केजरीवाल के नामांकन में क्यों खाली है 'ये' कॉलम ?

ट्रस्ट की तरफ से नीरज सक्सेना और अनुज अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग दिल्ली में लिखित शिकायत कर केजरीवाल का वाराणसी से नामांकन रद्द करने की मांग की है।
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आयोग को दी शिकायत में कहा गया है कि केजरीवाल ने दोबारा नामांकन में गलत शपथपत्र दाखिल किया है। इससे पूर्व दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी गलत शपथपत्र दाखिल किया था।
वाराणसी में 25 से 28 अप्रैल के बीच होने वाली शपथपत्रों की स्क्रूटनी के दौरान ट्रस्ट के प्रतिनिधि मौजूद रहकर अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे। उधर, आप के जिला संयोजक ठाकुर देवेंद्र सिंह ने कहा कि ट्रस्ट की तरफ से लगाए गए आरोप निराधार हैं। अगर शपथपत्र में गलत जानकारी दी गई होती तो नामांकन ही नहीं हो सकता था।
किन मुद्दों परसवाल ?
शपथपत्र में संपत्ति कर के बारे में केजरीवाल और उनकी पत्नी की कोई जानकारी नहीं दी गई है। जबकि दोनों आईआरएस अफसर रहे हैं। वाराणसी में दाखिल शपथपत्र में अरविंद ने खुद को पॉलिटिकल एक्टिविस्ट बताया है जबकि वह दिल्ली विधानसभा से एमएलए हैं।
वहीं, केजरीवाल ने रिश्तेदार से 11 लाख रुपये का ऋण दिखाया है लेकिन ऋण किससे लिया गया है, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। जबकि दिल्ली विधानसभा में दाखिल शपथपत्र में पत्नी का एसबीआई होमलोन से 30 लाख रुपये ऋण है, छह महीने बाद भी ऋण में कमी नहीं आई।
इसके अलावा दिल्ली विधानसभा और वाराणसी में दाखिल शपथपत्रों में गुड़गांव स्थित पत्नी के फ्लैट का पता अलग-अलग दिया गया है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथपत्र पर पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर है।
पहले ही दर्ज है शिकायत -
इसके साथ ही कोर्ट ऑफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली में शिकायत की गई थी, जिसके बाद केजरीवाल के खिलाफ क्रिमिनल कंप्लेन 7 फरवरी 2014 को दर्ज की जा चुकी है। इसी के साथ केजरीवाल की मुश्िकलों पर विराम लगता नहीं दिख रहा है। वहां बीजेपी, मनमोहन सिंह के भाई को पार्टी में शामिल कर खुद को मजबूत मान रही है तो यहां 'आप' में कुमार विश्वास नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं।












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