India-China Border: 'गर्व महसूस हो रहा', भारत और चीन के बीच खत्म हुए तनाव पर किरेन रिजिजू
दिवाली पर्व से पूर्व ही भारत और चीन दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों के टकराव वाले बिंदुओं से सैनिकों को वापस बुलाने का काम पूरा कर लिया है। अब इन क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल हो रही है और गश्त जल्द ही नियमित तौर पर जारी रहेगी।
ऐसे में भारत-चीन सीमा पर स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) का केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दौरा किया और भारतीय सैनिकों से मुलाकात की।

इस दौरान रिजिजू की चीनी सैनिकों से भी मुलाकात हुई, जहां उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में कठिनाई भरे मौसम और वहां की सुविधाओं पर चर्चा की। इस दौरे में रिजिजू ने भारतीय सीमावर्ती इलाकों में किए गए विकास कार्यों की सराहना की और अपनी पोस्ट में कहा कि यह विकास देखकर हर भारतीय को गर्व महसूस होगा। इस सकारात्मक कदम के तहत दोनों देशों के सैनिकों ने दिवाली के अवसर पर मिठाइयों का आदान-प्रदान भी किया, जो आपसी संबंधों में सुधार का प्रतीक माना जा रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और तनाव का कारण
भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव का इतिहास पुराना है। 1962 में दोनों देशों के बीच हुए युद्ध के बाद से ही सीमा विवाद चला आ रहा है। 2020 में गालवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों को तैनात किया और पिछले तीन वर्षों में स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
दोनों देशों के बीच समझौता
अक्टूबर 2023 में भारत और चीन के बीच सीमा समझौता हुआ था, जिसमें दोनों देशों के सैनिकों को उन टकराव बिंदुओं से पीछे हटने के लिए कहा गया था, जहाँ वे आमने-सामने थे। इस समझौते के बाद सीमा पर स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा है। हाल ही में रूस में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें सीमा पर शांति बहाल करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई।
भारत के रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस प्रक्रिया पर संतोष जताते हुए कहा कि लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास सैनिकों की वापसी का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने आशा जताई कि आने वाले समय में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने में और भी सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
चीनी रक्षा मंत्रालय का क्या है कहना?
चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने भी बताया कि सैनिकों की वापसी के समझौतों को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि चीन भी इस समझौते को गंभीरता से ले रहा है और सीमा पर शांति बहाल करने के लिए तत्पर है।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का हल निकलने से दोनों देशों के संबंधों में सुधार होने की उम्मीद है। सैनिकों की वापसी और गश्त की पुनः शुरुआत से यह संकेत मिलता है कि दोनों देश स्थायी शांति और सहयोग की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यह कदम न केवल सीमा पर शांति स्थापित करने में सहायक होगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।












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