल में इस संकट से उबरने के लिए दो मोर्चे पर काम कर रही है। एक तो केंद्र के वरिष्ठ मंत्रियों को तमाम किसान संगठनों से बातचीत में लगाया है। क्योंकि, सरकार मानकर चल रही है कि किसी भी समस्या का हल आखिरकार बातचीत से ही निकाला जा सकता है।

दूसरी तरफ दिल्ली की सीमाओं पर पिछली बार जैसी परिस्थितियां पैदा न होने पाएं, उसके लिए तमाम एहतियाती उपाय किए गए हैं। पड़ोसी राज्यों को दिल्ली से जोड़ने वाली तमाम सीमाओं, जैसे कि सिंघू, शंभू, टिकड़ी और गाजीपुर बॉर्डरों पर जोरदार बैरिकेडिंग की गई है। तंबू गाड़ने की इजाजत नहीं दी जा रही है।

पिछली बार की गलतियों का समाधान खोजने की कोशिशें की गई हैं। दिल्ली में एक महीने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है। हरियाणा सरकार ने भी इंटरनेट पर पाबंदी लगा रखी है। दिल्ली कूच करने की तैयारी में लगे किसान संगठनों पर पुख्ता नजर रखी जा रही है।

चुनावी वर्ष में सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में किसान संगठन
तथ्य ये है कि किसान संगठनों को भी पता है कि लोकसभा चुनाव सामने है और मोदी सरकार पर प्रेशर बनाने के लिए इससे बेहतर मौका हो नहीं हो सकता। यूपी और पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार के सामने क्या मजबूरी थी, उन्हें इसका अंदाजा लग चुका है।

कर्नाटक से अयोध्या जाने के बहाने दिल्ली रवाना हुए किसान
दिल्ली कूच में जिन राज्यों के किसान शामिल होने वाले हैं, उनमें पंजाब, हरियाणा और यूपी के किसान संगठन तो शामिल हैं ही, इस बार कर्नाटक से भी किसानों के दिल्ली पहुंचने की कोशिशें देखी जा रही हैं।

विपक्षी दलों की राज्य सरकारें दे रही हैं आंदोलनकारियों को समर्थन
मजेदार बात है कि ये किसान अयोध्या में राम लला के दर्शन के बहाने ट्रेनों के माध्यम से कूच कर रहे थे, लेकिन राज्य सरकार को भनक लग गई और उन्हें भोपाल में ही उतार लिया गया। एमपी में बीजेपी की सरकार की इस कार्रवाई की प्रतिक्रिया सीधे कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की ओर से देखने को मिली।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने किसानों को ट्रेनों से उतारे जाने की घटना को निंदनीय बताते हुए कहा कि उनके आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता। वहीं दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार में मंत्री गोपाल राय ने भी मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की।

उन्होंने कहा है कि सरकार किसानों के साथ जो बर्ताव कर रही है, वैसा अंग्रेजों ने भी नहीं किया। उनके मुताबिक किसानों की मांगें सही हैं और चुनाव आ चुके हैं और सरकार ने वादा करके उन्हें धोखा दिया है। किसान मजबूरी में यह कदम उठा रहे हैं।

चुनाव से पहले मोदी सरकार की छवि बिगाड़ने की तैयारी?
विरोधी दलों की सरकारों की इन प्रतिक्रियाओं को देखने के बाद मोदी सरकार को महसूस हो रहा है कि किसान आंदोलन तो एक बहाना है। यह सबकुछ चुनाव से पहले सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने की तैयारी की गई है।

केंद्र सरकार को लगता है कि पिछली बार पंजाब की कांग्रेस सरकार ने किसानों को दिल्ली में डेरा डालने का मौका दिया था, वही अब मौजूदा राज्य सरकार कर रही है.....ताकि चुनाव से पहले प्रधानमंत्री मोदी पर दबाव बनाया जा सके।

मोदी सरकार को लगता है आंदोलन के पीछे राजनीति
मोदी सरकार को लगता है कि देश के आम किसान उसके खिलाफ कैसे हो सकते हैं। क्योंकि, उसे लगता है कि वह तो छोटे और सीमांत किसानों के खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत हर साल 6,000 रुपए ट्रांसफर कर रही है और जिसकी अब अगले 5 साल के लिए गारंटी दी जा चुकी है। इस योजना के 11 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को अबतक 2.80 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए जा चुके हैं।

मोदी सरकार को यह भी लगता है कि गरीब, महिला, यूवा और किसान पर ही तो उसने फोकस रखा है फिर किसान इस तरह से किसानों के सड़कों पर उतरने के पीछे जरूर राजनीति है।

कहा जा रहा है कि दिल्ली कूच को सफल बनाने के लिए किसानों का दस्ता अयोद्या जाने वाले तीर्थयात्री बनकर दिल्ली में छिप-छिपकर पहुंचने की तैयारी में हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को आंदोलनकारियों के इन तरकीबों की भनक है और वह इसपर भी पूरी सावधानी बरतने की कोशिश कर रहे हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+