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कर्नाटक में मुफ्त चावल योजना का क्या होगा? कांग्रेस-बीजेपी में राजनीतिक घमासान

कर्नाटक में चुनाव के बाद मुफ्त चावल पर जमकर राजनीति हो रही है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह 'अन्न भाग्य' योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे के परिवार के प्रत्येक सदस्यों को प्रति महीने 10 किलो चावल देने की गारंटी को पूरा करने में रोड़े अटका रही है।

सीएम सिद्दारमैया ने कहा है कि कर्नाटक केंद्र से मुफ्त में चावल नहीं मांग रहा है, बल्कि वह इसे खरीदने के लिए तैयार है। इसपर भाजपा ने जोरदार पलटवार किया है। पूर्व सीएम येदियुरप्पा ने कहा है कि मुख्यमंत्री जानबूझकर कंफ्यूजन पैदा कर रहे हैं।

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10 किलो से 'एक ग्राम भी कम' चावल मंजूर नहीं- बीजेपी
विपक्षी भाजपा का कहना है कि तथ्य यह है कि केंद्र सरकार ने 5 किलो मुफ्त चावल देने का वादा किया था और वह यह दे भी रही है। भाजपा के दिग्गज नेता और कर्नाटक पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा ने चेतावनी दी है कि अगर कांग्रेस ने अपने वादे मुताबिक 'अन्न भाग्य' योजना के तहत 10 किलो से 'एक ग्राम भी कम' चावल दिया तो उनकी पार्टी इसे स्वीकार नहीं करेगी।

केंद्र सरकार राजनीति कर रही है- सीएम सिद्दारमैया
मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने आरोप लगाया कि 'केंद्र सरकार राजनीति कर रही है। हमने उन्हें (एफसीआई) 9 जून को लिखा था कि वे हमें 2.28 लाख मीट्रिक टन चावल दें। उन्होंने 12 जून को जवाब दिया कि वह सप्लाई करेंगे। लेकिन, 14 जून को एफसीआई के एमडी और चेयरमैन ने हमें लिखा कि हम चावल नहीं दे सकते।'

'गरीबों के कार्यक्रम में बाधा क्यों डाली जा रही है'
सीएम ने सवाल किया कि 'इसका क्या अर्थ निकाला जाना चाहिए अगर वह 12 जून को कह रहे थे कि उनके पास सात लाख मीट्रिक टन चावल है और बाद में मना कर देते हैं कि उनके पास चावल नहीं है।' सीएम ने पूछा है कि 'गरीबों के कार्यक्रम में बाधा क्यों डाली जा रही है।' हालांकि, इस मसले पर पीएम मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद उनसे मिलने की इच्छा जताई है।

छत्तीसगढ़ ज्यादा कीमत बता रहा है- सीएम सिद्दारमैया
कर्नाटक सरकार की मुश्किल ये है कि कांग्रेस शासित समेत अन्य राज्य सरकारों से भी उसे बहुत उत्साहजनक उत्तर नहीं मिल रहा है। मसलन, सीएम ने बताया, आंध्र प्रदेश ने जवाब नहीं दिया कि वह चावल देगा या नहीं। तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव से बात करने का भी फायदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, 'हालांकि, छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा कि वह 1.5 लाख मीट्रिक टन सप्लाई करेंगे। उनका कहना है कि वे 2.28 लाख मीट्रिक टन चावल नहीं दे सकते। वह जो दर बता रहे हैं, वह भी ज्यादा है।'

एफसीआई से सस्ता चावल खरीदना चाहती है कर्नाटक सरकार
जब उनसे सवाल किया गया कि बीजेपी नेता कह रहे हैं कि कर्नाटक के किसानों से चावल खरीदा जा सकता है। तो सिद्दारमैया ने कहा कि उन्हें सलाह देने से अच्छा है कि केंद्र सरकार पर दबाव डालें। उन्होंने कहा कि रायचूर में पैदा होने वाला सोना मसूरी चावल 55 रुपए किलो बिकता है, जो राज्य सरकार खरीदकर गरीबों को नहीं दे पाएगी। उन्होंने बताया कि एफसीआई के 5 किलो चावल का दाम 36.6 रुपए प्रति किलो पड़ता है।

जानबूझकर कंफ्यूजन पैदा कर रही है कांग्रेस- येदियुरप्पा
उधर पूर्व सीएम और बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा ने चावल के मामले में कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस पार्टी जानबूझकर कंफ्यूजन पैदा करने की कोशिश कर रही है। पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार 5 किलो मुफ्त चावल (परिवार के सभी सदस्यों को) दे रही है।'

यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है-येदियुरप्पा
उन्होंने कहा, 'केंद्र अतिरिक्त चावल देने के लिए तैयार नहीं हुआ था। यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। खरीदकर 10 किलो अतिरिक्त चावल देने का वादा पूरा किया जाना चाहिए। लोग एक ग्राम भी कम अनाज नहीं स्वीकार करेंगे। मैं जोर देकर कह रहा हूं कि उन्हें अपने वादे पूरे करने चाहिए।'

'जो भी करें, लेकिन चावल जरूर दें'
येदियुरप्पा बोले बिना वजह के केंद्र सरकार को दोष देना सही नहीं है। उन्होंने कहा, 'मोदी ने कभी नहीं कहा कि वह अतिरिक्त चावल देंगे। मोदी पहले से ही 5 किलो चावल मुफ्त दे रहे हैं।' उन्होंने सिद्दारमैया और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार से कहा है कि कंफ्यूजन पैदा करना बंद करें, और बीपीएल परिवारों को 10 किलो चावल देने के लिए जो भी संभव हो करें।

'इसका मतलब है कि वह चुनावी वादों से पीछे हट रहे हैं'
पूर्व सीएम बसवराज बोम्मई ने भी चावल पर गफलत के लिए सिद्दारमैया सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस को चावल के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। वह चावल नहीं मिलने का बहाना बना रहे हैं। इसका मतलब है कि वह चुनावी वादों से पीछे हट रहे हैं। अब वह कह रहे हैं कि छत्तीसगढ़ से चावल लाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे लिए यही काफी है कि गरीबों को फायदा मिले।'(इनपुट-पीटीआई)

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