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पिछली जेब में बटुआ रखना रीढ़ के लिए ख़तरनाक?

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    पर्स
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    पर्स

    सवेरे नहाकर तैयार हुए, बाल ठीक किए, घड़ी पहनी, मोबाइल चेक किया और कंघी-पर्स रखकर दफ़्तर या दुकान जाने के लिए तैयार.

    दुनिया के ज़्यादातर पुरुषों की सुबह कुछ इसी तरह गुज़रती है.

    मोबाइल के अलावा इन सभी में एक और ऐसी चीज़ है, जिसे भूल जाएं तो दिन भर बड़ा अधूरा सा लगता है. वो है पर्स या बटुआ.

    इस पर्स में रुपए-पैसे, फ़ोटो, क्रेडिट-डेबिट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और दूसरे ज़रूरी पहचान पत्र सहेजे जाते हैं.

    ज़ाहिर है, इतनी सारी चीज़ एक ही जगह पर रखी जाती हैं तो पर्स के ज़िम्मे काफ़ी ज़िम्मेदारी भी होती है.

    मोटे पर्स से नुकसान क्या?

    पर्स
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    इसी वजह से वो काफ़ी मोटा भी हो जाता है. और ये पर्स कहां रखा जाता है? ज़्यादातर पीछे वाली जेब में.

    और यही आदत ख़तरनाक बन सकती है. अगर आप कुछ पलों के लिए पर्स पीछे वाली जेब में रखते हैं तो इससे कोई ख़ास दिक्कत नहीं होनी चाहिए.

    लेकिन अगर वो पूरा दिन या फिर कई घंटे आपकी बैक-पॉकेट में आराम फ़रमाता है तो आपको सोचने की ज़रूरत है.

    सोशल मीडिया पर कुछ लोग बात कर रहे हैं कि पीछे वाली जेब में मोटा पर्स रखने से रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो जाती है. क्या ये सच है?

    और हमारे यहां वैसे भी ये आदत देखी जाती है कि पर्स जितना ज़्यादा मोटा होगा, रुआब उतना ज़्यादा पड़ेगा.

    कहां हो सकता है दर्द?

    स्पाइन
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    स्पाइन

    मेंसहेल्थ में एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाटरलू के प्रोफ़ेसर ऑफ़ स्पाइन बायोमेकेनिक्स स्टुअर्ट मैकगिल ने बताया कि ये पर्स कुछ देर के लिए रखने के लिए होता है लेकिन अगर आप कार्ड, बिल और सिक्कों के गठ्ठर पर कई घंटे बैठेंगे तो इससे हिप जॉइंट और कमर के निचले हिस्से में दर्द होने लगेगा.

    ये दिक्कत शुरू होती है सियाटिक नर्व के साथ, जो ठीक हिप जॉइंट के पीछे होती है. मोटा पर्स रखने की वजह से यही तंत्रिका बटुए और हिप के बीच में दबती है और मुसीबत खड़ी हो सकती है.

    ये गंभीर मामला इसलिए है क्योंकि दर्द भले हिप से शुरू होता है लेकिन ये पैरों के निचले तक भी जा सकता है.

    डॉ मैकगिल ने पीठ के दर्द को स्टडी करने के लिए एक प्रयोग किया जिसमें एक हिप के नीचे छोटे आकार के वॉलेट रखा.

    कूल्हे पर क्या होगा असर?

    कमर दर्द
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    कमर दर्द

    पिछली जेब में मोटा पर्स रखने की वजह से पेल्विस (कूल्हा) भी एक तरफ़ झुका रहता है जिसकी वजह से रीढ़ की हड्डी पर और ज़्यादा दबाव पड़ता है.

    सीधे बैठने के बजाय कमर के निचले हिस्से में इंद्रधनुष जैसा आकार बन जाता है.

