CAA के खिलाफ केरल विधानसभा के प्रस्ताव को राज्यपाल ने गैरकानूनी बताया
नई दिल्ली। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने केरल विधानसभा द्वारा नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव को बकवास बताया है। केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद के बयान का समर्थन करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस प्रस्ताव की कोई कानूनी या संवैधानिक वैद्यता नहीं है। नागरिकता पूरी तरह से केंद्र का विषय है लिहाजा इस प्रस्ताव का कोई मतलब नहीं है। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पर राज्यपाल ने कहा कि मैंने पहले ही अपनी राय इसपर जाहिर कर दी है कि सरकार को ऐसे मसलों पर समय और पैसा बर्बाद नहीं करना चाहिए जो सरकार के कार्यक्षेत्र से बाहर है। लेकिन अगर केंद्र सरकार से कोई मांग की जाती है तो मुझे कोई समस्या नहीं है।
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कानून में भेदभाव का आरोप
बता दें कि इस हफ्ते लेफ्ट की अगुवाई वाली सरकार ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर एक प्रस्ताव नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ केरल विधानसभा में पास किया है। जिसमे कहा गया है कि यह कानून मुसलमानों के खिलाफ और यह धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करता है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में धर्म के आधार पर प्रताड़ित अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, बशर्ते वह 31 दिसंबर 2014 से भारत में रह रहे हो।

केरल विधानसभा में प्रस्ताव पारित
दरअसल केरल के मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पास करके कहा था कि केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन कानून को वापस ले। इसपर प्रसाद ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि जो लोग संविधान की शपथ लेकर सत्ता में आए हैं वो असंवैधानिक बयान दे रहे हैं। जो सरकारें यह दावा कर रही हैं कि वह अपने प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून को लागू नहीं करेंगी उन्हें एक बार फिर से इस बाबत कानूनी सलाह लेने की जरूरत है। बता दें कि कई प्रदेश जहां भाजपा की सरकार नहीं है उन्होंने नागरिकता कानून को लागू करने से इनकार कर दिया है। इसमे पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान शामिल हैं।

भाजपा ने दायर की याचिका
बता दें कि भाजपा नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन के खिलाफ याचिका दायर की है। यह याचिका केरल विधानसभा द्वारा नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है, उसके खिलाफ दायर की गई है। जिसपर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री पीनारयी विजयन ने कहा कि ऐसा पहली बार सुना जा रहा है कि राज्य सभा के सदस्य ने मुख्यमंत्री के खिलाफ याचिकका दायर की है।

रविशंकर प्रसाद ने दी थी सलाह
इससे पहल रविशंकर प्रसाद ने कहा कि नागरिकता यूनियन लिस्ट में शामिल है। ये यूनियन लिस्ट में 17 वें स्थान पर हैं। इस पर किसी भी कानून को पारित करने का अधिकार सिर्फ संसद के पास है। किसी राज्य विधानसभा को इस पर कानून बनाने या संशोधन का अधिकार नहीं। केरल की विधानसभा को भी नहीं। संविधान में संसद और राज्य विधानसभाओं को दिए अधिकार स्पष्ट हैं। मैं केरल के मुख्यमंत्रीसे आग्रह करना चाहूंगा कि वो बेहतर कानूनी सलाह लें। उन्हें जो अधिकार ही नहीं है, वो ना करें।












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