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किरण बेदी ने भूषण को बोला थैंक्यू लेकिन शांति ने किया मिलने से इंकार

नई दिल्ली। दिल्ली चुनावी दंगल एक रोचक मोड़ पर पहुंच चुका है। किरण बेदी बनाम केजरीवाल की लड़ाई में कौन किस पर भारी है यह तो आने वाला वक्त बतायेगा लेकिन इसमें किसी को संदेह नहीं कि किरण बेदी के भाजपा में जाने से 'आप' पार्टी में खलबली मच गई है और इस खलबली में उफान तब आया जब 'आप' पार्टी के फाउंडर मेंबर शांति भूषण ने किरण बेदी के कसीदे पढ़ दिये जिसके बाद तो जैसे 'आप' पार्टी के अंदर कलह ही पैदा हो गया।

Kiran Bedi wants to thank Shanti Bhushan for praising her

लेकिन जहां आप पार्टी भूषण पर सवालिया निशान लगा रही है वहीं दूसरी ओर किरण बेदी ने शांति भूषण का शुक्रिया अदा किया है और उनके इस थैंक्यू ने 'आप' पार्टी के कलह में घी का काम कर दिया है जिसके कारण शांति भूषण ने किरण बेदी को मिलने से मना कर दिया है।

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जी हां अपनी तारीफ सुनने के बाद किरण बेदी ने शांति भूषण की तारीफों के पूल बांधते हुए कहा कि मैं शुक्रगुजार हूं उनकी, जिन्होंनें मेरे लिए ऐसे अच्छे शब्द कहे। वो एक काबिल और प्रतिष्ठित वकील हैं जिनकी मैं दिल से इज्जत करती हूं। मैं उनसे मिलना चाहती थी लेकिन उन्होंने मिलने से मना कर दिया।

किरण बेदी ने पढ़े शांति भूषण के कसीदे

खबर है कि शांति भूषण ने किरण बेदी से मिलने के सवाल पर उन्हें कहा कि बेहतर होगा वो अपना समय अपनी पार्टी के चुनाव में खर्च करें। लेकिन खबर है कि शांति भूषण ने किरण बेदी को मिलने से मना सिर्फ अपनी पार्टी के कारण बोला है, जो कि उनसे इसलिए खफा है क्योंकि उन्होंने किरण बेदी की तारीफ की थी।

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गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी (आप) के संस्थापक सदस्य शांति भूषण ने गुरुवार को कहा था कि दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुख्यमंत्री उम्मीदवार किरण बेदी चुनावी बिसात पर 'तुरुप का पत्ता' हैं। उनका कहना है कि किरण आप संयोजक अरविंद केजरीवाल से बेहतर मुख्यमंत्री साबित होंगी।

किरण बेदी चुनावी बिसात पर 'तुरुप का पत्ता'

केजरीवाल ने शांति भूषण की इस टिप्पणी को यह कहते हुए नजरअंदाज कर दिया कि इससे कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि इससे जाहिर होता है कि पार्टी के अंदर एक लोकतंत्र है और हर कोई अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र है लेकिन आशीष खेतान ने किरण बेदी की तारीफ पर शांति भूषण पर ही सवाल दाग दिये हैं।

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