...तो मालामाल विजय माल्या ने पैदा कर दिए ये 5 खतरे
बेंगलोर-नई दिल्ली- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि बैंक विलफुल डिफॉल्टर के तमगे को मजबूत हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। यह बात किसी और के नहीं बल्कि किंगफिशर किंग विजय माल्या के संदर्भ में कही गई है।
माल्या का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि बदनामी का यह तमगा मिलने के बाद कर्ज लेने वाले के लिए वित्तीय प्रणाली से और कर्ज लेने के रास्ते बंद हो जाते हैं। किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या को तीन बैंकों ने विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। विलफुल डिफॉल्टर शब्द यहां 'अपनी इच्छा से खुद को दिवालिया घोषित' करने वाले के लिए प्रयोग किया गया है। इन 5 बातों में पढ़ें वो खतरे जो माल्या ने ना सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी खड़े कर दिए हैं-

विलफुल डिफॉल्टर का खतरा नं 1
दरअसल विलफुल डिफॉल्टर की लिस्ट रिजर्व बैंक और क्रेडिट इंफॉरमेशन ब्यूरो द्वारा सेबी को भेजी जाती है। सेबी नियमों के मुताबिक विलफुल डिफॉल्टर बाजार से और पैसे नहीं जुटा सकता है।

विलफुल डिफॉल्ट का खतरा नं 2
इस लिस्ट में नाम शामिल होने के बाद कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था उसे अन्य कोई भी सुविधा नहीं देगी। देश के सर्वोच्च बैंक रिजर्व बैंक द्वारा जारी विलफुल डिफॉल्टर्स की लिस्ट में नाम आने के साथ उस व्यक्ति या कंपनी को अगले पांच साल तक के लिए किसी भी नए कारोबार को खोलने के लिए कर्ज नहीं मिल सकेगा।

विलफुल डिफॉल्ट का खतरा नं 3
किसी भी मसले में जरूरत पड़ने पर बैंक, फौजदारी या अन्य मामले के तहत कानूनी कार्यवाही भी कर सकता है। सबसे अहम बात यह है कि बैंक विलफुल डिफॉल्टर कंपनी के प्रबंधन को बदल भी सकता है।

विलफुल डिफॉल्टर का खतरा नं 4
हाल ही में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया ने माल्या और उनकी किंगफिशर एयरलाइंस व अन्य दो डायरेक्टर्स को विलफुल डिफॉल्टर्स घोषित किया है। माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस पर 17 बैंकों का 7,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। यह 'अंतर्राष्ट्रीय बदनामी' के तौर पर भी देखा जा रहा है।

विलफुल डिफॉल्टर का खतरा नं 5
इस पूरे मसले के बाद बैंक व अन्य वित्तीय संस्थाएं इस तरह के डर से बचने के लिए कर्ज अदा करने से पहले अपनी शर्तें कड़ी करेंगी व अन्य नवोदित उद्योगपति इस कठोर नीति का शिकार बन सकते हैं।












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