Kiren Rijiju का दावा- सुलगते मणिपुर के पीछे कांग्रेस की नीतियां, INDIA में शामिल दलों का काम भारत विरोधी
Kiren Rijiju ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान 67 मिनट का लंबा भाषण दिया। केंद्रीय मंत्री और अरुणाचल से निर्वाचित भाजपा सांसद किरेन रिजिजू ने 2014 से पहले पूर्वोत्तर से भेदभाव और भारत के अन्य हिस्सों में अत्याचार जैसे गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने 26 दलों के विपक्षी गठबंधन- इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस (INDIA) को आड़े हाथों लिया। पूर्व कानून मंत्री ने कहा, "गठबंधन को INDIA नाम देने से कुछ नहीं होगा, आप वास्तव में भारत के खिलाफ काम कर रहे हैं।"

लोक सभा में रिजिजू ने मंगलवार को कहा, 2014 से पहले पूर्वोत्तर के कई लोगों को दिल्ली और देश के अन्य प्रमुख शहरों में नस्लीय भेदभाव और अत्याचार का सामना करना पड़ा था। 2014 के बाद हालात बदले और आजादी के बाद पहली बार गुवाहाटी में डीजीपी कॉन्फ्रेंस हुई।
पूर्व कानून मंत्री रिजिजू ने कहा कि गुवाहाटी की बैठक के दौरान, पीएम ने निर्देश दिया कि पुलिस को पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया, देश पुरानी संसद भवन की बिल्डिंग में आज आखिरी बार अविश्ववास प्रस्ताव गिरते देखेगा।
विपक्षी एकता और और लोक सभा में संख्या बल पर का जिक्र कर रिजिजू ने कहा, मणिपुर की वर्तमान स्थिति के पीछे कांग्रेस की गलत नीतियां हैं। अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान किरेन रिजिजू ने टोक्यो ओलंपिक में भारत के बेहतर प्रदर्शन का दावा भी किया।
मणिपुर के हालात पर रिजिजू के दावे
उन्होंने कहा, ऐसा सोचना गलत है कि मणिपुर आज जला है। इसका कारण वर्षों पुरानी लापरवाही और मणिपुर को उसके हाल पर छोड़ा जाना है। रिजिजू ने कहा, कभी मणिपुर में सर्वाधिक उग्रवादी संगठन थे, लेकिन 2014 के बाद हालात बदले, पीएम मोदी ने लोगों का भरोसा जीता।
रिजिजू ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार बेहद मजबूत स्थिति में है। अविश्वास प्रस्ताव बेमानी है। पूरी दुनिया में भारत की तारीफ हो रही है। उन्होंने लगभग दो दशक लंबे संसदीय करियर का जिक्र कर रहा, वे 2004 से संसद में हैं। कई घटनाएं देखी हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बतौर रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस सांसद लोक सभा में रह चुकी हैं। उनके साथ असंसदीय बर्ताव का जिक्र कर रिजिजू ने कहा, वाम दलों ने कभी शारीरिक हमले की कोशिश की। उस समय खुद उन्होंने कुछ अन्य सांसदों की मदद से ममता को बचाया।
145 सीट जीतने पर 450 का गुमान
उन्होंने कहा, भाजपा ऐसी घटनाओं को भूलती नहीं है। भले ही ममता बनर्जी के व्यवहार में बदलाव आ गया है, लेकिन कांग्रेस के कार्यकाल में पूर्वोत्तर की आवाज दबाने का हरसंभव प्रयास हुआ। 2004 में 145 सीट जीतने पर भी कांग्रेस 450 सांसद होने के गुमान में रहती थी।












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