कुछ भी बोलें केजरीवाल, दिल्ली में भजपा की सरकार ही बनेगी

नई दिल्ली( विवेक शुक्ला)। दिल्ली में नई सरकार कब बनेगी? इससे पहले कि इस सवाल का हल चैनलों पर खोजते वैसे ही सुप्रीम कोर्ट से बाहर निकले आम आदमी पार्टी के वकील प्रशांत भूषण का बयान प्रसारित कर दिया गया। भूषण ने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट ने सख्त दलीलें दी हैं और अब हमें लगने लगा है कि परसों होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट लेफ्टनेंट गवर्नर नजीब जंग को भाजपा को न्योता देने से रोक देगा। अब अगर राजनीतिक समीकरण पर एक नजर डालें तो लगभग यह साफ हो चुका है कि दिल्ली में अगली सरकार भाजपा की बनकर ही रहेगी।

राजधानी में बीते कई महीनों से सरकार के गठन को लेकर चल रही कयासबाजी के बीच आज सुप्रीम कोर्ट ने 'आप' द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र से पूछा है कि क्या भाजपा के पास दिल्ली में सरकार बनाने के लिए पर्याप्त नंबर है? कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या भाजपा इस स्थिति में है कि वह राजधानी में एक स्थायी सरकार दे सके? लेकिन इन सबके बीच सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी बात भी कही, जिससे भाजपा की बांछें खिल उठीं। वो यह कि लोकतांत्रित देश में ज्यादा दिन तक राष्ट्रपति शासन लागू नहीं रह सकता।

जंग का आज अवकाश पर हैं

उपराज्यपाल नजीब जंग दिल्ली में नई सरकार के गठन के लिए इस सप्ताह भाजपा को न्योता देंगे। जंग आज अवकाश पर हैं। यानी कि आने वाले दिनों में कुछ बड़ी हलचल हो सकती है। बताते चलें कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उपराज्यपाल जंग की वह सिफारिश स्वीकार कर ली है, जिसमें उन्होंने विधानसभा को भंग करने से पहले सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने का मौका देने की बात कही थी। राष्ट्रपति ने अपने फैसले से राजनिवास को अवगत करा दिया है।

क्या कह रहे हैं राजनीतिक समीकरण

लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव में जिस तरह मोदी की लहर ने कहर बरपाया है, उससे ऐसा साफ लग रहा है कि दिल्ली की तीन सीटों पर होने वाले उपचुनावों में भी भाजपा भारी मतों से जीत सकती है। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा के पास बहुमत से मात्र दो सीटें कम रह जायेंगी। उसे स्पेशल कंडीशन मान कर सरकार का गठन जारी रखा जायेगा।

क्या बोले अरविंद केजरीवाल

Arvind Kejriwal

अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि आम आदमी पार्टी ने लेफ्टनेंट गवर्रनर को वो सारे सबूत दे दिये हैं, जिनमें ये साबित हो चुका है कि भाजपा विधायकों की खरीफ-फरोख्त मं जुटी हुई है, इसके बावजूद भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया जा रहा है।

आपको याद होगा कि बीते फरवरी में अरविंद केजरीवाल सरकार के इस्तीफे के बाद से सूबे में राष्ट्रपति शासन लागू है। लोकसभा चुनाव के बाद से ही ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा कुछ अन्य विधायकों के सहयोग से दिल्ली में सरकार बना सकती है।

इससे पहले, जंग ने राष्ट्रपति को दिल्ली की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट भेजी, जिसमें यह कहा गया कि दिल्ली विधानसभा को भंग करने से पहले विधानसभा में सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने का एक मौका दिया जाना चाहिए। विधानसभा में भाजपा के सबसे अधिक सदस्य हैं।

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