    और पर्स जितना ज़्यादा मोटा होगा, शरीर उतना ज़्यादा एक तरफ़ झुकेगा और उतना ही ज़्यादा दर्द होगा. लेकिन दिक्कत ये है कि मोटे पर्स को आगे वाली जेब में भी रखना मुश्किल होता है क्योंकि ऐसा करने से आगे भी दर्द हो सकता है.

    कुछ डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ़ मोटा पर्स रखने से रीढ़ की हड्डी या स्पाइन में टेढ़ापन आ जाएगा, ये भले सच न हो लेकिन अगर स्पाइन में पहले से कोई दिक्कत है तो ये काफ़ी मुसीबत ला सकता है.

    दिल्ली के प्राइमस अस्पताल में हड्डियों के डॉक्टर कौशल कांत मिश्रा से जब पूछा गया कि क्या पिछली जेब में पर्स रखने से क्या दिक्कत होती है, ''आदर्श स्थिति में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. अगर स्पाइन सामान्य है तो कोई दिक्कत नहीं होगी.''

    लंबे घंटे ख़तरनाक

    स्पाइन
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    लेकिन इस मामले में रीढ़ की हड्डी का सामान्य होना ज़रूरी है.

    क्या फिर ये मान लिया जाए कि पिछली जेब में मोटा पर्स रखने से कोई दिक्कत नहीं होगी, उन्होंने कहा, ''ऐसा भी नहीं है. अगर आप कुछ वक़्त के लिए ऐसा करते हैं तो कोई बात नहीं है लेकिन अगर कई घंटे ऐसा करते हैं तो दर्द तो होगा ही.''

    उन्होंने कहा, ''अगर कई घंटे कोई बटुआ पीछे वाली जेब में रखकर बैठता है तो इससे रीढ़ की हड्डी का आकार नहीं बदलेगा लेकिन साइटिका ज़रूर हो सकता है.''

    डॉ मिश्रा ने बताया, ''ये रेडिएटिंग पेन होता है मतलब ऐसा दर्द जो एक ही जगह न होकर, बार-बार लोकेशन बदलता है.''

    और इस दर्द से कैसे निपटा जा सकता है?

    • घुटने मोड़ें और ज़मीन पर लेट जाएं. घुटने नीचे ले जाते वक़्त दायीं तरफ़ ले जाएं जबकि कंधे और हिप ज़मीन पर बनाए रखें और बायीं ओर ले जाएं. इससे आपको कमर के निचले हिस्से काफ़ी आराम महसूस होगा.
    कमर दर्द
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    कमर दर्द
    • ज़मीन पर लेट जाएं और घुटनों को छाती से लगा लें और पैरों का बाहरी हिस्सा पकड़ लें. कमर के ऊपरी हिस्से को आधार बनाकर रोल करें और आप देखेंगे कि पीठ का दर्द काफ़ी हद तक ठीक हो रहा है.

    आपको बटुआ कैसे रखना चाहिए?

    • पैसे रखने वाली क्लिप या फिर पतले स्टाइल वाला वॉलेट रख सकते हैं, जो आसानी से आगे वाली पॉकेट में समा जाए
    • ऐसा बटुआ भी ख़रीद सकते हैं जिसके साथ चाबियां जोड़कर रखी जा सकें. ऐसा करने से जब कभी आप बटुआ पीछे वाली जेब में रखकर बैठना चाहेंगे तो चाबी चुभेंगी और आप उसे आगे रखने के लिए मजबूर होंगे
    • अगर आप खाकी पेंट या ड्रेस पेंट पहनते हैं तो उसका बटन बंद कर लीजिए ताकि पीछे वॉलेट रखने की आदत ही न बने
    • अगर संभव हो तो बटुआ रखना ही छोड़ दीजिए. बहुत से ऐसे लोग हैं जो पतले कार्डहोल्डर और पैसा आगे की जेब में रख लेते हैं
    • अपने बटुए या फिर मोबाइल फ़ोन को पीछे वाली जेब से निकालकर रखिए और इसे एक चैलेंज के रूप में देखिए.

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    BBC Hindi
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    English summary
    Keeping the wallet in the previous pocket dangerous for the spine

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