कनाडा में खालिस्तान के नाम पर ऐसे होती है वोट बैंक की राजनीति, जानें ट्रड्यू की क्‍या है पॉलिसी

नई दिल्ली। कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रड्यू पहली बार भारत दौरे पर हैं और कनैडियन मीडिया समेत वहां के लोगों का कहना है कि मोदी सरकार ने फिकी मेहमान नवाजी की है। सात दिनों के दौरे कि लिए भारत आए ट्रड्यू अपने परिवार के साथ गुजरात के साबरमती से लेकर उत्तर-प्रदेश के आगरा में ताज का दीदार कर चुके हैं, लेकिन किसी भी सीएम ने कनाडा के पीएम से मुलाकात नहीं की। भारत सरकार के अलावा पंजाब सरकार ने भी जस्टिन ट्रड्यू के साथ अपनी नाराजगी व्यक्त की है। दरअसल इस पूरे बेरुखी की वजह खालिस्तान है।

कनाडा में खालिस्तान के नाम पर ऐसे होती है राजनीति

पिछले कुछ सालों में कनाडा और भारत के रिश्तों में तल्खियां देखने को मिली है। जब से कनाडा के पीएम ने अपने देश में खालिस्तान संगठनों का समर्थन किया था, तभी से दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ा है। बता दें कि कनाडा की राजनीति में सिख एक बहुत बड़ा वोट बैंक है और इसी वजह से ट्रड्यू ने खालिस्तान समर्थित सिखों का सपोर्ट किया था।

कनाडा में 5 लाख से ज्यादा सिख समुदाय के नागरिक है। यही नहीं, ट्रड्यू की सरकार में हरजीत सज्जन डिफेंस मिनिस्टर है, जिनके पिता वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन का मेंबर थे। यहां यह जानना जरूरी है कि हरजीत सिंह सज्जन खालिस्तान समर्थकों के लिए सहानुभूति दिखा चुके हैं, जिस पर पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

कनाडा में जो प्रो-खालिस्तानी संगठन है, वे 2020 तक पंजाब स्वतंत्रता जनमत संग्रह की योजना बना रहे हैं। ट्रड्यू पंजाब के अमृतसर में गोल्डन टेंपल भी जाएंगे। हालांकि, पंजाब सीएम कनैडाई पीएम से मिलेंगे या नहीं इस पर अभी भी संदेह है, लेकिन सीएम कैप्टन ने ट्वीट कर ट्रड्यू का वेलकम जरूर किया है।

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