किरण मजूमदार की Communal Divide' वाले Tweet पर भड़के अमित मालवीय, कहा-' ये दुर्भाग्यपूर्ण... '

बेंगलुरु , 31 मार्च। कर्नाटक में हिजाब मुद्दे के बवाल के बाद मुसलमानों को मंदिर मेले में दुकान लगाने की अनुमति नहीं मिलने वाली बात अब तूल पकड़ती जा रही है। ये मामला कल विधानसभा में भी उठा था , जहां कर्नाटक सरकार ने नियमों का हवाला देकर बात संभालने की कोशश की थी तो वहीं अब इस प्रकरण में आईटी सेक्टर की लोकप्रिय शख्सियत और बायोकॉन लिमिटेड की कार्यकारी अध्यक्ष किरण मजूमदार-शॉ कूद पड़ी हैं। उन्होंने ट्वीट करके मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से राज्य में इस तरह के 'धार्मिक बंटवारे' को शांति पूर्वक हल करने की बात कही है।

'सीएम बोम्मई इस बढ़ते धार्मिक विभाजन को दूर करें'

'सीएम बोम्मई इस बढ़ते धार्मिक विभाजन को दूर करें'

किरण मजूमदार ने अपने tweet में लिखा है कि 'कर्नाटक ने हमेशा समावेशी आर्थिक विकास किया है और हमें इस तरह के सांप्रदायिक बहिष्कार की अनुमति नहीं देनी चाहिए,अगर आईटीबीटी सांप्रदायिक हो गया तो यह हमारे वैश्विक नेतृत्व को नष्ट कर देगा,मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई, कृपया इस बढ़ते धार्मिक विभाजन को दूर करें'।

'हमारे सीएम बहुत प्रगतिशील नेता हैं'

'हमारे सीएम बहुत प्रगतिशील नेता हैं'

इसके बाद उन्होंने अपने अगले ट्वीट में सीएम की तारीफ करते हुए लिखा है कि 'हमारे सीएम बहुत प्रगतिशील नेता हैं, मुझे यकीन है कि वह जल्द ही इस मुद्दे को सुलझा लेंगे।' अपने ट्वीट में उन्होंने मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को टैग किया है।

अमित मालवीय ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

अमित मालवीय ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

लेकिन भाजपा की ओर से इस बारे में कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने किरण मजूमदार के Tweet को दुर्भाग्यपूर्ण कहा है।

'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि किरण शॉ जैसे लोग...'

उन्होंने ट्वीट किया है कि 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि किरण शॉ जैसे लोग अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से प्रेरित राय थोपते हैं और इसे आईटी/बीटी क्षेत्र में भारत के लीडरशीप के साथ जोड़ते हैं। राहुल बजाज ने कभी गुजरात के लिए भी कुछ ऐसा ही कहा था, आज यह एक प्रमुख ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब है। Go figure...।'

सोशल मीडिया पर वायरल Tweets

इस वक्त मजूमदार और मालवीय के ट्वीट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और लोग जमकर इस पर टिप्पणी कर रहे हैं।

क्या है बवाल?

दरअसल कर्नाटक के तटीय इलाके के कई हिस्सों में मंदिरों में लगने वाले वार्षिक मेलों में मुस्लिम व्यापारियों के स्टॉल खोलने पर प्रतिबंध लगाया गया है। हाल ही में हिंदूवादी संगठनों ने मुस्लिम व्यापारियों की भागीदारी पर आपत्ति लगाई थी जब इन कई मुसलमानों ने स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पर प्रतिबंध को जारी रखने के उच्च न्यायालय के फैसले के विरोध में अपनी दुकानें बंद कर दी थीं। इसी बात से नाराज होकर मंदिर परिसर में मुसलमान व्यापारियों को दुकान न आवंटित करने का फैसला किया गया है, जिस पर बवाल मच गया है।

क्या कहा सरकार ने?

कर्नाटक सरकार ने विधानसभा में कहा कि 'मंदिरों के परिसर के अंदर गैर-हिंदुओं के व्यापार करने पर प्रतिबंध 2002 में कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थानों और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1997 के तहत पेश किए गए नियम के आधार पर लगा है।

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