Kerala Election: हिंदू वोटर्स को साधने में जुटी LDF, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर लिया यूटर्न
Kerala Election: केरल में सत्तारूढ़ वाम मोर्चा (LDF) सरकार ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर अपने रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं। सरकार ने कहा है कि कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा के बाद वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करेगी। माना जा रहा है कि चुनाव को देखते हुए प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है।
सरकार के इस नए रुख ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। पहले मंदिर की परंपराओं के खिलाफ खड़ी सरकार अब सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं के समर्थन की बात कर रही है। राज्य में जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव के बीच इस फैसले को हिंदू मतदाताओं को साधने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

Sabarimala Temple में महिलाओं की एंट्री पर बदला रुख
सीपीएम के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने कहा कि पार्टी ने मौजूदा परिस्थितियों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया है कि इस मामले में संतुलित रुख अपनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अपने मूल विचार से पीछे हटने की बात नहीं कर रही है, बल्कि अदालत के सामने उठाए गए संवैधानिक सवालों के आधार पर जवाब दिया जाएगा। गोविंदन के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने सीधे तौर पर यह सवाल नहीं पूछा है कि सबरीमला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिया जाना चाहिए या नहीं। अदालत ने सात व्यापक संवैधानिक प्रश्नों पर जवाब मांगा है, जो केवल सबरीमला तक सीमित नहीं हैं बल्कि सभी धर्मों से जुड़े अधिकारों और परंपराओं से संबंधित हैं।
LDF सरकार लेगी धार्मिक विद्वानों से सलाह
सीपीएम नेतृत्व ने यह भी कहा कि धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों में निर्णय लेते समय संबंधित क्षेत्र के विद्वानों और धार्मिक विशेषज्ञों से चर्चा जरूरी है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने त्रावणकोर देवस्वयं बोर्ड के रुख का समर्थन करते हुए सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को लेकर अपने पहले के रुख पर पुनर्विचार किया है। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी, जिसका उस समय केरल सरकार ने समर्थन किया था।
Kerala Election: चुनावी मौसम में बदला सरकार का रुख
इस फैसले के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे और यह मुद्दा लंबे समय तक राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। अदालत ने राज्य सरकार समेत सभी पक्षों को 14 मार्च तक अपना स्पष्ट रुख प्रस्तुत करने के लिए कहा है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले राज्य सरकार हिंदू वोटर्स की नाराजगी कम करने की दिशा में पहल कर रही है।
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