Wayanad Bypoll: क्या केरल में प्रियंका गांधी की जीत के लिए मुस्लिम कट्टरपंथियों के भरोसे है कांग्रेस?
Wayanad By-Election 2024: कांग्रेस पार्टी पर केरल की वायनाड लोकसभा चुनाव में लगातार कट्टरपंथी मुसलमानों से समर्थन लेने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन पार्टी इसका खुलकर खंडन नहीं कर पा रही है। पहले खुद इंडिया ब्लॉक में उसकी सहयोगी सीपीएम के दिग्गज और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने यह आरोप लगाया। फिर पार्टी के कार्यकारी महासचिव प्रकाश करात ने भी गंभीर आरोपों को दोहराया, लेकिन कांग्रेस इन आरोपों का खुलकर विरोध नहीं कर पा रही है।
शुक्रवार को पहले केरल के सीएम विजयन ने वायनाड में कांग्रेस प्रत्याशी प्रियंका गांधी पर आरोप लगाया कि वह जमात-ए-इस्लामी के समर्थन से चुनाव लड़ रही हैं। उन्होंने कांग्रेस को यहां तक चुनौती दी कि वह साफ करे कि उसे इस कट्टरपंथी संगठन के वोट की जरूरत नहीं है।

कांग्रेस पर लगा जमात-ए-इस्लामी से समर्थन लेने का आरोप
फिर करात ने कहा, 'उन्होंने समर्थन की घोषणा कर कहा है कि जमात-ए-इस्लामी वहां कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन कर रही है....हम जमात-ए-इस्लामी के राजनीतिक विचारधारा के विरोधी हैं। हम कांग्रेस से पूछ रहे हैं कि यह ऐसी पार्टी से समर्थन लेना सही है?'
जमात-ए-इस्लामी मुस्लिम शासन की स्थापना चाहता है- सीपीएम
इससे पहले मुख्यमंत्री विजयन ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा, 'वायनाड उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी के मुंह से धर्मनिरपेक्षता का मुखौटा पूरी तरह से उतर गया है। प्रियंका गांधी जमात-ए-इस्लामी के समर्थन से चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस का इसपर क्या स्टैंड है?'
उन्होंने इंडिया ब्लॉक में सीपीएम की सहयोगी कांग्रेस पार्टी के मंसूबे पर सवालिया निशान लगाते हुए लिखा, 'हमारा देश जमात-ए-इस्लामी से अनजान नहीं है। क्या इस संगठन की विचारधारा लोकतंत्र के सिद्धांतों से मेल खाती है? जमात-ए-इस्लामी राष्ट्र और लोकतंत्र को महत्त्व नहीं देती।' उनके मुताबिक, 'जमात-ए-इस्लामी के लिए दुनिया भर में इस्लामी शासन ही सबसे अहम है। वे इस्लामी शासन के पक्ष में हैं।'
वायनाड में इंडिया ब्लॉक के बीच ही विचारधारा की लड़ाई
राष्ट्रीय स्तर पर सीपीएम और कांग्रेस भाजपा विरोधी इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं। यह गठबंधन भाजपा और उसकी अगुवाई वाले एनडीए पर सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हैं। लेकिन, वायनाड में सांप्रदायिकता के मुद्दे पर इंडिया ब्लॉक की अपनी ही विचारधारा तार-तार हो रही है।
क्या कांग्रेस में जमात का समर्थन ठुकरने की हिम्मत है- सीपीएम
क्योंकि, केरल में सत्ताधारी एलडीएफ (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) के नेता ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 'क्या जो लोग धर्मनिरपेक्षता के साथ मजबूती से खड़े हैं, उन्हें सभी तरह की सांप्रदायकिता का कड़ाई से विरोध नहीं करना चाहिए? क्या कांग्रेस ऐसा कर पाएगी?....यहां तक कि अब मुस्लीम लीग भी कांग्रेस-जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के साथ खड़ी है...क्या कांग्रेस कह सकती है कि उसे जमात-ए-इस्लामी के वोटों की जरूरत नहीं है?....क्या कांग्रेस यह स्टैंड ले सकती है?'
मुस्लिम लीग के समर्थन के लिए भी घिरत रही है कांग्रेस
वायनाड सीट पर कांग्रेस को सीपीआई और बीजेपी के साथ त्रिकोणीय मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। एलडीएफ के नेताओं की ओर से कांग्रेस को ऐसे समय में मुस्लिम कट्टरपंथियों का सहयोग लेने को लेकर घेरा जा रहा है, जब कांग्रेस पार्टी अपने हर मौसम में सहयोगी रही मुस्लिम लीग (IUML)के झंडे से भी परहेज करती है। क्योंकि, जब यहां से राहुल गांधी चुनाव लड़ रहे थे, तो बीजेपी ने मुस्लिम झंडे को लेकर कांग्रेस को घेर कर उसे बैकफुट पर आने को मजबूर कर दिया था।
वैसे केरल के सीएम के आरोपों पर केरल में जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रेसिडेंट पी मुजीब रहमान ने उनसे पूछा कि 'ये बताएं कि इस संगठन के बारे में उनका नजरिया क्यों और कब बदल जाता है।'
बीजेपी के खिलाफ मजबूत करने के लिए कांग्रेस को समर्थन- जमात-ए-इस्लामी
उनके मुताबिक, 'हालिया लोकसभा चुनावों में जमात ने सीपीएम को तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में समर्थन दिया। सीपीएम ने हमारे समर्थन से मना क्यों नहीं किया? केरल में 2004 से हम हर चुनाव में सीपीएम को समर्थन कर रहे हैं। 2020 तक सीपीएम ने वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया (जमात का राजनीतिक विंग) के समर्थन से कई स्थानीय निकायों में शासन किया।'
जमात के नेता का आरोप है कि बहुसंख्यक वोट के ध्रुवीकरण के लिए सीपीएम के नेता ये सब कह रहे हैं। उनका आरोप है कि 'इससे सिर्फ संघ परिवार को मदद मिलेगी। 2019 के लोकसभा चुनावों से ही हमने कांग्रेस पार्टी को समर्थन का फैसला किया है, क्योंकि यह सबसे बड़ी पार्टी है, जो एंटी-बीजेपी फोर्स के रूप में उभरी है और कांफी मजबूत है।'
वायनाड में मुस्लिम आबादी
2011 की जनगणना के मुताबिक वायनाड डिले में मुसलमानों की आबादी 29% है और पिछले दो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी राहुल गांधी की बहुत ज्यादा वोटों से जीत के पीछे मुस्लिम वोटों की उनके पक्ष में गोलबंदी को बहुत बड़ा कारण माना जाता है।












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