'न्याय चाहिए, पैसा नहीं': कर्नाटक हिंसा पीड़ित के परिजन ने सिद्धारमैया की गाड़ी पर फेंके 2 लाख रुपये
बेंगलुरु, 15 जुलाई: कर्नाटक के विपक्ष के नेता सिद्धारमैया को शुक्रवार को एक बेहद ही अजीबो-गरीब स्थिति का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को कर्नाटक के बागलकोट जिले में केरूर हिंसा में घायल हुए चार लोगों में से एक के परिवार की महिला सदस्य ने सिद्धारमैया द्वारा मुआवजे के तौर पर दिए गए 2 लाख रुपये उन्ही की कार पर फेंक दिए। वह छह जुलाई को केरूर कस्बे में हुए संघर्ष में घायलों का हालचाल जानने के लिए अस्पताल पहुंचे थे और उन्हें मुआवजा की राशि सौंपी थी।

केरूर बादामी सीट में पड़ता है, जहां से सिद्धारमैया विधायक हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संघर्ष में घायल हुए मोहम्मद हनीफ सहित चार लोगों के परिवारों से मिलने गए थे। घायलों से मिलने के बाद सिद्धारमैया ने उनके परिजनों को मुआवजा दिया था। सिद्धारमैया ने सभी घायलों को 50-50 हजार रुपए का मुआवजा दिया है। सिद्धारमैया के अस्पताल से लौटने के दौरान घायलों के परिजन मुआवजे के लिए मिले रुपये लौटाने के लिए पहुंच गए।
हालांकि सिद्धारमैया बिना पैसे वापस लिए गाड़ी में जाने की कोशिश कर रहे थे तभी एक महिला ने पुलिस के एस्कॉर्ट वाहन पर 2 लाख रुपए फेंककर अपने गुस्से का इजहार किया। महिला का कहना था कि, 'वे (राजनेता) केवल चुनाव के दौरान वोट मांगने आते हैं और किसी भी समस्या पर ध्यान नहीं देते। परिवारों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि कोई नेता उनसे मिलने नहीं आया है और उन्हें पैसा नहीं, बल्कि न्याय चाहिए।महिला ने कहा कि पैसा हमारी समस्या का समाधान नहीं है। हम भीख मांगकर परिवार का पालन-पोषण करने के लिए तैयार हैं।
सिद्धारमैया ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह उनके दर्द को समझते हैं जिससे परिवार गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह पहले नहीं गए थे क्योंकि स्थिति संवेदनशील थी और वह इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहते थे। ऐसी स्थितियों में, किसी को भी शांति और सद्भाव को भंग करने या अनावश्यक उकसाने के लिए कुछ भी नहीं करना चाहिए। पुलिस की निष्क्रियता से शांति और सौहार्द भंग हुआ। मैंने अपनी व्यक्तिगत हैसियत से मुआवजे के रूप में पैसे दिए थे। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार को पीड़ित परिवारों के लिए यह करना चाहिए था।












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