केरल में बंद हो जाएंगे बार तो तस्करी का हो जाएगा जन्म
बेंगलोर। केरल में दारू के बार्स बंद होने की चर्चा जोरों पर है। राज्य सरकार इसके लिए पूरा प्लान भी कर चुकी है और मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने इस पूरी प्रक्रिया की घोषणा तक कर दी है। राज्य को दस साल में शराब फ्री राज्य बनाने का संकल्प लिया गया है। कहा जा रहा है कि तीन सौ से ज्यादा बार जल्द हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे। लेकिन सवाल, किसी नाग की तरह होते हैं, जो फन उठाते ही हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि क्या बार्स औऱ एल्कॉहल पर पाबंदी लगा देने क्या एल्कोहल की आदत छूट जाएगी।

क्या वाकई कैरल एल्कोहल फ्री बन जाएगा। नहीं, क्योंकि यह तो लत है। इसी लत ने देश में तस्करी को जन्म दिया है। जहां कहीं भी शराब की आवक कम होती है, जहां कहीं भी तंबाकू या नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर पाबंदी होती है वहां पर यह लत तस्करों को खुले तौर पर आमंत्रित भी करती है। इसके लिए हमारे देश उदाहरण भी मिल जाएंगे।
पहला उदाहरण
गुजरात एक ऐसा राज्य जहां पर शराब पर पाबंदी है। लेकिन क्या यह कहा जा सकता है कि शराब वहां नहीं पी जाती। गुजरात में बार्स पर पाबंदी है। क्या यह कहा जा सकता है कि पाबंदी ने पीने वालों को रोक दिया है। नहीं। दरअसल, सच्चाई यह है कि गुजरात के बॉर्डर से सटा राजस्थान राज्य के शराब माफिया धड़ल्ले से शराब के तस्करों को आमंत्रित कर रहे हैं। पिछले कई वर्षों से राजस्थान का उदयपुर शहर जो गुजरात के अहमदाबाद से सबसे पास पड़ने वाला शहर है। इसके आस-पास शराब धड़ल्ले से बिकती है। रात के अंधेरे में शराब पहुंचा दी जाती है लेकिन किसी को कानो कान खबर भी नहीं होती।
दूसरा उदाहरण
दिल्ली, राजस्थान जैसे ऐसे राज्य हैं जहां पर बढ़चढ़कर गुटखे और तंबाकू पर पाबंदी लगी हुई है। लेकिन क्या यहां इसका कारोबार रुक पाया है। नहीं। क्योंकि जब तक नशीले पदार्थों के खरीदार कम नहीं होंगे तब तक यह लत तस्करी को आमंत्रित करेगी। दिल्ली और राजस्थान में गुटखे और तंबाकू अभी भी बिकते है। लेकिन इसका पता तो पुलिस तक को नहीं है कि आखिर इनकी यह कहां से आ रही है












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