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कर्नाटक में अचानक कैसे हो गई 20 मोर की मौत? मंत्री ने गठित की जांच टीम, 5 दिन में मांगी रिपोर्ट

Peacocks Mysterious Death: कर्नाटक के तुमकुरु जिले में सावन के पवित्र महीने में एक दिल दहलाने वाली घटना ने सबको झकझोर दिया। मधुगिरी तालुक के हनुमंतपुरा गांव में सोमवार को 20 मोर (3 नर, 17 मादा) मृत पाए गए। भारत के राष्ट्रीय पक्षी की इस सामूहिक मौत ने वन विभाग को सकते में डाल दिया है।

वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं, और सवाल उठ रहा है-क्या यह कीटनाशक से हत्या थी, या अनजाने में हुआ हादसा? आइए, इस सनसनीखेज खबर की पूरी कहानी जानते हैं...

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हनुमंतपुरा में मातम, मोरों की मौत का रहस्य

तुमकुरु के मधुगिरी तालुक में मेदिगेशी के पास एक खेत में किसानों ने 20 मोरों के शव देखे। आनन-फानन में उन्होंने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मृत मोरों में 3 नर और 17 मादा थीं। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका, लेकिन शक की सुई कीटनाशक की ओर है। वन विभाग ने शवों के नमूने फोरेंसिक साइंस लैब भेजे हैं, और मामले की गहराई से जांच शुरू हो गई है।

वन मंत्री का सख्त रुख

कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे ने इस घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने उप वन संरक्षक (DCF) की अगुवाई में एक जांच टीम गठित की और 5 दिन में रिपोर्ट मांगी है। खंड्रे ने कहा, 'यह सिर्फ मोरों की मौत नहीं, बल्कि हमारी प्राकृतिक विरासत पर हमला है। डेढ़ महीने पहले चामराजनगर में बाघिन और उसके चार शावकों की जहर से मौत, फिर बांदीपुर में बंदरों की हत्या, और अब हमारे राष्ट्रीय पक्षी की सामूहिक मौत। यह गंभीर मामला है, और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।'

मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि अगर भविष्य में अनुसूची I या II के तहत आने वाली कोई वन्यजीव प्रजाति मृत पाई जाती है, तो तत्काल ऑडिट हो और उनके कार्यालय को सूचित किया जाए।

कीटनाशक का शक, हत्या या हादसा?

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि मोरों की मौत कीटनाशक के सेवन से हुई हो सकती है। वन विभाग की प्रारंभिक जांच में संदेह है कि या तो खेतों में छिड़के गए कीटनाशक को मोरों ने खा लिया, या फिर जानबूझकर जहर देकर उनकी हत्या की गई।

खंड्रे ने जांच टीम को यह पता लगाने का आदेश दिया है कि क्या यह एक सुनियोजित साजिश थी, या अनजाने में कीटनाशक युक्त फसल खाने से हादसा हुआ। नमूने फोरेंसिक लैब में भेजे गए हैं, और जल्द ही सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

कर्नाटक में वन्यजीवों पर संकट!

यह पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में वन्यजीवों की रहस्यमय मौत हुई है। चामराजनगर की माले महादेश्वर पहाड़ियों में एक बाघिन और उसके चार शावकों की जहर से मौत, और बांदीपुर के पास बंदरों की हत्या ने पहले ही वन विभाग को सतर्क कर दिया था। कर्नाटक में 5 राष्ट्रीय उद्यान और 30 अभयारण्य हैं, जो बांदीपुर, नागरहोल और बिलीगिरी जैसे क्षेत्रों में जैव विविधता की रक्षा करते हैं। लेकिन लगातार हो रही ऐसी घटनाएं सवाल उठा रही हैं कि क्या वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं?

क्या कहता है कानून?

मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित है। इनकी हत्या या शिकार गंभीर अपराध है, जिसमें 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है। अगर कीटनाशक से जानबूझकर हत्या की पुष्टि होती है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई तय है।

वन विभाग ने मामला दर्ज कर लिया है, और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। क्या यह हादसा था, या सुनियोजित साजिश? क्या दोषियों को सजा मिलेगी, या यह मामला भी अनसुलझा रह जाएगा? सावन के पवित्र महीने में राष्ट्रीय पक्षी की मौत ने न केवल तुमकुरु, बल्कि पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है। वन मंत्री खंड्रे ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन अब नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हैं।

ये भी पढ़ें- उत्तराखंड में 6,500 फीट की ऊंचाई पर दिखे मोर, वन्यजीव विशेषज्ञ पर्यावरणीय बदलाव से चिंतित

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